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Mandla Bineka Village Nag Panchami

Mandla Bineka Village: नागपंचमी पर मंडला के बिनैका गांव में निभाई जाती है प्राचीन परंपरा

मंडला के आदिवासी अंचल में सदियों पुरानी परंपराएं आज भी उतनी ही जीवंत हैं जितनी कभी थीं। नागपंचमी के पावन अवसर पर मंडला के छोटे से गांव बिनैका में गोंडी संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।


mandla bineka village नागपंचमी पर मंडला के बिनैका गांव में निभाई जाती है प्राचीन परंपरा 

Mandla Bineka Village: नागपंचमी पर मंडला के बिनैका गांव में निभाई जाती है प्राचीन परंपरा  |

राजेश यादव,मंडला: मंडला के आदिवासी अंचल में सदियों पुरानी परंपराएं आज भी उतनी ही जीवंत हैं जितनी कभी थीं। नागपंचमी के पावन अवसर पर मंडला के छोटे से गांव बिनैका में गोंडी संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यहां नाग देवता की पूजा आधुनिक विधि से नहीं, बल्कि गोंडी मंत्रों, अखाडी, और पारंपरिक अनुष्ठानों के बीच होती है। आइए दिखाते हैं, कैसे आस्तिक मुनि के दरबार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है।

आस्तिक मुनि मंदिर में होती है पूजा

मंडला जिला मुख्यालय से कुछ ही किलोमीटर दूर बिनैका गांव। हर साल नागपंचमी पर गांव वाले गांव के बाहर स्थित आस्तिक मुनि के मंदिर पहुंचते हैं। पूजा-अर्चना के बाद गांव में पारंपरिक अनुष्ठान शुरू हो जाता है। पंडा के यहां लकड़ी का पाटा स्थापित कर नाग देवता के प्रतीक के रूप में पूजा की जाती है।

निभाई जाती है ये परंपरा

इसके बाद शुरू होता है वह दृश्य, जिसे देखने के लिए न सिर्फ मंडला, बल्कि आसपास के जिलों से भी लोग जुटते हैं। गोंडी मंत्रों, अखाडी का उच्चारण होता है और कुछ ग्रामीणों पर ‘भाव’ या ‘भार’ आने की परंपरा निभाई जाती है। इन्हें स्थानीय भाषा में ‘बरुआ’ कहा जाता है। बरुआ आस्था के भाव में झूमते हुए पंडा के पास पहुंचते हैं। पंडा पारंपरिक विधि से अखाड़ी पढ़ते हैं। इस दौरान कारी नाग सहित विभिन्न नाग देवताओं का स्मरण करते हुए आहुति दी जाती है।

पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। नागपंचमी के दिन पूरा गांव एकजुट होकर नाग देवता और आस्तिक मुनि की पूजा करता आया है। नई पीढ़ी भी इस विरासत को गर्व से आगे बढ़ा रही है। स्थानीय स्तर पर एक और दावा लंबे समय से किया जाता रहा है। पंडा और बरुआ मानते हैं कि पारंपरिक विधि, भाव और अखाड़ी के माध्यम से सांप के काटने पर शरीर से विष निकाला जा सकता है। कई लोगों का कहना है कि इससे उन्हें लाभ मिला है, इसलिए दूर-दराज से भी लोग यहां आते हैं। नागपंचमी के दिन बिनैका के दृश्य अपने आप में खास होते हैं। गोंडी मंत्रों, अखाडी से नाग देवता का स्मरण करते है, तो कहीं पंडा और बरुआ के आसपास ग्रामीणों की भीड़ जुट जाती है।

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