ग्वालियर में लंबे समय से प्रतीक्षित फूड लैब परियोजना को 2.97 करोड़ रुपये की मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही सक्रिय हो सकती है।
ग्वालियर संभाग में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच के लिए वर्षों से प्रतीक्षित फूड लैब के शुरू होने की उम्मीद एक बार फिर जागी है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग ने प्रयोगशाला को पूर्ण रूप से क्रियाशील बनाने के लिए 2 करोड़ 97 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की है। शासन स्तर से मिली मंजूरी के बाद अब भवन के शेष कार्य, एयर कंडीशनिंग व्यवस्था और अत्याधुनिक जांच उपकरणों की खरीद का रास्ता साफ हो गया है।
अधिकारियों का मानना है कि यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो वर्ष के अंत तक ग्वालियर की फूड लैब में खाद्य नमूनों की जांच शुरू हो सकती है।
2019 में हुआ था शिलान्यास, फिर अटक गई परियोजना
जानकारी के अनुसार अक्टूबर 2019 में परिवहन आयुक्त कार्यालय के समीप फूड लैब का शिलान्यास किया गया था। उस समय दावा किया गया था कि दो वर्षों के भीतर प्रयोगशाला तैयार होकर काम शुरू कर देगी, लेकिन परियोजना लगातार प्रशासनिक और वित्तीय अड़चनों में उलझी रही।निर्माण एजेंसी द्वारा भवन निर्माण कार्य पूरा किए जाने के बाद अतिरिक्त बजट की आवश्यकता सामने आई, जिसके कारण परियोजना फिर ठहर गई। अतिरिक्त राशि की मांग शासन को भेजी गई थी, जिस पर लगभग दो वर्ष बाद स्वीकृति मिल सकी है।
अब भोपाल नहीं भेजने पड़ेंगे नमूने
फूड लैब शुरू होने का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि ग्वालियर संभाग से लिए जाने वाले दूध, मावा, घी, मसाले, तेल, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूनों को जांच के लिए भोपाल नहीं भेजना पड़ेगा।वर्तमान व्यवस्था में नमूनों की जांच रिपोर्ट आने में कई महीने लग जाते हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई प्रभावित होती है। कई मामलों में रिपोर्ट इतनी देर से आती है कि न्यायालय में कार्रवाई कमजोर पड़ जाती है।खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार स्थानीय स्तर पर जांच सुविधा उपलब्ध होने से न केवल रिपोर्ट जल्दी मिलेगी, बल्कि त्योहारों और विशेष अभियान के दौरान लिए गए नमूनों पर भी त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।
रिपोर्ट में देरी से मिलावटखोरों को मिलता है फायदा
खाद्य नमूनों की रिपोर्ट नियमानुसार 14 दिनों के भीतर मिल जानी चाहिए, लेकिन वर्तमान में कई मामलों में रिपोर्ट आने में 6 माह से लेकर एक वर्ष तक का समय लग जाता है।रिपोर्ट में देरी का लाभ मिलावटखोर उठाते हैं और न्यायालय में कार्रवाई को चुनौती देते हैं। कई मामलों में भारी जुर्माने की राशि भी काफी कम हो जाती है।मावा जैसे नाशवान खाद्य पदार्थों के नमूने जब्त करने के बाद लंबी जांच प्रक्रिया के कारण सामग्री व्यापारी को सुपुर्द करनी पड़ती है। वहीं समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने से मिलावट के मामलों में दोष सिद्ध करना भी कठिन हो जाता है।
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्वालियर में फूड लैब शुरू होने से खाद्य सुरक्षा निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी। इससे मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई की गति बढ़ेगी और जांच रिपोर्ट समय पर उपलब्ध होने से न्यायिक प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बन सकेगी।वर्षों से लंबित यह परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है और यदि शेष कार्य समय पर पूरे हुए तो ग्वालियर संभाग के उपभोक्ताओं को इसका सीधा लाभ मिल सकेगा।