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Chambal Sand Mafia Violence: 35+ Killings

चंबल अंचल में रेत माफियाओं का खूनी साम्राज्य

चंबल अंचल में अवैध रेत खनन माफिया का आतंक बढ़ा। 15 साल में 35 से ज्यादा हत्याएं, वनकर्मियों और पुलिस पर हमले, पर्यावरण पर भी गंभीर असर।


चंबल अंचल में रेत माफियाओं का खूनी साम्राज्य

चंबल में बढ़ता खनन माफियाओं का आतंक, 15 वर्षों में 35 से अधिक हत्याएं, अफसर भी निशाने पर

मध्य प्रदेश के चंबल अंचल, खासकर मुरैना, भिंड और दतिया जिलों में अवैध रेत खनन का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है। यह केवल आर्थिक अपराध नहीं रह गया है, बल्कि अब यह कानून-व्यवस्था और मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। हाल ही में मुरैना जिले के दिमनी थाना क्षेत्र में वन विभाग की टीम पर हमला इसका ताजा उदाहरण है, जिसमें वन रक्षक हरकेश गुर्जर की ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर हत्या कर दी गई। 

ड्यूटी पर तैनात कर्मियों पर जानलेवा हमले

घटना सुबह करीब 6 बजे की है, जब वन विभाग की टीम नियमित गश्त पर थी। अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने का प्रयास करने पर चालक ने वाहन नहीं रोका, बल्कि तेजी से भागने की कोशिश की। इस दौरान हरकेश गुर्जर को कुचल दिया गया। यह घटना दर्शाती है कि माफियाओं में कानून का कोई डर नहीं रह गया है और वे सरकारी कर्मचारियों पर भी हमला करने से नहीं हिचकते।

वनकर्मियों को धमकाने तक पहुंचा दुस्साहस

केवल हत्या ही नहीं, बल्कि माफियाओं का दुस्साहस इस हद तक बढ़ चुका है कि वे वन विभाग की बैरक में घुसकर कर्मचारियों को धमकी देने लगे हैं। सबलगढ़ रेंज में कुछ आरोपियों ने बैरक में घुसकर वनकर्मियों को जान से मारने की धमकी दी और अभद्र व्यवहार किया। इस घटना में कई लोगों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और संरक्षण के सवाल

इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस नेता डॉ. गोविंद सिंह ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि खनन माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। उनका दावा है कि चबल और सिंध नदियों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है, जिससे नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अवैध खनन में स्थानीय नेताओं और पुलिस की मिलीभगत है।

हिंसा का लंबा और भयावह इतिहास

चंबल क्षेत्र में रेत माफियाओं की हिंसा कोई नई बात नहीं है। पिछले डेढ़ दशक में यहां 35 से अधिक हत्याएं हो चुकी हैं। वर्ष 2012 में आईपीएस अधिकारी नरेंद्र कुमार की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसके बाद भी 2014 से लेकर 2024 तक कई बार पुलिस, वन विभाग और आम नागरिकों पर हमले हुए हैं। फायरिंग, पथराव और वाहन से कुचलने जैसी घटनाएं आम हो गई हैं।

सड़कों पर मौत बनकर दौड़ते वाहन

रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर चंबल क्षेत्र की सड़कों पर तेज रफ्तार में दौड़ते हैं। इनकी वजह से कई दर्दनाक हादसे हुए हैं, जिनमें मासूम बच्चों से लेकर बुजुगों तक की जान गई है। कई मामलों में पूरे परिवार उजड़ गए। यह स्थिति बताती है कि अवैध खनन केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी के लिए भी घातक बन चुका है।

पर्यावरण और वन्यजीवों पर गंभीर असर

अवैध खनन का असर चंबल नदी की जैव विविधता पर भी पड़ रहा है। राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंचुरी, जो दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए जानी जाती है, अब खतरे में है। रेत में अंडे देने वाले घडियाल और अन्य जीवों के प्रजनन पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंध के बावजूद खनन जारी रहना गंभीर चिंता का विषय है।

कानूनी कार्रवाई के बावजूद हालात बेकाबू

हालांकि सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित ही दिखता है। प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई का दावा करता है, लेकिन माफियाओं के बढ़ते हौसले यह संकेत देते हैं कि नियंत्रण अभी भी अधूरा है।

निष्कर्षः सख्त कार्रवाई की जरूरत

चंबल में रेत माफियाओं का आतंक अब एक गंभीर सामाजिक, पर्यावरणीय और प्रशासनिक संकट बन चुका है। यदि समय रहते सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका को मिलकर इस चुनौती का समाधान निकालना होगा, ताकि क्षेत्र में कानून का राज स्थापित हो सके और आम लोगों में सुरक्षा का विश्वास बहाल हो सके।

अब तक कितने अफसरों की गई जान

सड़कों पर मौत बनकर दौड़ते वाहन

रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर चंबल क्षेत्र की सड़कों पर तेज रफ्तार में दौड़ते हैं। इनकी वजह से कई दर्दनाक हादसे हुए हैं, जिनमें मासूम बच्चों से लेकर बुजुगों तक की जान गई है। कई मामलों में पूरे परिवार उजड़ गए। यह स्थिति बताती है कि अवैध खनन केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी के लिए भी घातक बन चुका है।

पर्यावरण और वन्यजीवों पर गंभीर असर

 08 मार्च 2012 को आईपीएस नरेंद्र कुमार की माफिया द्वारा टैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी गई थी

 31 मार्च को देवरी  घड़ियाल केंद्र पर, एसएएफ के हवलदार विश्वनाथ को माफिया ने गोली मारी थी

 05 अप्रैल 2015 को धनेला रोड पर डंपर से कुचलकर पुलिस आरक्षक धर्मेंद्र चौहान को मौत के घाट उतारा

 03 मार्च 2016 को देवरी के पास हाइवे पर अधीक्षक, डिप्टी रेंजर और वन आरक्षक पर लाठी-डंडों से हमला

07 मार्च 2016 को बानमोर व ग्वालियर के बीच ट्रैक्टर से कुचलकर वनरक्षक की मौत

07 मार्च रेत माफिया ने वन आरक्षक नरेंद्र शर्मा को ट्रैक्टर से कुचलकर मारा

 09 अगस्त को रेंजर और एसएएऊ को घेरा, ट्रैक्टर-ट्रॉली छुड़ा ले गए माफिया

27 मार्च 2017 को बरवासिन चंबल घाट पर पुलिस पर माफिया ने की फायरिंग

25 जून को रेत का ट्रैक्टर-ट्रॉली रोका तो माता बसैया थाना प्रभारी पर हमला

06 सितंबर 2018 में रेत माफिया से वन नाके पर ट्रैक्टर से कुचलकर डिप्टी रेंजर की हत्या की


 

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