दिल्ली के जज अमन शर्मा सुसाइड केस में नया मोड़। अलवर में पिता ने नम आंखों से दी मुखाग्नि, जबकि पत्नी और बच्चे अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे।
दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में न्यायिक अधिकारी अमन कुमार शर्मा की आत्महत्या का मामला अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। 30 वर्षीय जज अमन शर्मा ने शुक्रवार रात अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। इस मामले में पारिवारिक विवाद, मानसिक तनाव और कथित प्रताड़ना के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि अलवर में हुए अंतिम संस्कार में अमन शर्मा की पत्नी और उनके दोनों बच्चे शामिल नहीं हुए। पिता ने रोते-बिलखते अपने जवान बेटे को मुखाग्नि दी, जबकि परिवार के कई सदस्य इस घटना से टूट चुके हैं।
कौन थे अमन शर्मा?
अमन कुमार शर्मा दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में सचिव के पद पर तैनात थे। उन्होंने साल 2018 में पुणे के Symbiosis Law School से कानून की पढ़ाई पूरी की थी। 19 जून 2021 को वे दिल्ली न्यायिक सेवा में शामिल हुए थे। अक्टूबर 2025 से वे कड़कड़डूमा कोर्ट में अपनी सेवाएं दे रहे थे। कम उम्र में न्यायिक सेवा तक पहुंचने वाले अमन को तेज-तर्रार और शांत स्वभाव का अधिकारी बताया जा रहा है।
‘यह मेरा आखिरी कॉल है…’, पिता को फोन पर कही थी ये बात
अमन शर्मा के पिता प्रेम कुमार शर्मा, जो खुद अधिवक्ता हैं, ने बताया कि शुक्रवार रात अमन ने उन्हें फोन किया था। बातचीत के दौरान वह बेहद परेशान और भावुक लग रहे थे। पिता के मुताबिक, अमन ने कहा था, “मैं बहुत परेशान हूं, मेरा जीना मुश्किल हो गया है। यह मेरा आखिरी कॉल है।” बेटे की हालत समझते ही पिता रात में ही अलवर से दिल्ली रवाना हो गए थे।
बाथरूम का दरवाजा तोड़ा तो सामने था खौफनाक मंजर
जब परिवार दिल्ली पहुंचा तो घर में तनावपूर्ण माहौल था। पिता ने आरोप लगाया कि अमन की पत्नी ऊंची आवाज में बहस कर रही थीं और अमन लगातार रो रहे थे। कुछ देर बाद जब अमन दिखाई नहीं दिए तो उनके मोबाइल पर कॉल किया गया। फोन की घंटी बाथरूम से सुनाई दी। दरवाजा अंदर से बंद था। परिवार ने दरवाजा तोड़ा तो अमन चुन्नी के फंदे से लटके मिले। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पत्नी और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप
अमन शर्मा के परिजनों ने आरोप लगाया है कि वह लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना झेल रहे थे। परिवार का दावा है कि घर में पूरी तरह पत्नी का नियंत्रण था और अमन लगातार तनाव में रहते थे। परिजनों ने यह भी कहा कि अमन की पत्नी भी न्यायिक अधिकारी हैं। वहीं उनकी साली जम्मू में IAS अधिकारी और उनके पति पुलिस विभाग में वरिष्ठ पद पर तैनात हैं। परिवार का आरोप है कि इसी प्रभाव और दबाव के कारण अमन लगातार मानसिक रूप से परेशान थे। हालांकि पुलिस ने अभी तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
आखिर अंतिम संस्कार में क्यों नहीं पहुंचे पत्नी और बच्चे?
पोस्टमॉर्टम के बाद शनिवार को अमन शर्मा का पार्थिव शरीर राजस्थान के अलवर लाया गया। ‘तीज की श्मशान’ में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
इस दौरान सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान इस बात ने खींचा कि अमन की पत्नी और उनके दोनों छोटे बच्चे अंतिम संस्कार में मौजूद नहीं थे। परिजनों के मुताबिक, घटना के तुरंत बाद पत्नी बच्चों को लेकर घर से चली गई थीं।
अंतिम संस्कार में दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के कई वरिष्ठ जज, अधिवक्ता और परिचित शामिल हुए। पिता प्रेम कुमार शर्मा अपने बेटे की चिता को मुखाग्नि देते समय फूट-फूटकर रो पड़े।
पुलिस किन एंगल से कर रही जांच?
दिल्ली पुलिस ने अमन शर्मा का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी बड़ी साजिश के सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि घरेलू विवाद, मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने समेत सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
मानसिक तनाव के मामलों पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर उच्च पदों पर काम करने वाले अधिकारियों के मानसिक तनाव और पारिवारिक दबाव जैसे मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मामले की निष्पक्ष जांच और सच सामने लाने की मांग कर रहे हैं।
डिस्क्लेमरः यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव, अवसाद या आत्मघाती विचारों से जूझ रहा है, तो तुरंत परिवार, मित्र या विशेषज्ञ से मदद लें। सरकार की हेल्पलाइन 9152987821 पर भी संपर्क किया जा सकता है।