दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लॉरिस स्टे में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हो गई। जांच में फायर NOC, अवैध निर्माण, बंद निकास मार्ग समेत 5 बड़ी लापरवाहियां सामने आई हैं।
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लॉरिस स्टे में बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली। हादसे में कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि कुछ ने जान बचाने के लिए इमारत की ऊपरी मंजिलों से छलांग लगा दी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
दमकल विभाग की 8 गाड़ियों ने संयुक्त अभियान चलाकर आग बुझाई। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 40 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और अस्पतालों में भर्ती कराया गया। पुलिस ने अब तक 21 लोगों की मौत की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि होटल में कई विदेशी नागरिक भी ठहरे हुए थे।
आग लगने से सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
आग कैसे लगी, इसकी जांच अभी जारी है। हालांकि शुरुआती जांच और सामने आ रही जानकारियों ने होटल संचालन और सुरक्षा मानकों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के पीछे पांच बड़ी लापरवाहियां सामने आ रही हैं, जिनकी वजह से जनहानि का आंकड़ा बढ़ा।
1. 6 कमरों की परमिशन पर चल रहे थे 25 रूम
जांच में सामने आया है कि होटल को दिल्ली सरकार की ओर से 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' श्रेणी के तहत लाइसेंस मिला था। इस लाइसेंस के अनुसार केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति थी। इसके बावजूद परिसर में करीब 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे। आरोप है कि कुछ कमरे बेसमेंट में भी बनाए गए थे। इससे भवन की क्षमता और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की आशंका जताई जा रही है।
2. फायर NOC के बिना चल रहा था होटल-रेस्टोरेंट
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल फायर सेफ्टी को लेकर उठ रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार भवन के पास वैध फायर NOC नहीं थी। बताया जा रहा है कि दिल्ली सरकार के गृह विभाग और फायर अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में भी यह तथ्य सामने आया कि भवन ने फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त नहीं किया था।
3. बेसमेंट के निकास मार्ग पर लगा था ताला
सूत्रों के अनुसार होटल-रेस्टोरेंट का संचालन बेसमेंट क्षेत्र में भी किया जा रहा था। आग लगने के दौरान कई लोग बेसमेंट में फंस गए। जानकारी मिली है कि बाहर निकलने वाले रास्ते पर लगे चैनल गेट पर ताला बंद था। आपात स्थिति में निकासी का रास्ता बाधित होने से कई लोग समय पर बाहर नहीं निकल सके।
4. एंबुलेंस पहुंचने में हुई देरी
स्थानीय लोगों का दावा है कि आग की सूचना मिलने के कुछ ही मिनटों में दमकल कर्मी मौके पर पहुंच गए थे, लेकिन एंबुलेंस सेवाओं के पहुंचने में देरी हुई। गंभीर रूप से झुलसे लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी। कई घायलों को स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। इससे राहत और उपचार प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
5. निर्माण और संचालन की अनुमति पर भी सवाल
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि होटल और रेस्टोरेंट के निर्माण व संचालन के लिए आवश्यक विभागीय अनुमतियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। साथ ही भवन में पर्याप्त फायर सेफ्टी उपकरणों की अनुपस्थिति की भी बात सामने आ रही है। आग लगने की स्थिति में शुरुआती स्तर पर बचाव और नियंत्रण के संसाधन उपलब्ध नहीं होने से स्थिति और गंभीर हो गई।
35 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, आग बुझाने के लिए शुरुआती चरण में दो वॉटर टेंडर, दो वॉटर बाउजर, एक क्विक रिस्पॉन्स वाहन समेत कई फायर यूनिट्स को तैनात किया गया था। बचाव अभियान के दौरान करीब 35 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हादसे के बाद प्रशासन, पुलिस और फायर विभाग की टीमें पूरे मामले की जांच में जुटी हैं।