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Indore Drug Crisis: Night Culture and ₹500 Crore M

नशे में डूबता इंदौर

स्वच्छ शहर इंदौर में एमडी ड्रग्स और सूखे नशे का जाल 500 करोड़ के अवैध कारोबार तक पहुंच गया है, युवाओं से लेकर महिलाओं तक नेटवर्क फैला


नशे में डूबता इंदौर

  • परम्परा में नाइट कल्चर का कॉकटेल
  • एमडी ड्रग्स का सालाना अवैध कारोबार अनुमानित 500 करोड़ रुपए तक पहुंचा।
  • नशे का अवैध धंधा करोड़ों रुपए के वार्षिक कारोबार में हुआ तब्दील ।
  • नशे के अवैध धंधे में कई हाईप्रोफाइल एवं स्थानीय पुरुष-महिला भी शामिल ।
  • स्वच्छता में राष्ट्रीय फलक पर सिरमौर इंदौर अब नशे के बढ़ते कारोबार को लेकर चिंता का केंद्र बन गया है। इंदौर और मालवा-निमाड़ के छोटे-बडे नगर-कस्बे की बड़ी आबादी अब सूखे नशे (कोकीन, हेरोइन, एमडी, स्मैक, मेथ, बेंजोडायजेपाइन, प्रिस्क्रिप्शन ओपिओइड, स्टेरॉयड, मंकी डस्ट, मेथ, केटामाइन, जीबीएल, एक्स्टसी, नाइट्रावैट, चरस-गांजा, अफीम एवं दवाई और कफ सिरप) के जाल में उलझ चुकी है। आधुनिकता की अंधी दौड़ कहें या रात्रिकालीन बाजार (नाइट कल्चर) संस्कृति का भयावह दुष्प्रभाव या फिर देशभर से पढ़ने व रोजगार के लिए आने वाली बड़ी युवा आबादी जिसमें लड़के-लड़कियों की बेरोकटोक जीवनशैली ने ड्रग्स को पैर पसारने का इंदौर में सुलभ अवसर प्रदान किया है। जिसे नशा माफिया व कारोबारियों ने बहुत ही तेजी से लपक भी लिया। इंदौर में एमडी ड्रग्स का सालाना अवैध कारोबार अनुमानित 500 करोड़ तक आंका जा रहा है। कॉलेज छात्र, होटल, पब और पार्टी सर्किट इसके मुख्य बाजार बन चुके हैं।

    • संपूर्ण मालवा-निमाड़ के ग्रामीण अंचलों तक इंदौर से ही पहुंच रही सूखे नशे की खेप

    • इंदौर में शराब, गांजा, अफीम, स्मैक और एमडी ड्रग्स जैसे घातक नशों का जाल फैला

    • एमडी ड्रग्स (मेफेड्रोन) ने बहुत तेजी से इंदौरी युवाओं को अपनी चपेट में ले लिया है

    • इंदौर में पुलिस ने 35 महिलाओं को नशा सप्लाय के मामले में गिरफ्तार किया

    • शहर में लगातार चोरी और डकैती जैसी वारदातें सूखे नशे के कारण बढ़ीं

    • इंदौर में शासकीय, अशासकीय एवं केंद्रीय अनुदान प्राप्त कुल 15 नशा मुक्ति केंद्र

    • मध्यप्रदेश-राजस्थान सीमा पर एमडी ड्रग्स बनाने की कई फैक्ट्रियां खुली।

    • अफीम और ब्राउन शुगर की बड़ी खेप आने का नीमच और मंदसौर से सुरक्षित मार्ग बना।

    • इंदौर में गांजा बेरोकटोक खंडवा, खरगोन, बड़वानी, धार और झाबुआ से आता है।

    • अल्फाजोलम और कोरेक्स देवास के रास्ते इंदौर में पहुंचने के मिले साक्ष्य

    इंदौर में देर रात पार्टिया चलती हैं. इन पार्टियों में शराब के साथ एमडी ड्रग्स का सेवन बड़े पैमाने पर होता है। एमडी ड्रग्स इंदौर में प्रतापगढ, दिल्ली, राजस्थान, मुंबई से आती है। अहमदाबाद- प्रतापगढ़ पर पुलिस की पैनी नजर है अतः अब दिल्ली का रास्ता पैडलरों ने चुना है। सीधे ग्राहक को ना देकर यहां डिलेवरी बाय दौर में देर रात तक पार्टियां चलती हैं। इन अधिकांश युवा बनाए जाते हैं, जिसमें गैरेज में काम करने वाले लोग या मजदुर वर्ग रहता है। इन्हें बाकायादा दोपहिया वाहन भी पैडलर ही उपलब्ध कराते हैं। फिर ये डिलेवरी बाग जहां डिलेवरी देने जाना होता है वहां आसानी से मैकेनिक एवं मजदूरी की आड़ लेकर पहुंच भी जाते हैं। पुलिस ने अब तक जी तस्कर पकड़े उनमें इंदौर में सप्लाय करने वाले लोकल लड़के हो रहते हैं। मुख्य पैडलर तक पुलिस अभी तक नहीं पहुंच पाई है, केवल नेटवर्क की जांच की जा रही है। कहने का तात्पर्य यह है कि ड्रग्स माफियाओं का काकश कितना मजबूत है।

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    अमीर लोग करते हैं एमडी का नशा

    एमडी का नशा महंगा नशा है। इस नशे को केवल ईसजादे और कालेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं ही करते हैं। यही वजह है कि पेडलर के रडार पर युवा लोग ही रहते हैं। इसके लिए ये निजी कालेजों को टारगेट करते हैं। इनके डिलेवरी बाय ऐसे बाहरी एवं अमीर युवाओं को ढूंढकर उन्हें माल सप्लाय करते हैं। वहीं रिसोर्ट और फार्म हाउस में होने वाली पार्टियों में भी पैडलर सीधे एमडी की खेप पहुंचाते हैं। ये नेटवर्क इतना बड़ा है कि पुलिस भी पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की जितनी कार्रवाई करती है यह उतना ही बढ़ता चला जाता है। पैडलरों के आगे मानों कानून व्यवस्था असहाय नजर आ रही है। छोटे-मोटे डिलेवरी बाय ही गिरफ्त में आते है, जबकि इस काले धंधे में कई हाईप्रोफाइल एवं स्थानीय लोग भी शामिल हैं। पुलिस के हाथ कभी भी इन अमीर नशाखोरों के गिरेंबा तक नहीं पहुंच पाए हैं.

    मप्र राजस्थान सीमा पर खुली फैक्ट्री

    नशे की खपत इंदौर में बड़ी तो इसके सप्लायरों ने पूर्ति करने के लिए एमपी-राजस्थान बार्डर पर कई फैक्ट्रियां खोल लीं, जहां एमडी ड्रग्स बनाई जाती है। कुछ दिन पहले नारकोटिक्स विंग ने मंदसौर में ही एक फैक्ट्री पकड़ी थी, जहां एक कमरे में एमडी ड्रग्स बनाई जा रही थी। खुद डीआईजी नारकोटिक्स महेशचंद्र जैन ने भी माना कि प्रतापगढ़ से लेकर गांधीसागर तक के आसपास के गांवों में कई फैक्ट्रियां खुलने की हमें पुख्ता सूचना मिली है। उनका कहना है कि नारकोटिक्स लगातार नजर रख रही है और आने वाले दिनों में बड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।

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    युवाओं में तेजी से बढ़ी सूखे नशे की लत

    इंदौर पुलिस के कुछ अधिकारियों ने दबी जुबान स्वीकारा कि इंदौर में जिस तेजी के साथ नशे का सेवन बढ़ा है, उस पर अंकुश लगाना बेहद जरूरी है। विशेषकर युवा सूखा नशा अधिक कर रहे हैं। इस नशे की लत को पूरा करने के लिए स्थानीय युवा एवं चाहरी आपराधिक गतिविधियों में भी लिप्त हो जाते हैं। चोरी और डकैती जैसी वारदातें भी इसी सूखे नशे का कारण हैं। कई बार इंदौर में नशे की हालत में हत्याएं हो चुकी हैं। हर बार पुलिस कार्रवाई करती है, लेकिन नशे का काकश दोगुनी ताकत से फैलता ही जा रहा है।

    अफीम और ब्राउन शुगर की भारी खपत

    इंदौर एवं आसपास के क्षेत्रों में हर नशे का अपना एक अलग अड्‌डा है। एमडी ड्रग्स जहां अन्य प्रदेशों से इंदौर आती है तो वहीं आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि अफीम और ब्राउन शुगर को खेप नीमच और मंदसौर से आती है। नीमच और मंदसौर से ही दोनों की सप्लाय न सिर्फ इंदौर बल्कि पूरे प्रदेश में की जाती है। अफीम और ब्राउन शुगर का गढ़ मंदसौर एवं नीमच ही हैं।

    हर दिन आती है गांजे की खेप

    गांजि का नशा सस्ता नशा होता है। गांजे का गढ़ मालवा-निमाड़ दोनों ही हैं। इंदौर में गांजा खंडवा, खरगोन, बड़वानी, धार और झाबुआ से आता है। पुलिस हर दिन इन्हीं रास्ते से आने वाले गांजे की खेप को ही पकड़ती है। लोग वहां चोरी-छिपे अपने खेतों में गांजा उगाते हैं और फिर उसकी सप्लाय अलग-अलग शहरों में की जाती है। समय के साथ गांजे की भी मांग बढ़ी है। इंदौर शहर की हर झुग्गी (स्लम) बस्ती में गांजा घर घर से बिक रहा है। अवैध शराब की तरह गांजे के भी कई अड्डे हैं। आम आदमी को भी जानकारी है लेकिन पुलिस अनभिज्ञ बन आंख मूंदकर बैठी है। यदि गांजे की सप्लाय पर अंकुश लगाना है तो इंदौर में चल रहे नशे के इस घर-घर अर्पित खेल को पूरी तरह खत्म करना होगा।

    देवास से आती है अल्फाजोलम-कोरेक्स

    देवास में कई फार्मा कंपनी हैं, ऐसे में पुलिस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इंदौर में जो अलफाजोलम और कोरेक्स आती है वह देवास के रास्ते पहुंचती है। क्राइम ब्रांच ने अब तक अलफाजोलम और कॉरेक्स के साथ जिन लोगों को पकड़ा उन्होंने भी पूछताछ में देवास के मुख्य अर्पितकर्ता से लेने की बात स्वीकारी है। हालांकि पुलिस की लगातार कार्रवाई से आपूर्ति में पहले की अपेक्षा काफी कमी आई है।

    स्टूडेंट वीजा पर आई अफ्रीकी छात्रा इंदौर में कोकीन की तस्करी करते पकड़ाई

    इंदौर में 21 नवंबर 2025 को नारकोटिक्स विंग ने दिसंबर 2025 में बड़ी कार्रवाई करते हुए इंदौर के सबसे वीवीआईपी रेसीडेंसी इलाके में साई मंदिर के पास से 25 वर्षीय लिंडा ओडियो कोटे डी आइवर मूल निवासी पश्चिम अफ्रीका को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 15 लाख 50 हजार रुपए की कुल 31.85 ग्राम कोकीन जब्त की। वह स्टूडेंट वीजा पर भारत आई और फिर पढ़ाई के साथ कोकीन की तस्करी करने में संलिप्त हो गई। मादक पदार्थ की तस्करी में इंदौर में नाइजीरियन मूल के लोगों की संलिप्तता तेजी से बढ़ी है। मांग के चलते इंदौर में इसकी आपूर्ति का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा है। पुलिस ने इससे मिली जानकारी के आधार पर कुछ और पैडलरों पर शिकंजा भी कसा है और अब तक मामले की जांच जारी है, जिससे अन्य अध्ययनरत छात्राएं भी शामिल होने के तार जुड़े रहे हैं।

    मुन्नीबाई से ब्राउन शुगर और 12 लाख नकदी जब्त

    इंदौर में 29 जनवरी 2026 को राऊ पुलिस ने शातिर मुन्नीबाई और उसके साथियों को पकड़ा और उनके पास से 62 ग्राम ब्राउन शुगर और करीब 12 लाख रुपए नकदी जब्त की। मुन्नीबाई द्वारकापुरी थाना क्षेत्र की रहने वाली है। नशा कारोबार में उसके साथ हॉली पति लखन, विकास उर्फ विक्की चिंता कमल निवासी ऋषि पैलेस भी शामिल थे। पुलिस को शुरुआती जाच में जानकारी मिली कि मुन्नीबाई इंदौर में लंबे समय से इम्स के अवैध कारोबार में सक्रिय है। इसका नेटवर्क मुख्य रूप से राजेंद्र नगर और द्वारकापुरी क्षेत्र में फैला हुआ है। मुन्नीबाई गरीब परिवारों की महिलाओं और बच्चों को लालच देकर ब्राउन शुगर बेचने के कार्य में लगाती थी। वह 1 ग्राम ब्राउन शुगर से दस पुड़िया तैयार करती थी जिन्हें नशेड़ियों को 600 से 1000 रुपए प्रति पुड़िया की दर से बेचा जाता था।

    ड्रग्स के खेल में महिलाओं का भी बड़ा दखल

    इंदौर में नशा सप्लाय करने वालों में महिलाओं की संलिप्तता तेजी से बढ़ रही है। अगर कहें कि ड्रग्स के खेल में महिलाओं का एकतरफा दखल बढ़ रहा है, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इंदौर शहर के कई शातिर ड्रग्स सप्लायर श्रमिक, अभावग्रस्त एवं मजदूर वर्ग की महिलाओं को रुपए का लालच देकर ड्रग्स सप्लाय करवा रहे हैं। ड्रग्स माफियाओं ने महिलाओं को आगे कर पुलिस से बचने की जुगत लगाई है। अभी तक इंदौर में पुलिस ने ऐसी 35 महिलाओं को गिरफ्तार किया जो नशा सप्लाय करने के धंधे में लगी हुई थीं। इनमें से कई तो पेशेवर अपराधी भी थीं, जिन पर कई अपराध दर्ज है। वहीं नशे के आपराधिक खेल में कई अपने पति का काम आगे बढ़ा रही थी। ड्रग्स माफिया का शिकंजा ऐसी महिलाओं पर ज्यादा रहता है, जो या तो परिवार से अकेले रह रही हैं या फिर बाहरी शहरों से यहां आकर काम-काज की तलाश में रहती है, फिर आदतन अपराधी महिलाओं को भी नशे के इस जाल में ड्रग्स माफिया फांसकर तरीके से आगे बढ़ाते है।

    35 से अधिक ड्रग पैडलर महिलाएं 

    सपना देवकर, राजेंद्र नगर निशा लाखरे, एमआईजी चांदी कौशल, विजयनगर सपना तिवारी, बाणगंगा भूरीवाई कौशल, कंडिलपुरा गीता मलिक, परदेशीपुरा पूनममालवीय, राजेंद्र नगर मंजू कोरी, भंवरकुआं गंगूबाई,चंदननगर ममता चौहान, चंदननगर सीमा कसेरा,मल्हारगंज अनिता पांचाल उर्फ मुन्नी, राऊ ताहिरा अहमद,छत्रीपुरा नरगिस शाह, आजाद नगर श्यामानाथ बाई, द्वारकापुरी शायरा बी, खजराना अमिना बी, चंदननगर आरती सांवले, भागीरथपुरा आशा वी, आजाद नगर सीमा नाथ, अहिरखेड़ी फतीमा बी, खजराना कविता चौधरी, कृष्णबाग कालोनी सावित्री भारद्वाज, द्वारकापुरी अनामिका शर्मा, जावरा कामिनीबाई, अहिरखेड़ी।इसी तरह से मालवा-निमाड़ से मजदूरी या फिर रोजगार की तलाश में परिवार सहित अथवा अकेले ही इंदौर आने वाली सुल्तानाबी, राजकुमारी, सुनिता, अमरीना, मंजू मिंज, सन्नों पठान, ग्यारसीबाई, रूखसाना अली, बबीता हिंगोरानी, नसरीन और जुबेदा समेत दर्जनों महिला ड्रग पैडलर इंदौर में नशे की आपूर्ति का जरिया या तो मजबूरी में या फिर पैसों के लालच में बनी हुई है।

    इंदौर में नशा मुक्ति केंद्र की स्थिति एवं आंकड़े

    इंदौर जिले में शासकीय, अशासकीय एवं केंद्रीय अनुदान प्राप्त कुल 15 नशा मुक्ति केंद्र संचालित हो रहे है। इन नशा मुक्ति केंद्रों पर विभिन्न तरह के नशे के आदी पीड़ितों/मरीजों को उपचार के लिए आवासीय भान से भी रखा जाता है। कुछ केंद्रों पर दैनिक, साप्ताहिक काउंसलिंग के जरिए नशा छुड़वाने का प्रयास किया जाता है। वर्षभर में नशा मुक्ति केंद्रों की 26 दिसंबर 2025 की स्थिति-

    अंकुर नशा मुक्ति केंद्र पर 9 मरीज उपचाररत है। यहां पर 185 लोगों ने नशा मुक्ति प्रयास का लाभ लिया। नव चेतना नशा मुक्ति केंद्र पर 10 मरीज उपचाररत है। 95 मरीज ठीक हो चुके हैं। अंकुर रिहेब सेंटर पर 40 मरीजों का इलाज चल रहा है। 400 मरीज नशा छोड़ चुके हैं। ड्रग ट्रीटमेंट सेंटर में 45 मरीजों का इलाज चल रहा है। तकरीबन 700 मरीजों ने नशा छोड़ दिया है। तपस्या डी एडिक्शन एंड रीहेबिलिएशन में 38 मरीज उपचारत है। 400 मरीज ठीक हो चुके है। पहचान नशा मुक्ति केंद्र में 110 मरीज उपचारत है। 480 मरीजों का ठीक हो चुके है। हैपी होम डीएडिक्शन एण्ड रीहेबिलिएशन सेंटर पर 50 मरीज का इलाज चल रहा है और तकरीबन 400 मरीज ठीक हो चुके है। स‌द्भाव नशा मुक्ति केंद्र पर 12 मरीजों का इलाज चल रहा है। 220 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। श्री शुद्धि नशा मुक्ति केंद्र पर 60 मरीजों का इलाज हो रहा है। करीब 350 मरीजों ठीक हो चुके है। शुद्धि नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र पर 90 मरीजों का उपचार चल रहा है। 480 मरीजों ठीक हो चुके है। उम्मीद नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र पर 40 मरीजों का उपचाररत है। 450 मरीज ठीक हो चुके है।