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Kanker Bear Attack brother sister

bear attack: कांकेर में भालू के हमले से 3 की मौत, भाई-बहन को मारने के बाद शवों के पास बैठ नोचता रहा

छत्तीसगढ़ के कांकेर में मादा भालू के हमले में तीन ग्रामीणों की मौत हो गई। वन विभाग ने रेस्क्यू कर भालू को बेहोश किया, जबकि ग्रामीणों ने लापरवाही के आरोप लगाए।


bear attack कांकेर में भालू के हमले से 3 की मौत भाई-बहन को मारने के बाद शवों के पास बैठ नोचता रहा

Kanker Bear Attack |

कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। यहां एक मादा भालू ने हमला कर तीन ग्रामीणों की जान ले ली है। वहीं, एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। भालू हमला कर जान लेने तक नहीं रुका। वह शव के पास पहुंची और उनको नोचती रही। वहीं, भालू के हमले में भाई-बहन समेत तीन लोगों की मौत के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। घटना के बाद वन विभाग ने रेस्क्यू अभियान चलाकर भालू को बेहोश कर पकड़ लिया।

दरअसल, बुधवार को नरहरपुर वन परिक्षेत्र के लारगांव मरकाटोला गांव में खेत में काम कर रहे हलालखोर जुर्री (45), उनकी बहन चमरीन जुर्री (40) और एक अन्य ग्रामीण पर मादा भालू ने हमला कर दिया। इस हमले में भाई-बहन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुआ, जिसे रायपुर रेफर किया गया। इसी वन परिक्षेत्र के गवरसिल्ली गांव में सोरिन जुर्री (30) की भी भालू के हमले में जान चली गई।

भालू को पकड़ने के लिए चला रेस्क्यू अभियान

घटना की सूचना मिलने के बाद रायपुर से विशेषज्ञ टीम बुलाई गई। रेस्क्यू अभियान के दौरान मादा भालू को बेहोश कर पिंजरे में बंद किया गया। इस बीच गुस्साए ग्रामीणों ने भालू को पीट दिया और उसे मारने की मांग भी की। अभियान के दौरान भालू ने वन विभाग की टीम की गाड़ी पर भी हमला किया। इससे अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।

भालू के व्यवहार को लेकर सामने आई अलग-अलग बातें

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि एक दिन पहले मादा भालू के शावक की मौत हो गई थी, जिसके बाद वह आक्रामक हो गई। दूसरी ओर, वन विभाग का कहना है कि शावक की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी। विभाग के अधिकारियों ने यह भी बताया कि भालू की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक जांच जारी है।

ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए लापरवाही के आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि भालू की मौजूदगी की सूचना पहले ही वन विभाग को दे दी गई थी, लेकिन समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि गांव के एक हिस्से में मुनादी भी नहीं कराई गई, जिससे लोग खतरे से अनजान रहे। वन विभाग ने फिलहाल लोगों से जंगल और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है।

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