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Kamal Nath Likely for Rajya Sabha

राज्यसभा के लिए कमलनाथ का नाम, विधायकों के गायब होने और क्रॉस वोटिंग का खतरा

मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस कमलनाथ को उम्मीदवार बना सकती है। पार्टी को क्रॉस वोटिंग और विधायकों के गायब होने का डर सता रहा है।


राज्यसभा के लिए कमलनाथ का नाम विधायकों के गायब होने और क्रॉस वोटिंग का खतरा

कांग्रेस की जैसी स्थिति है, उस हिसाब से मध्यप्रदेश से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ राज्यसभा जाएंगे। अब तक इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह राज्यसभा के सदस्य हैं।

दिग्विजय सिंह का कार्यकाल 21 जून को खत्म हो रहा है और वे अब राज्यसभा जाने से इंकार कर चुके हैं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि कमलनाथ ने राज्यसभा जाने के लिए पार्टी को सहमति दे दी है। पहले कमलनाथ इसके लिए इंकार कर रहे थे। मध्यप्रदेश में संख्या बल के हिसाब से राज्यसभा की दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना है। इसके लिए 8 जून तक नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे और 18 जून 2026 को मतदान किया जाएगा। इस तीसरी सीट को लेकर ही मध्यप्रदेश में बड़ा बवाल है। इस सीट को लेकर भाजपा की रणनीति साफ़ नहीं है, लेकिन भाजपा चाहती है कि कांग्रेस वाली तीसरी सीट जीतकर केंद्रीय नेतृत्व को उपहार में दी जाए। इसके लिए कुछ स्थानीय भाजपा नेताओं और कांग्रेस विधायकों के बीच चर्चाओं के दौर चल रहे हैं। तीसरी सीट के टेंशन में कांग्रेस को अपने ही लोगों से बगावत की आशंका महसूस हो रही है। हालात ऐसे हैं कि दिग्विजय सिंह के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी सार्वजनिक मंच से राज्यसभा जाने से इंकार कर चुके हैं। जबकि इनकी राज्यसभा जाने की इच्छा बनी हुई है।

कांग्रेस की टेंशन तब और बढ़ गई, जब दिल्ली से मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा भेजने की बात सामने आई। इस पर प्रदेश के 80 प्रतिशत नेताओं ने कहा कि मीनाक्षी के नाम पर कांग्रेस विधायक भाजपा के पाले में चले जाएंगे और तीसरी सीट संख्या बल होने के बावजूद कांग्रेस के पाले से निकल जाएगी। ऐसे में प्रदेश के नेताओं को नए नाम पर विचार करने को कहा गया। तब सामने आया कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह दो ही ऐसे नेता हैं जो कांग्रेस विधायकों को जोड़कर रख सकते हैं और तीसरी सीट को भाजपा के पाले में जाने से रोक सकते हैं।

इसके बाद दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं ने कमलनाथ से चर्चा की। पहले कमलनाथ ने राज्यसभा जाने से इंकार कर दिया और नकुलनाथ का नाम आगे किया। बताते हैं कि तीसरी सीट बचाने की दृष्टि से कमलनाथ ने राज्यसभा के लिए यह कहकर सहमति जताई कि पहले मुझसे बेहतर देख लें या दिग्विजय सिंह को रिपीट करें, कुछ नहीं तो फिर देखेंगे। जबकि सच्चाई यही है कि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ दोनों ही राज्यसभा के इच्छुक हैं। इधर भाजपा की नजर उन विधायकों पर है, जो कांग्रेस और प्रदेश अध्यक्ष पटवारी से नाराज हैं। ऐसे पांच विधायक फिलहाल भाजपा के संपर्क में हैं। इस कारण कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का खतरा सता रहा है। ऐसे में बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे मन से भाजपा की हो चुकी हैं, लेकिन अभी भी कांग्रेस में हैं। उन्होंने अब तक इस्तीफा नहीं दिया है। कांग्रेस सप्रे को लेकर मुश्किल में है।

दतिया चुनाव रद्द होने के बाद से राजेंद्र भारती तकनीकी रूप से विधायक नहीं हैं और दतिया सीट खाली है। उच्चतम न्यायालय ने विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता समाप्त करने के फैसले पर रोक लगाई है, लेकिन इसके बावजूद वे राज्यसभा चुनाव में अपने वोट का इस्तेमाल नहीं कर सकते। पिछले दिनों कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह संघ के समारोह में शामिल हुए। ऐसे ही कांग्रेस विधायक भैंरो सिंह परिहार ने कहा था कि उनका संघ से वैचारिक जुड़ाव है। यह सब बातें हैं जिन्होंने कांग्रेस को सोचने पर विवश किया है।

कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग के अलावा एक खतरा और सता रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव वाले दिन उनके कुछ विधायक गायब हो सकते हैं और हो सकता है वे वोट करने भी न आएं। इस सब को रोकना है, इसलिए कमलनाथ जरूरी हो जाते हैं। लेकिन इसका जवाब किसी कांग्रेसी नेता के पास नहीं है कि जब कमलनाथ मुख्यमंत्री थे, तब भी तो 22 विधायकों ने पाला बदलकर सरकार गिरा दी थी।

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