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Chhattisgarh worker killed terror attack

कुलगाम आतंकी हमले में मारे गए छत्तीसगढ़ के श्रमिक, परिवार को 36-36 लाख सहायता का ऐलान

कुलगाम के आतंकी हमले में जान गंवाने वाले छत्तीसगढ़ के दो श्रमिकों के परिवारों को 36-36 लाख रुपये की सहायता मिलेगी। राज्य सरकार, जम्मू-कश्मीर सरकार और जिला प्रशासन ने राहत की घोषणा की।


कुलगाम आतंकी हमले में मारे गए छत्तीसगढ़ के श्रमिक परिवार को 36-36 लाख सहायता का ऐलान

Chhattisgarh Labour Killed in Jammu Kashmir |

दक्षिण-कश्मीर के कुलग्राम में आतंकी हमला हुआ। इस हमले में छत्तीसगढ़ के दोनों श्रमिकों के पीड़ित परिवारों के लिए राहत पैकेज का ऐलान किया है। दोनों के पीड़ित परिवार को 36-36 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। वहीं, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे मानवता के खिलाफ जघन्य अपराध बताया है।

दरअसल, सक्ती जिले के दीपक रात्रे और सारंगढ़-बिलाईगढ़ के भूपेंद्र भैना की मौत के बाद दोनों परिवारों को राज्य सरकार 20-20 लाख रुपये आर्थिक सहायता देगी। वहीं,  जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने भी 10-10 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। इसके अलावा संबंधित जिला प्रशासन की ओर से 6-6 लाख रुपये की  तत्काल राहत भी स्वीकृत की गई है। इस तरह परिवार को कुल 36-36 लाख रुपये की सहायता मिलेगी।

हमले के बाद सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना मानवता के खिलाफ जघन्य अपराध है। ऐसे कायराना कृत्य किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार इस दुख की घड़ी में दोनों परिवार के साथ खड़ी है। वहीं, गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी दोनों मृतकों के स्वजन से फोन पर बात कर हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि इस हमले में शामिल आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

पहचान पूछने के बाद की गई फायरिंग

शुक्रवार की रात करीब 8 बजे कुलग्राम के केलम क्षेत्र स्थित एक ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे श्रमिकों के पास पुहंचे आतंकियों ने पहले उनका नाम और पहचान पूछी। इसके बाद अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गंभीर रूप से घायल दीपक रात्रे और भूपेंद्र भैना को स्थानीय लोगों की मदद से अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया। यहां जांच के बाद दीपक को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं, भूपेंद्र ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

रोजगार के लिए गए थे कश्मीर

दीपक रात्रे करीब एक साल पहले अपने परिवार के साथ कुलगाम में मजदूरी करने गए थे। उनकी शादी तीन साल पहले हुई थी और उनका दो साल का बेटा है। दूसरी ओर भूपेंद्र भैना करीब तीन महीने पहले पत्नी के साथ रोजगार की तलाश में कश्मीर पहुंचे थे। रक्षाबंधन पर घर लौटने की तलाश में कश्मीर पहुंचे थे। रक्षाबंधन पर घर लौटने का उनका वादा अधूरा रह गया। जिला प्रशासन ने कहा है कि प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है।

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