इंदौर के सुपर कॉरिडोर में प्रस्तावित एयरोसिटी सिर्फ रियल एस्टेट परियोजना नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का अवसर बन सकती है। जानिए दुनिया के सफल मॉडल और सबसे बड़ी चुनौती।
अनुराग तागड़े
इंदौर। शहर के सुपर कॉरिडोर में प्रस्तावित लगभग 25 एकड़ की एयरोसिटी केवल एक रियल एस्टेट परियोजना नहीं है। यदि इसका विकास वैश्विक मानकों के अनुरूप किया गया तो यह मध्य प्रदेश के लिए वैसा ही आर्थिक इंजन बन सकती है जैसा गुजरात के लिए गिफ्ट सिटी, हैदराबाद के लिए हाईटेक सिटी या दिल्ली के लिए एयरोसिटी क्षेत्र साबित हुआ है। किंतु यदि यह केवल होटल और आवासीय परिसरों तक सीमित रह गई तो इसका प्रभाव भी सीमित रहेगा।दुनिया के कई देशों ने पिछले तीन दशकों में यह समझ लिया कि आधुनिक अर्थव्यवस्था में हवाई अड्डा केवल यात्रियों के आने-जाने का स्थान नहीं, बल्कि निवेश, व्यापार, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक संपर्क का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है। इसी सोच से जन्म हुआ "एयरोट्रोपोलिस" अथवा एयरोसिटी की अवधारणा का।
एयरोसिटी की शुरुआत कैसे हुई?
एयरपोर्ट आधारित शहर की प्रारंभिक अवधारणा नई नहीं है। इसका शुरूआती विचार सन् 1939 में वास्तुकार निकोलस डी सैंटिस ने प्रस्तुत किया था। लेकिन इसे वैश्विक पहचान अमेरिकी अर्थशास्त्री एवं शहरी योजनाकार डॉ. जॉन डी. कसार्डा ने दी। उन्होंने कहा था '21वीं सदी में हवाई अड्डे वही भूमिका निभाएंगे जो 20वीं सदी में हाईवे, 19वीं सदी में रेलवे और 18वीं सदी में समुद्री बंदरगाहों ने निभाई थी।' डॉ. कसार्डा के अनुसार एयरपोर्ट अब केवल परिवहन केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि उनके आसपास होटल, कॉर्पोरेट कार्यालय, लॉजिस्टिक्स पार्क, अनुसंधान केंद्र, प्रदर्शनी परिसर, आवासीय क्षेत्र और उच्च स्तरीय सेवाओं का एक नया शहरी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा।
दुनिया की सबसे सफल एयरोसिटी कौन-सी हैं?
1. इंचियोन एयरपोर्ट सिटी (दक्षिण कोरिया)
इसे विश्व के सबसे सफल एयरोट्रोपोलिस मॉडलों में माना जाता है। इंचियोन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास विकसित क्षेत्र में वैश्विक लॉजिस्टिक्स कंपनियां बायोटेक उद्योग अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक कार्यालय होटल सम्मेलन केंद्र स्मार्ट सिटी विकासने दक्षिण कोरिया को पूर्वी एशिया का प्रमुख व्यापारिक केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2. सिंगापुर चांगी
चांगी एयरपोर्ट के आसपास विकसित ज्वेल चांगी, होटल, व्यावसायिक परिसर और मनोरंजन सुविधाएं इसे दुनिया के सबसे अधिक राजस्व अर्जित करने वाले एयरपोर्ट परिसरों में शामिल करती हैं। यहां एयरपोर्ट स्वयं पर्यटन आकर्षण बन चुका है।
3. एम्स्टर्डम शिफोल (नीदरलैंड)
शिफोल एयरपोर्ट यूरोप के सबसे बड़े एयरपोर्ट बिजनेस हब में गिना जाता है। यहां वित्तीय सेवाएं, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के मुख्यालय और लॉजिस्टिक्स उद्योग एयरपोर्ट के आसपास विकसित हुए हैं।
4. झेंगझोउ एयरपोर्ट इकोनॉमी ज़ोन (चीन)
यदि क्षेत्रफल और औद्योगिक विस्तार की बात करें तो चीन का झेंगझोउ एयरपोर्ट इकोनॉमी ज़ोन दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट आधारित आर्थिक क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, ई-कॉमर्स, एयर कार्गो और निर्यात आधारित उद्योगों का विशाल नेटवर्क विकसित किया गया है। इस मॉडल ने चीन के विनिर्माण और निर्यात को नई गति दी।
भारत में एयरोसिटी की स्थिति
भारत में अभी पूर्ण विकसित एयरोसिटी की संख्या सीमित है, लेकिन कई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। प्रमुख परियोजनाएं है दिल्ली एयरोसिटी हैदराबाद एयरपोर्ट सिटी नोएडा (जेवर) एयरोट्रोपोलिस नवी मुंबई एयरपोर्ट सिटी गोवा (मोपा) एयरपोर्ट सिटी बेंगलुरु एयरपोर्ट बिजनेस पार्क भोपाल एयरोसिटी (प्रारंभिक स्तर) इनमें दिल्ली और हैदराबाद सबसे आगे हैं।
दिल्ली एयरोसिटी क्यों सफल मानी जाती है?
दिल्ली एयरोसिटी आज भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट आधारित व्यावसायिक जिला बन चुकी है।यहां 15 से अधिक अंतरराष्ट्रीय होटल वैश्विक कॉर्पोरेट कार्यालय रिटेल हब रेस्तरां आधुनिक कार्यालय परिसर संचालित हैं। दूसरे चरण में लगभग 70 लाख वर्गफुट से अधिक मिश्रित व्यावसायिक विकास किया जा रहा है, जिसमें भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट-आधारित शॉपिंग मॉल भी शामिल है।
हैदराबाद का मॉडल
राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास लगभग 1,500 एकड़ में विकसित हो रही एयरपोर्ट सिटी को भारत की सबसे बड़ी प्रस्तावित एयरोट्रोपोलिस परियोजनाओं में गिना जाता है। यहां एयरोस्पेस लॉजिस्टिक्स हेल्थकेयर शिक्षा कार्यालय मनोरंजन आतिथ्य उद्योगको एकीकृत किया जा रहा है।
क्या एयरोसिटी आर्थिक रूप से लाभदायक होती है?
दुनिया का अनुभव बताता है कि हाँ, लेकिन कुछ शर्तों के साथ।एयरोसिटी तभी सफल होती है जब एयरपोर्ट पर पर्याप्त यात्री और कार्गो यातायात हो। सड़क, मेट्रो और रेल की उत्कृष्ट कनेक्टिविटी हो।होटल और कार्यालयों के साथ लॉजिस्टिक्स तथा उच्च मूल्य वाले उद्योग विकसित किए जाएं।केवल रियल एस्टेट नहीं, बल्कि रोजगार आधारित आर्थिक गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाए।जहां यह मॉडल सफल हुआ, वहां एयरपोर्ट से होने वाली गैर-विमानन आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और निजी निवेश तेजी से आकर्षित हुआ।
रोजगार कितना मिलता है?
अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार एयरपोर्ट आधारित विकास चार स्तरों पर रोजगार उत्पन्न करता है प्रत्यक्ष (एयरपोर्ट, एयरलाइंस, होटल, सुरक्षा) अप्रत्यक्ष (निर्माण, परिवहन, आपूर्ति श्रृंखला) प्रेरित (खुदरा व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य) उत्प्रेरित (आईटी, निर्यात, लॉजिस्टिक्स, अनुसंधान) बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरोट्रोपोलिस दसियों हजार से लेकर लाखों रोजगार उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं। वास्तविक संख्या एयरपोर्ट के आकार, कार्गो क्षमता, निवेश और विकसित क्षेत्र पर निर्भर करती है।
इंदौर की एयरोसिटी से क्या बदल सकता है?
इंदौर की सबसे बड़ी ताकत यह है कि एयरपोर्ट के आसपास पहले से सुपर कॉरिडोर आईटी पार्क मेट्रो पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र शैक्षणिक संस्थान स्वास्थ्य सेवाएं जैसा मजबूत आधार मौजूद है।यदि प्रस्तावित 25 एकड़ की परियोजना को भविष्य में चरणबद्ध तरीके से 200–500 एकड़ तक विस्तार दिया जाए और इसे एयर कार्गो, एमआरओ, लॉजिस्टिक्स पार्क, कन्वेंशन सेंटर तथा स्टार्टअप हब से जोड़ा जाए, तो यह मध्य भारत का सबसे महत्वपूर्ण विमानन-आधारित आर्थिक केंद्र बन सकती है।
सबसे बड़ी चुनौती
केवल होटल, आवास और मॉल बनाकर किसी परियोजना को एयरोसिटी नहीं कहा जा सकता। उसकी सफलता का आधार होगा वैश्विक निवेश कॉर्पोरेट कार्यालय उच्च मूल्य का निर्यात एयर कार्गो उत्कृष्ट सार्वजनिक परिवहन दीर्घकालिक मास्टर प्लान यदि यह सभी तत्व जुड़े, तभी इंदौर की एयरोसिटी मध्य प्रदेश के आर्थिक भूगोल को बदलने की क्षमता रखेगी।