ग्वालियर में जनगणना ड्यूटी से बचने के लिए 500 से ज्यादा आवेदन और 130 अजीब बहाने सामने आए। प्रशासन ने सख्त ‘नो लीव’ पॉलिसी लागू की और अनुपस्थिति को ब्रेक इन सर्विस बताया।
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में एक मई से जनगणना प्रक्रिया शुरू हुई। अब ड्यूटी से बचने के अनोखे प्रयासों को लेकर सुर्खियों में है। सरकारी कर्मचारियों की तरफ से लगातार छुट्टी और नाम हटाने की मांग सामने आ रही है। स्थिति इतनी बढ़ गई कि प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़े। अब बिना अनुमति अनुपस्थिति को सीधे 'ब्रेक इन सर्विस' माना जाएगा। इस बीच 500 से ज्यादा आवेदन सामने आए हैं। जिनमें कई ऐसे बहाने शामिल हैं जिन्होंने प्रशासन को भी चौंका दिया है।
ड्यूटी से बचने की होड़ पर प्रशासन सख्त
जनगणना ड्यूटी से नाम हटवाने के लिए कर्मचारी और अधिकारी लगातार वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के पास पहुंच रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जिले में ‘नो लीव’ पॉलिसी लागू कर दी है। साथ ही मुख्यालय छोड़ने पर भी रोक लगा दी गई है। अधिकारियों का साफ संदेश है कि जनगणना राष्ट्रीय कार्य है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
500 आवेदन पर 130 से ज्यादा अजीब बहाने
अब तक 500 से अधिक आवेदन आए हैं, जिनमें करीब 130 बहाने प्रशासन के लिए हैरानी का कारण बने हैं। किसी ने एलर्जी का हवाला दिया, तो किसी ने पुरानी बीमारी या मैटरनिटी लीव का। महिला कर्मचारियों ने परिवारिक जिम्मेदारियों का कारण बताया। सबसे ज्यादा आवेदन शिक्षा विभाग से आए हैं, जो इस पूरे मामले को और भी चर्चा में ला रहे हैं।
वायरल बहानों ने खड़ा किया सवाल
कुछ आवेदन सोशल मीडिया पर भी चर्चा में हैं। एक कर्मचारी ने लिखा कि उन्हें अचानक याददाश्त कुछ घंटों के लिए चली जाती है। वहीं, एक महिला प्रिंसिपल ने दावा किया कि उनका हीमोग्लोबिन अचानक गिर जाता है और वे कुछ देर के लिए बेसुध हो जाती हैं। एक अन्य कर्मचारी ने धूप से एलर्जी का कारण बताकर ड्यूटी से राहत मांगी है, जबकि जनगणना कार्य खुले क्षेत्र में किया जाना है।
पारिवारिक कारण भी बने बहाना
करीब 100 से ज्यादा कर्मचारियों ने पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला दिया है। इनमें छोटे बच्चों की देखभाल और बुजुर्ग माता-पिता की बीमारी जैसे कारण शामिल हैं। महिला कर्मचारियों ने “घर में अकेले रहने” जैसी दलील भी दी है, जिससे आवेदन और बढ़ गए हैं। इन कारणों ने प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी कर दी है कि किस आधार पर छूट दी जाए।
प्रशासन का साफ संदेश
नगर निगम और जनगणना अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्य राष्ट्रीय महत्व का है। बिना अनुमति अनुपस्थिति को अब स्वैच्छिक नहीं माना जाएगा, बल्कि इसे सेवा में बाधा के रूप में देखा जाएगा। प्रशासन का रुख साफ है कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही पर सीधी कार्रवाई तय है।