छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ‘बेंच हंटिंग’ पर जारी सर्कुलर को लेकर बड़ा स्पष्टिकरण दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह न्यायिक अनुशासन के लिए है, सुनवाई से हटना अनिवार्य नहीं है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ‘बेंच हंटिंग’ को लेकर उठे विवाद पर अपना रुख साफ कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि हाल ही में जारी सर्कुलर का मकसद न्यायिक व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखना है, न कि अदालत के कामकाज में दखल देना। यह टिप्पणी एक वैवाहिक अपील की सुनवाई के दौरान सामने आई, जब डिवीजन बेंच के एक जज ने खुद को मामले से अलग कर लिया था।
बेंच हंटिंग रोकने के लिए जारी हुआ सर्कुलर
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सर्कुलर का उद्देश्य बेंच हंटिंग जैसी कोशिशों पर रोक लगाना है। यानी पक्षकारों द्वारा अपनी पसंद की बेंच चुनने की कोशिशों को रोकना। कोर्ट के अनुसार, यह व्यवस्था न्याय प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए जरूरी है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पक्ष का प्रभाव सुनवाई पर न पड़े।
सुनवाई से हटना जरूरी नहीं
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने कहा कि यह सर्कुलर किसी जज को सुनवाई से हटने के लिए बाध्य नहीं करता। इसे केवल एक “सावधानी नोट” के तौर पर देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी स्थिति में निष्पक्षता पर सवाल उठता है, तो जज खुद को अलग करने का निर्णय ले सकते हैं। लेकिन यह हर मामले में अनिवार्य प्रक्रिया नहीं है।
पहले की आपत्ति और विवाद की पृष्ठभूमि
इससे पहले एक अन्य डिवीजन बेंच ने सर्कुलर पर आपत्ति जताते हुए इसे अदालत के कामकाज में दखल जैसा बताया था। यह मामला तब चर्चा में आया जब सुनवाई के दौरान एक जज ने खुद को अलग कर लिया था। उस समय कहा गया था कि नियमों के कारण सुनवाई प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी टिप्पणी के बाद मामला हाई कोर्ट की मुख्य बेंच तक पहुंचा।
क्या होता है बेंच हंटिंग
बेंच हंटिंग का मतलब होता है किसी मामले को जानबूझकर किसी खास जज या बेंच के सामने लगाने की कोशिश करना। हाई कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चुनौती माना है। कोर्ट का कहना है कि इससे निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से सर्कुलर जारी कर सभी बेंच को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।