डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के पिपरा रामलाल गांव में मंगलवार को प्रशासन ने सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण कर बनाए गए मकतब-मदरसा और मस्जिद के हिस्से के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
'हाड़ा' विकास सिंह, सिद्धार्थनगर: डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के पिपरा रामलाल गांव में मंगलवार को प्रशासन ने सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण कर बनाए गए मकतब-मदरसा और मस्जिद के हिस्से के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। करीब दो घंटे चली कार्रवाई में छह बुलडोजरों की मदद से सरकारी भूमि पर बने निर्माण का बड़ा हिस्सा हटाया गया। कार्रवाई के दौरान सपा विधायक सैय्यदा खातून और सपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया, जिसके चलते पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस व धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।
2022 से चल रहा था मामला
प्रशासन के अनुसार, पिपरा रामलाल गांव स्थित गाटा संख्या 1028, रकबा 0.063 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में ग्राम समाज की भूमि के रूप में दर्ज है और इसका उपयोग खेल के मैदान के रूप में दर्ज बताया गया है। इसी भूमि पर अब्दुल सलाम पुत्र मोहम्मद इदरीश द्वारा कथित रूप से मकतब-मदरसा और मस्जिद का निर्माण कराया गया था। अधिकारियों के अनुसार, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को लेकर 'सरकार बनाम अब्दुल सलाम' के नाम से तहसीलदार न्यायिक, डुमरियागंज के न्यायालय में वर्ष 2022 से मामला चल रहा था।
14 हजार वर्गफीट पर था कब्जा
सुनवाई के दौरान राजस्व अभिलेखों में भूमि की स्थिति और उस पर किए गए निर्माण को लेकर कार्रवाई की गई। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत चली कार्रवाई में 12 जून 2026 को बेदखली का आदेश पारित किया गया। साथ ही कथित अतिक्रमण के लिए 24,742 रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने का आदेश भी दिया गया था। प्रशासन का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने और कब्जा न हटाए जाने के बाद मंगलवार को मौके से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। मौके पर करीब 14 हजार वर्गफीट क्षेत्र में मस्जिद, मदरसा, कमरे और दुकानें बनी थीं। इसमें करीब 9 हजार वर्गफीट हिस्सा सरकारी भूमि पर होने का दावा किया गया है। इसी हिस्से में किए गए निर्माण को कार्रवाई के दायरे में लिया गया।
क्या बोले एसडीएम?
डुमरियागंज एसडीएम विवेकानंद मिश्र के अनुसार, कार्रवाई में सरकारी भूमि पर बने सात कमरों, एक दुकान, मस्जिद के करीब आधे हिस्से और मदरसे के हिस्से को ध्वस्त किया गया। वहीं निजी भूमि पर बने पांच कमरे तथा मस्जिद और मदरसे के शेष हिस्से को कार्रवाई से बाहर रखा गया।
1938 में स्थापित हुआ था मदरसा
स्थानीय लोगों के अनुसार, आरबिया जियाउल उलूम मदरसे की स्थापना वर्ष 1938 में गांव के अंदर हुई थी। वर्ष 1967 में इसे बांसी-डुमरियागंज मार्ग के किनारे स्थानांतरित किया गया। बताया जाता है कि शुरुआत में निर्माण निजी भूमि पर हुआ था, लेकिन बाद में परिसर का विस्तार करते हुए सरकारी भूमि तक निर्माण पहुंच गया।
सपा विधायक और कार्यकर्ताओं ने किया विरोध
ध्वस्तीकरण की सूचना पर डुमरियागंज की सपा विधायक सैय्यदा खातून, सपा जिलाध्यक्ष लालजी यादव समेत 50 से अधिक कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। उन्होंने कार्रवाई का विरोध करते हुए बुलडोजर रोकने की मांग की और नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हुई। सपा नेता कमाल अहमद खान मदरसे की ओर जाने का प्रयास कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने रोक दिया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव किया। बाद में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को कार्रवाई स्थल से दूर कर दिया।प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया था। डुमरियागंज एसडीएम विवेकानंद मिश्र, डुमरियागंज सीओ बृजेश वर्मा और बांसी सीओ सिवेंदु सिंह की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू हुई। पांच थानों की पुलिस के करीब 100 जवानों की मौजूदगी में छह बुलडोजरों से करीब दो घंटे तक ध्वस्तीकरण अभियान चला।प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई राजस्व अभिलेखों, न्यायालयीन आदेश और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए की गई है।