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मध्यप्रदेश क्रिकेट का नया युग

मध्यप्रदेश प्रीमियर लीग : प्रदेश क्रिकेट की नई शक्ति, महिला क्रिकेट को भी मिल रही नई उड़ान

करोड़ों के निवेश, खिलाड़ियों की नीलामी और बढ़ती लोकप्रियता के बीच एमपीएल बना मध्यप्रदेश के क्रिकेट भविष्य का सबसे बड़ा मंच


मध्यप्रदेश प्रीमियर लीग  प्रदेश क्रिकेट की नई शक्ति महिला क्रिकेट को भी मिल रही नई उड़ान

 अनुराग तागड़े  
इंदौर। एक समय था जब मध्यप्रदेश के प्रतिभाशाली क्रिकेटरों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ता था। रणजी ट्रॉफी या आयु वर्ग की प्रतियोगिताएं ही उनके लिए पहचान का प्रमुख माध्यम थीं। लेकिन आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। मध्यप्रदेश प्रीमियर लीग (एमपीएल) ने प्रदेश क्रिकेट को एक नया आयाम दिया है। आईपीएल की तर्ज पर विकसित यह लीग न केवल युवा खिलाड़ियों को बड़ा मंच प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी सशक्त बना रही है। मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) और ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन (जीडीसीए) के संयुक्त प्रयासों से आयोजित एमपीएल आज प्रदेश का सबसे बड़ा क्रिकेट ब्रांड बन चुका है। इस लीग ने इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे जिलों के खिलाड़ियों को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है।

प्रतिभाओं के लिए अवसरों का नया द्वार

एमपीएल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का काम किया है। लाइव प्रसारण, पेशेवर कोचिंग स्टाफ, आधुनिक विश्लेषण तकनीक और बड़े दर्शक वर्ग के कारण अब चयनकर्ताओं और फ्रेंचाइजी स्काउट्स की नजर सीधे मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों पर पड़ रही है। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश ने भारतीय क्रिकेट को रजत पाटीदार, वेंकटेश अय्यर, आवेश खान, कुमार कार्तिकेय और शुभम शर्मा जैसे खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने आईपीएल और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

पहली बार खिलाड़ियों को मिला करोड़ों के खेल का हिस्सा बनने का अवसर

वर्ष 2026 में एमपीएल ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पुरुष खिलाड़ियों के लिए आईपीएल शैली की नीलामी प्रणाली लागू की। इससे पहले राज्य स्तरीय क्रिकेट में खिलाड़ियों को सीमित पारिश्रमिक ही प्राप्त होता था, लेकिन अब फ्रेंचाइजी सीधे खिलाड़ियों पर बोली लगा रही हैं।इस नीलामी में आईपीएल स्टार अशुतोष शर्मा सबसे महंगे खिलाड़ियों में शामिल रहे, जिन्हें 15 लाख रुपये में खरीदा गया। वहीं अक्षत रघुवंशी को 13.80 लाख रुपये, अनीकेत वर्मा को 13.20 लाख रुपये तथा शिवांग कुमार को 13 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई।यह पहली बार है जब मध्यप्रदेश के घरेलू खिलाड़ियों को राज्य स्तरीय लीग में लाखों रुपये की आर्थिक प्राप्ति हुई है। इससे युवा खिलाड़ियों के लिए क्रिकेट अब केवल जुनून नहीं, बल्कि एक संभावित पेशेवर करियर के रूप में भी स्थापित हो रहा है।

प्रायोजकों की बढ़ती रुचि

एमपीएल की लोकप्रियता के साथ कॉर्पोरेट जगत की भागीदारी भी बढ़ रही है। विभिन्न औद्योगिक समूह, क्षेत्रीय व्यवसायिक संस्थान तथा राष्ट्रीय ब्रांड लीग से जुड़ रहे हैं। डिजिटल प्रसारण और सोशल मीडिया पहुंच के कारण एमपीएल अब केवल खेल आयोजन नहीं, बल्कि एक व्यावसायिक खेल संपदा के रूप में विकसित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एमपीएल का आर्थिक आकार कई गुना बढ़ सकता है और यह देश की प्रमुख राज्य स्तरीय क्रिकेट लीगों में शामिल हो सकती है।

महिला क्रिकेट की बदलती तस्वीर

यदि मध्यप्रदेश क्रिकेट की सबसे प्रेरक कहानी की बात की जाए तो वह महिला क्रिकेट है।कुछ वर्ष पहले तक महिला क्रिकेट सीमित संसाधनों और अवसरों के साथ संघर्ष कर रही थी, लेकिन आज मध्यप्रदेश की बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं। प्रदेश की कई खिलाड़ी बीसीसीआई की आयु वर्ग प्रतियोगिताओं, सीनियर महिला टूर्नामेंटों, चैलेंजर ट्रॉफी और महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) ट्रायल्स तक पहुंच रही हैं।ग्वालियर की अनुष्का शर्मा का भारतीय महिला टी-20 टीम तक पहुंचना इस परिवर्तन का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

ड्राफ्ट सिस्टम से ऑक्शन सिस्टम की ओर बढ़ता महिला क्रिकेट

पुरुष एमपीएल में नीलामी प्रणाली लागू होने के बाद अब महिला क्रिकेटरों ने भी समान अवसरों की मांग शुरू कर दी है।वर्तमान में महिला एमपीएल में खिलाड़ियों का चयन ड्राफ्ट प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जहां खिलाड़ियों का वितरण टीमों के बीच पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के तहत होता है। लेकिन महिला खिलाड़ियों का मानना है कि अब समय आ गया है कि पुरुषों की तरह महिला क्रिकेटरों के लिए भी ऑक्शन सिस्टम लागू किया जाए।यदि ऐसा होता है तो महिला खिलाड़ियों को भी उनकी प्रतिभा के अनुरूप आर्थिक मूल्य प्राप्त होगा। साथ ही प्रायोजकों और फ्रेंचाइजी की रुचि बढ़ेगी, जिससे महिला क्रिकेट का संपूर्ण ढांचा मजबूत होगा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि महिला एमपीएल में ऑक्शन सिस्टम लागू होने पर मध्यप्रदेश देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां पुरुष और महिला दोनों वर्गों में समान व्यावसायिक मॉडल पर क्रिकेट लीग संचालित होगी।

मध्यप्रदेश की बेटियां लिख रही हैं नया इतिहास

चंबल घड़ियाल  बुंदेलखंड बुल्स, भोपाल वुल्व्स ग्वालियर शेरनी ,रॉयल निमाड़ ईगल्स जैसी महिला फ्रेंचाइजी टीमों ने प्रदेश की युवा क्रिकेटरों को बड़ा मंच उपलब्ध कराया है। गांवों और छोटे शहरों की बेटियां अब राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजर में आ रही हैं। मध्यप्रदेश की आयु वर्ग टीमों में लगातार बेहतर प्रदर्शन, राष्ट्रीय शिविरों में चयन और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने वाली खिलाड़ियों की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि महिला क्रिकेट प्रदेश में अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है।

भविष्य की सुनहरी तस्वीर

मध्यप्रदेश प्रीमियर लीग ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा केवल महानगरों की बपौती नहीं होती। यदि सही मंच, आधुनिक सुविधाएं और पेशेवर अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ी भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं।आज एमपीएल केवल क्रिकेट प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह मध्यप्रदेश के क्रिकेट की नई अर्थव्यवस्था, नई पहचान और नए आत्मविश्वास का प्रतीक बन चुकी है। पुरुष खिलाड़ियों की लाखों रुपये की नीलामी और महिला क्रिकेट में ऑक्शन प्रणाली की बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि प्रदेश क्रिकेट अब एक नए युग में प्रवेश कर चुका है।आने वाले वर्षों में यही मंच मध्यप्रदेश को भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी प्रतिभा-भूमि के रूप में स्थापित कर सकता है, जहां से न केवल आईपीएल बल्कि भारतीय पुरुष और महिला टीमों के अनेक सितारे निकलेंगे।

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