छत्तीसगढ़ सरकार ने तीन आयोग अध्यक्षों को कैबिनेट मंत्री और 15 अध्यक्षों व उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने विभिन्न आयोगों, निगमों, बोर्डों और अकादमियों के अध्यक्षों एवं पदाधिकारियों को मंत्री स्तर का दर्जा देने का आदेश जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग के इस आदेश के बाद तीन आयोग अध्यक्षों को कैबिनेट मंत्री और 15 अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री का दर्जा मिला है। सरकार के इस फैसले को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है।
तीन आयोग अध्यक्षों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा
आदेश के अनुसार राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल चौहान, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें कैबिनेट मंत्री स्तर का प्रोटोकॉल और सुविधाएं मिलेंगी।
15 अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री का दर्जा
सरकार ने विभिन्न विकास निगमों, कल्याण बोर्डों और अकादमियों से जुड़े 15 अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया है। इनमें राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष गौरीशंकर श्रीवास, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष आनंद निषाद, संस्कृत विद्या मंडल के अध्यक्ष राजेश कुमार राजपूत और शाकंभरी बोर्ड के अध्यक्ष राजेंद्र नायक शामिल हैं। राज्य शिक्षा आयोग के अध्यक्ष सुधीर गौतम और राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष एजाज मिर्जा बेग को भी राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है।
अन्य पदाधिकारियों को भी मिला मंत्री स्तर का दर्जा
आदेश में राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ के अध्यक्ष भोजराज देवांगन, राज्य राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, राज्य सिंधी अकादमी की अध्यक्ष सुषमा जेठानी और राज्य सहकारी विपणन संघ के अध्यक्ष शशिकांत द्विवेदी समेत अन्य पदाधिकारियों को भी राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने की बात कही गई है। इस फैसले के बाद संबंधित पदाधिकारियों का सरकारी दर्जा और प्रोटोकॉल बढ़ जाएगा। उन्हें राज्य मंत्री स्तर के अनुरूप सुविधाएं और सम्मान मिलेंगे।
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से अहम फैसला
छत्तीसगढ़ सरकार के इस निर्णय को विभिन्न आयोगों, निगमों, बोर्डों और अकादमियों को अधिक महत्व देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि मंत्री स्तर का दर्जा मिलने से इन संस्थाओं के कामकाज को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी। आदेश जारी होने के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।