छत्तीसगढ के बीजापुर में बारिश और खराब सड़क के बीच 108 एंबुलेंस टीम सात किलोमीटर पैदल चली। ग्रामीणों के साथ मिलकर मरीज को खाट पर अस्पताल पहुंचाया और समय रहते इलाज शुरू कर जान बचाई।
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर के उसूर ब्लॉक में भारी बारिश और बदहाल सड़कें एक मरीज की जान बचाने में सबसे बड़ी बाधा बन गईं। इसके बाद एंबुलेंस टीम ने जो किया उसने सबको हैरान कर दिया। दरअसल, रायगुडा गांव के 22 वर्षीय सावन मडकाम की आधी रात तबीयत बिगड़ी और उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी। लोगों ने भारी बारिश के बीच एंबुलेंस बुलाई। लेकिन वह उफनते नाले के चलते गांव तक नहीं पहुंच सकी। जब गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी तो 108 सेवा की टीम ने पैदल निकलने का फैसला किया।
स्वास्थ्यकर्मियों ने ग्रामीणों और परिजनों के साथ मिलकर करीब सात किलोमीटर का कठिन रास्ता तय किया। जंगल, कीचड़ और उफनते नालों के बीच मरीज को खाट पर लिटाकर पुसकोंटा तक लाया गया। यहां पर पहले से खड़ी एंबुलेंस से उन्हें बीजापुर जिला अस्पताल पहुंचाकर भर्ती कराया गया।
दुर्गम रास्तों के बीच नहीं टूटा हौसला
मरीज की सूचना मिलते ही ईएमटी राजेश वल्पदास और पायलट विनोद मंचराल मौके के लिए रवाना हुए। लेकिन लगातार बारिश और सड़क संपर्क टूटने की वजह से एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद टीम ने वाहन छोड़ पैदल सफर शुरू किया और ग्रामीणों की मदद से मरीज तक पहुंची। पूरे अभियान में मरीज को सुरक्षित बाहर निकालना सबसे बड़ी प्राथमिकता रही।
टॉर्च की रोशनी में पूरा हुआ राहत अभियान
ईएमटी राजेश वल्पदास के अनुसार रात का अंधेरा, तेज बारिश और नालों का बढ़ा जलस्तर अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बना रहा था। इसके बावजूद टीम ने टॉर्च की रोशनी में रास्ता तय किया और मरीज को खाट पर लेकर सुरक्षित पुसकोंटा पहुंचाया। वहां से एंबुलेंस के जरिए तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया ताकि इलाज में देरी न हो।
ग्रामीणों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीमवर्क बनी ताकत
इस अभियान में सिर्फ 108 टीम ही नहीं बल्कि मरीज के परिजन और गांव के लोगों ने भी अहम भूमिका निभाई। सभी ने मिलकर बारी-बारी से खाट उठाई और कठिन रास्तों को पार किया। इस सामूहिक प्रयास की बदौलत मरीज को समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सका।
घटना ने फिर उजागर की बुनियादी चुनौती
बीजापुर के कई दूरस्थ गांव हर बारिश में सड़क संपर्क से कट जाते हैं। ऐसे हालात में आपातकालीन सेवाओं के लिए मरीज तक पहुंचना बड़ी चुनौती बन जाता है। रायगुडा की यह घटना स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिबद्धता का उदाहरण जरूर है, लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि दुर्गम इलाकों में हर मौसम में उपयोगी सड़क और बेहतर स्वास्थ्य ढांचे की जरूरत अब भी बनी हुई है।