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Chambal Water Project Gains Pace, Work Starts on 2

चंबल परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, 27 किमी हिस्से में शुरू हुआ काम; एनओसी की अड़चनें दूर

मुरैना और ग्वालियर में चंबल वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट आगे बढ़ा। प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनें दूर करने के प्रयास तेज हुए, जिससे प्रोजेक्ट को गति मिली।


चंबल परियोजना ने पकड़ी रफ्तार 27 किमी हिस्से में शुरू हुआ काम एनओसी की अड़चनें दूर

मुरैना में हुई बैठक में एजेंसी और अधिकारियों के बीच हुई चर्चा

शहर की बहुप्रतीक्षित चंबल वाटर सप्लाई योजना में लंबे समय से आ रही प्रशासनिक अड़चनें अब दूर होती नजर आ रही हैं। 55 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन परियोजना के जिस 27 किलोमीटर हिस्से में काम प्रभावित था, वहां अब तेजी से कार्य शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, एमपीआईडीसी क्षेत्र के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिल चुका है, जबकि एनएचएआई ने भी नगर निगम को आवश्यक स्थान उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। इसे लेकर सोमवार को मुरैना में ग्वालियर निगमायुक्त और मुरैना कलेक्टर के बीच बैठक भी हुई।

जानकारी के मुताबिक, प्रभावित 27 किलोमीटर हिस्से में करीब 12 किलोमीटर क्षेत्र एनएचएआई, 10.5 किलोमीटर निजी भूमि तथा शेष हिस्सा एमपीआईडीसी के अधिकार क्षेत्र में आता है। एनओसी नहीं मिलने के कारण यहां पाइपलाइन बिछाने का कार्य अटका हुआ था। अब एमपीआईडीसी क्षेत्र में काम शुरू कर दिया गया है और एनएचएआई क्षेत्र में भी जल्द गति आने की उम्मीद है।परियोजना के सामने एक और बड़ी चुनौती पोल शिफ्टिंग की थी। इस पर भी सहमति बन गई है। जिन स्थानों पर बिजली के पोल हटाना संभव नहीं होगा, वहां डक्ट निर्माण के बजाय ओपन पाइपलाइन डाली जाएगी। इसके लिए एनएचएआई की विशेष टीम सर्वे कर ऐसे स्थानों को चिह्नित करेगी और रिपोर्ट नगर निगम को सौंपेगी।

हालांकि, चंबल नदी पर बनने वाले इंटेकवेल का कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है। इंटेकवेल निर्माण में आ रही तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। समिति को एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।गौरतलब है कि अप्रैल में सांसद भारत सिंह कुशवाहा ने चंबल से ग्वालियर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक बिछाई जा रही पाइपलाइन की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को लंबित एनओसी संबंधी मामलों का तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ा है और अब परियोजना को गति देने के प्रयास तेज हो गए हैं।

इंटेकवेल निर्माण के लिए बनी समिति

चंबल नदी पर इंटेकवेल निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए समिति गठित की गई है, जिसकी रिपोर्ट एक माह में सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर निर्माण कार्य को अंतिम मंजूरी और गति मिलेगी। इंटेकवेल तैयार होने के बाद चंबल का पानी सीधे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच सकेगा।

ग्वालियर तक ऐसे पहुंचेगा पानी

  • यह संपूर्ण परियोजना मुरैना और ग्वालियर, दो जिलों की संयुक्त संरचना पर आधारित है।
  • मुरैना नगर निगम द्वारा चंबल नदी किनारे इंटेकवेल बनाया जा रहा है।
  • यहां से 150 एमएलडी पानी पंपिंग कर देवरी (मुरैना) तक लाया जाएगा।
  • इसमें से 60 एमएलडी पानी मुरैना शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए दिया जाएगा।
  • शेष 90 एमएलडी पानी को ग्वालियर नगर निगम देवरी स्थित पंपिंग स्टेशन से आगे की पाइपलाइन के माध्यम से भेजेगा।
  • यह पानी 43 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए जालालपुर और मोतीझील जलशोधन संयंत्र तक पहुंचेगा।
  • कोतवाल बांध से मिलने वाला 60 एमएलडी पानी शहर की दूसरी बड़ी जलापूर्ति लाइन को मजबूत करेगा।

अधिकारियों ने क्या कहा

"परियोजना से जुड़े अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि कार्य के दौरान उपयोग की जाने वाली अलाइनमेंट, मैप और ड्रॉइंग सहित सभी तकनीकी जानकारियों का दोनों जिलों के संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों के बीच नियमित आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाए।"

-लोकेश कुमार जांगिड़, कलेक्टर, मुरैना

"चंबल प्रोजेक्ट के संचालन में जो भी समस्याएं आ रही हैं, उन्हें नगर निगम ग्वालियर और जिला प्रशासन मुरैना के समन्वय से दूर कर लिया जाएगा, ताकि आम नागरिकों को चंबल परियोजना का लाभ शीघ्र मिल सके।"

-संघप्रिय, निगमायुक्त

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