जबलपुर हाई कोर्ट ने भोपाल-जबलपुर हाईवे पर सड़क सुरक्षा और एंबुलेंस सेवा को लेकर केंद्र, राज्य सरकार और NHAI को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने पूछा- ओला-उबर 2 मिनट में आती है तो एंबुलेंस क्यों नहीं?
प्रमोद दुबे
भोपाल: आज मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर में रोड सेफ्टी के विषय को लेकर दायर एक जनहित याचिका में संयुक्त बैंच ने केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि रोड सेफ्टी को लेकर हाईवे की स्थिति गंभीर है। विशेष रूप से भोपाल से जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कट पॉइंट को लेकर यह टिप्पणी जारी की गई है। हाई कोर्ट ने अपने सख्त लहजे में कहा है कि जब ओला उबर जैसी टैक्सी सेवा 2 मिनट में आ सकती है, तो दुर्घटनाग्रस्त स्थिति में एम्बुलेंस क्यों नहीं पहुंच पाती ?
दुर्घटना स्थिति में एंबुलेंस सेवा एवं भोपाल जबलपुर हाईवे पर कट पॉइंट को लेकर लगी है याचिका।
इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार भोपाल से जबलपुर नेशनल हाईवे पर राष्ट्रीय राजमार्ग के अंतर्गत लगभग 300 किलोमीटर से अधिक की दूरी में 300 से ही अधिक कट पॉइंट बने होने के कारण इस हाइवे पर लगातार दुर्घटनाओं के मामले सामने आए हैं। दुर्घटनाओं की स्थिति में घंटो तक एंबुलेंस की उपलब्धता नहीं हो पाती है। इस मामले में वर्ष 2025 में एक जनहित याचिका डिंडोरी निवासी सेवा निवृत अधिकारी महावीर सिंह ने हाई कोर्ट जबलपुर में दायर की थी। जनहित याचिका में मांग की गई थी की सड़कों पर ओला उबर की तरह रियल टाइम एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई जाए। एवं राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने हुए अवैध कट पॉइंट्स पर विशेष नजर रखी जाए और उन्हें बंद कराया जाए । इसी याचिका के अंतर्गत चीफ जस्टिस सचिन सचदेवा एवं विनय सराफ ने केंद्र एवं राज्य सरकार के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग अथॉरिटी को नोटिस जारी कर संबंध में जवाब मांगा है
तीन वर्षों में लगभग 500 से अधिक दुर्घटना के मामले
भोपाल से जबलपुर के लगभग 350 किलोमीटर के उपरोक्त राजमार्ग पर कट पॉइंट होने के कारण छोटे एवं बड़े दुर्घटना के लगभग 500 मामले पिछले 3 वर्ष के अंतराल में सामने आए हैं। इनमें 90% मामले ऐसे हैं जो अवैध कट पॉइंट के कारण हुए हैं। अवैध कट पॉइंट की स्थिति में कोई भी लोकल ग्रामीण उपरोक्त कट पॉइंट से हाईवे को क्रॉस करता है और सामने से आ रहे वाहनों से दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। दुर्घटना की स्थिति में एंबुलेंस की सेवा एवं घायल व्यक्ति की सुविधा को 1 घंटे से अधिक का समय हो जाता है, ऐसी स्थिति में कई बार दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की मौत हो जाती है।
प्रमोद दुबे