भोपाल में MBA छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें 99.48 लाख रुपये का कथित गबन उजागर हुआ। CBI ने अकादमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज से जुड़े पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भोपाल में एमबीए छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा करते हुए बड़ा मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी छात्रवृत्ति की करीब 99.48 लाख रुपये की राशि कथित तौर पर छात्रों की जानकारी के बिना खोले गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर गबन की गई।इस मामले में यूको बैंक की हबीबगंज शाखा के तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक और अकादमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज, भोपाल से जुड़े पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
2020 से 2021 के बीच हुआ कथित घोटाला
सीबीआई की प्रारंभिक जांच के अनुसार, जनवरी 2020 से अक्टूबर 2021 के बीच सरकार द्वारा एमबीए छात्रों के लिए जारी छात्रवृत्ति की राशि का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। एजेंसी का आरोप है कि जिन छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति जारी हुई, उनमें से कई ने बताया कि उन्होंने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन ही नहीं किया था।
छात्रों की जानकारी के बिना खुले बैंक खाते
जांच में सामने आया कि कथित तौर पर छात्रों की जानकारी और सहमति के बिना बैंक खाते खोले गए। इन्हीं खातों में सरकारी छात्रवृत्ति की राशि जमा कर बाद में निकाल ली गई।सीबीआई अब यह जांच कर रही है कि खाते खोलने की प्रक्रिया में बैंकिंग नियमों का पालन हुआ था या नहीं, और इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
कॉलेज से जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई
सीबीआई ने इस मामले में भोपाल स्थित अकादमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज से जुड़े पांच व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि छात्रवृत्ति की राशि कथित तौर पर किस तरीके से निकाली गई और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
क्या है अकादमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज?
अकादमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज, भोपाल के अवधपुरी क्षेत्र में स्थित एक निजी, स्व-वित्तपोषित बिजनेस स्कूल है। इसकी स्थापना वर्ष 2009 में हुई थी। संस्थान AICTE से अनुमोदित और बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से संबद्ध है। कॉलेज का संचालन लाला राम राखा मल ट्रस्ट द्वारा किया जाता है और यहां दो वर्षीय एमबीए पाठ्यक्रम संचालित होता है।
जांच जारी, साक्ष्यों के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल मामला जांच के अधीन है। एजेंसी उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर यह तय करेगी कि सरकारी धन के कथित दुरुपयोग में किसकी क्या भूमिका रही और आगे किन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।