पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश के बासमती चावल को GI टैग न मिलने पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अगर किसानों को न्याय नहीं मिला तो वे अनशन भी करेंगे।
भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर किसानों के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा है। भोपाल स्थित अपने सरकारी आवास पर रविवार को उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि प्रदेश के बासमती चावल उत्पादक किसानों के साथ लंबे समय से भेदभाव हो रहा है।
दिलचस्प बात यह रही कि रंगपंचमी के दिन आम तौर पर प्रेस वार्ता नहीं होती है। लेकिन दिग्विजय सिंह ने खास तौर पर मीडिया को बुलाकर यह मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि अगर मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग नहीं मिला तो वे आंदोलन और अनशन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
बासमती को GI टैग न मिलने पर नाराजगी
दिग्विजय सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती चावल की कीमत सामान्य धान से तीन गुना तक होती है। ऐसे में मध्यप्रदेश के किसानों को इसका लाभ मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें अब तक जीआई टैग नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि राज्य सरकार इतने सालों से इस मुद्दे को हल नहीं कर पाई। उनका कहना था कि पाकिस्तान भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत का बड़ा प्रतिस्पर्धी है, लेकिन वहां कई क्षेत्रों को जीआई टैग मिल चुका है।
उन्होंने कहा 'हमारे यहां 13 जिलों का मामला सालों से लंबित है, किसान इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही'।
किन जिलों के किसानों को होगा फायदा
दिग्विजय सिंह के मुताबिक मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल, मालवा और महाकौशल क्षेत्र के करीब 14 जिलों में उच्च गुणवत्ता वाला सुगंधित बासमती चावल उगाया जाता है। इन जिलों में श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, गुना, विदिशा, रायसेन, सीहोर, हरदा, होशंगाबाद, नरसिंहपुर और जबलपुर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के हजारों किसान वर्षों से बासमती का उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन जीआई टैग न होने के कारण उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में उचित कीमत नहीं मिल पाती।
पहले मिल चुका था GI टैग, फिर वापस ले लिया गया
दिग्विजय सिंह ने याद दिलाया कि वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग दिया था। लेकिन 2016 में मौजूदा केंद्र सरकार ने इसे वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला समझ से परे है, क्योंकि फिलहाल जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बासमती को जीआई टैग मिला हुआ है, जबकि मध्यप्रदेश को इससे बाहर रखा गया है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने तीन महीने पहले केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा था और संसद के शीतकालीन सत्र में भी यह मामला उठाया था, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
रिटायरमेंट पर भी दी सफाई
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह ने अपने रिटायरमेंट को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें एक दंपति बैंक की नौकरी से रिटायर होने के बाद कार से पूरे भारत की यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा 'मैंने वह वीडियो मजाकिया अंदाज में शेयर किया था। लोग उसे मेरे रिटायरमेंट से जोड़ने लगे'।
तीसरा राज्यसभा कार्यकाल नहीं लेना चाहते
दिग्विजय सिंह ने साफ किया कि उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से सिर्फ इतना कहा है कि वे राज्यसभा का तीसरा कार्यकाल नहीं लेना चाहते। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि वे राजनीति से दूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कांग्रेस के लिए काम तो जीवन की आखिरी सांस तक करूंगा। पार्टी जहां जिम्मेदारी देगी, वहां काम करेंगे।
राज्यसभा सीट छोड़ने से बढ़ी हलचल
दिग्विजय सिंह फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं और जून में उनका कार्यकाल पूरा हो रहा है। वे पहले ही संकेत दे चुके हैं कि इस बार वे राज्यसभा का चुनाव नहीं लड़ना चाहते। उनके इस फैसले से कांग्रेस के भीतर भी हलचल बढ़ गई है, क्योंकि मध्यप्रदेश में पार्टी के पास राज्यसभा की सीमित सीटें हैं और कई नेता इस सीट पर नजर लगाए बैठे हैं।