धार भोजशाला मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई अंतिम चरण में पहुंच गई है। अब मुस्लिम पक्ष अपना जवाब रखेगा। कोर्ट गर्मी की छुट्टियों से पहले प्रक्रिया पूरी कर सकती है।
धार। मध्य प्रदेश के धार शहर की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में चल रही सुनवाई अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। धार्मिक स्वरूप तय करने से जुड़े इस संवेदनशील मामले में कोर्ट लगातार पक्षकारों की दलीलें सुन रही है। करीब एक महीने से ज्यादा समय से चल रही सुनवाई में हिंदू और मुस्लिम पक्ष अपने-अपने तर्क रख चुके हैं।
अब अदालत प्रतिउत्तर सुन रही है और माना जा रहा है कि इसी सप्ताह बहस पूरी हो सकती है। सोमवार को मुस्लिम पक्ष को अपना जवाब पेश करना है। इसके बाद सुनवाई लगभग पूरी होने की संभावना जताई जा रही है।
कोर्ट ने तय किया समय, लिखित तर्क भी मांगे
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को साफ निर्देश दिए हैं कि उन्हें सीमित समय में अपनी बात रखनी होगी। अदालत पहले ही कह चुकी है कि हर पक्ष को अधिकतम 30 मिनट का समय दिया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने लिखित तर्क भी जमा कराने को कहा है, ताकि सभी दलीलों का रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से मौजूद रहे। कानूनी जानकारों का मानना है कि 16 मई से शुरू होने वाले ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले अदालत इस मामले की सुनवाई पूरी करने की कोशिश में है।
वर्शिप एक्ट को लेकर तेज हुई कानूनी बहस
मामले में सबसे बड़ा विवाद प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट को लेकर सामने आया है। मस्जिद पक्ष का कहना है कि कानून के तहत उन्हें भोजशाला में नमाज पढ़ने का अधिकार प्राप्त है। वहीं, मंदिर पक्ष की ओर से इस दावे का विरोध किया गया। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन और याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से पेश अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने कोर्ट में कहा कि भोजशाला राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर है। उनका तर्क है कि ऐसी संरक्षित स्मारकों पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट लागू नहीं होता।
ASI रिपोर्ट को लेकर मंदिर पक्ष का दावा
मंदिर पक्ष ने ASI रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भोजशाला में मस्जिद से जुड़ी बुनियादी संरचनाएं मौजूद नहीं हैं। कोर्ट में दावा किया गया कि किसी मस्जिद में वजूखाना, मीनार और मेहराब अहम हिस्से होते हैं, जबकि भोजशाला में वजूखाना और मीनार नहीं हैं। मेहराब को भी बाद में बनाया गया बताया गया है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर मंदिर पक्ष ने भोजशाला को मंदिर घोषित करने और यहां 24 घंटे पूजा की अनुमति देने की मांग रखी है। साथ ही नमाज पर रोक लगाने की मांग भी अदालत के सामने रखी गई।
कई बड़े वकील अदालत में रख रहे पक्ष
मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और अशहर वारसी पैरवी कर रहे हैं। वहीं अपीलार्थी काजी जकुल्ला की ओर से शोभा मेनन अदालत में पक्ष रख रही हैं। मंदिर पक्ष से विष्णुशंकर जैन और मनीष गुप्ता लगातार दलीलें पेश कर रहे हैं। मामले में मध्य प्रदेश सरकार, एएसआई और जैन समाज की ओर से भी अलग-अलग वकील शामिल हैं। इस अहम मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ कर रही है।