मध्य प्रदेश के प्रमुख बांधों में पानी की मात्रा घटकर 35.9% रह गई है। बरगी, राजघाट, और संजय सरोवर बांध सूखने की कगार पर हैं।
सूखने की कगार पर बरगी, राजघाट, संजय सरोवर और तवा बांध
जनमानस को मानसून का बेसब्री से इंतजार है, लेकिन मानसून अभी प्रदेश की देहरी से काफी दूर है। इस चिंताजनक स्थिति में प्रदेश के अधिकांश बांध तेजी से खाली होते जा रहे हैं। हालात यह हैं कि राज्य के 11 प्रमुख बांधों में उनकी कुल भंडारण क्षमता का केवल 35.9 प्रतिशत पानी ही शेष बचा है। हालांकि यह मात्रा सामान्य स्तर से 1.11 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) अधिक है। चिंता की बात यह है कि बरगी, राजघाट, संजय सरोवर और तवा जैसे बड़े बांध सूखने की कगार पर पहुंच चुके हैं।
मई के अंत में आई गिरावट
राज्य के बांधों की कुल फुल रिजर्वॉयर लेवल (एफआरएल) क्षमता 31.175 बीसीएम है। पिछले डेढ़ माह में जल स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 16 अप्रैल 2026 को इन बांधों में 15.837 बीसीएम जल उपलब्ध था, जो मई के अंत तक घटकर 11.194 बीसीएम रह गया।
केंद्रीय जल आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राजघाट, संजय सरोवर और तवा बांध की जल भंडारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। राजघाट में मात्र 0.036 मिलियन एकड़-फीट जल शेष है। संजय सरोवर लगभग खाली हो चुका है, जहां जल उपलब्धता शून्य के बराबर है। तवा बांध में भी केवल 0.123 एमएएफ जल उपलब्ध है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य में कुल 11.194 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) जल उपलब्ध है। यह मात्रा 29 मई 2025 को उपलब्ध 11.312 बीसीएम जल की तुलना में 0.118 बीसीएम कम है। वहीं, इसी अवधि के सामान्य स्तर 10.080 बीसीएम की तुलना में यह 1.114 बीसीएम अधिक है। मानसून पूर्व जल उपलब्धता के लिहाज से इस स्थिति को संतोषजनक माना जा रहा है।जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान भंडारण सामान्य स्तर से ऊपर होने के कारण प्रदेश में पेयजल और सिंचाई को लेकर तत्काल कोई संकट नहीं है।
भोपाल में नहीं रहेगी पेयजल की समस्या
राजधानी भोपाल की पेयजल व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाले कोलार डैम में उपलब्ध जल शहरवासियों को फिलहाल राहत देता है। वर्तमान में डैम में लगभग 47 प्रतिशत जल उपलब्ध है। अधिकारियों के अनुसार मानसून आने तक यह मात्रा पर्याप्त मानी जा रही है, इसलिए राजधानी में पेयजल संकट की आशंका नहीं है।