Top
Home > Lead Story > एनआरसी मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा - असम में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं

एनआरसी मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा - असम में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं

एनआरसी मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा - असम में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं
X

नई दिल्ली। असम में नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी के प्रकाशन के बाद उस पर लोगों की आपत्ति दर्ज कराने के लिए सरकार को प्रक्रिया और नियम संबंधी ड्राफ्ट तैयार करने की अनुमति दे दी है। इस मामले पर अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने आज साफ कर दिया कि असम में नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

सुनवाई के दौरान एनआरसी के कोआर्डिनेटर ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 7 अगस्त से लोग ये जान सकेंगे कि एनआरसी के दूसरे ड्राफ्ट में उनका नाम किन वजहों से शामिल नहीं किया गया है। वे 30 अगस्त से 28 सितम्बर तक आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। तीन जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने एनआरसी रजिस्टर का काम पूरा करने की मियाद एक महीने बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी थी। एनआरसी का प्रकाशन उसके पहले ही कर दिया गया।

राज्य में अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशियों की पहचान के मद्देनज़र ये प्रक्रिया काफी अहम थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले इसे 30 जून तक करने को कहा था लेकिन राज्य सरकार ने बताया कि बाढ़ के मद्देनज़र इसमें और वक्त लगेगा। उसके बाद कोर्ट ने एक महीने समय बढ़ाने की अनुमति दे दी।

पहले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और असम सरकार से कहा था कि असम में विदेशियों की पहचान कर वापस भेजने के लिए नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन्स (एनआरसी) का काम ना तो रोका जाएगा और ना ही इसके लिए वक्त बढ़ाया जाएगा। बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि हमारा काम ही असंभव को संभव बनाना है। एनआरसी बनाने को एक बड़ा मजाक कहा जा रहा था, वो अब हकीकत में बदलने जा रहा है।

सुनवाई के दौरान जब एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि एनआरसी के काम में दिक्कत ये है कि मार्च या अप्रैल में राज्य में निकाय चुनाव आयोजित किए जा सकते हैं, ऐसे में अफसरों की जरूरत पड़ेगी । तब कोर्ट ने कहा था कि किसी भी सूरत में एनआरसी का काम नहीं रुकेगा और ना ही इसमें दखल दिया जाएगा। कोर्ट ने कहा था कि स्थानीय निकाय के चुनाव के लिए एनआरसी के कार्डिनेटर और उनकी टीम का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। ना ही इसके लिए किसी अन्य कार्डिनेटर की नियुक्ति होगी। हर हालत में एनआरसी का काम जारी रहेगा। कोर्ट ने कहा था कि वो इस पर निगरानी रखेगा ।

सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि असम में एनआऱसी के काम में कई वजहों से देरी हो सकती है इसलिए इसके लिए 31 जुलाई तक का समय दिया जाए । अटार्नी जनरल ने कहा था कि असम में काम अच्छा हो रहा है लेकिन कोर्ट ने साफ कहा था कि हमें कई बार सब पता होता है लेकिन हम कहते हैं कि हमें नहीं पता । ये सिर्फ कोर्ट है जो अपना बेस्ट दे रहा है । इस पर अटार्नी जनरल ने कहा था कि मुझे नहीं पता ।

इसके पहले 5 दिसम्बर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने असम के 48 लाख लोगों की नागरिकता के मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए कहा था कि उन लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने का दोबारा मौका मिलेगा। कोर्ट ने कहा कि जिन 48 लाख महिलाओं को पंचायत द्वारा नागरिकता का प्रमाण पत्र दिया गया है, उसका वेरिफिकेशन के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है।

दरअसल असम के ग्राम पंचायत सचिवों ने असम के 48 लाख लोगों को नागरिकता का प्रमाण पत्र दिया है, जिसे गुवाहाटी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी । गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उन प्रमाणपत्रों को पब्लिक डॉक्यूमेंट मानने से इनकार कर दिया था और कहा था कि ये प्राइवेट डॉक्यूमेंट हैं । हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ आमसू समेत छह याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

आमसू ने अपनी याचिका में कहा था कि ये जो प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं वे पब्लिक डॉक्यूमेंट ही हैं । आमसू के वकील फुजैल अहमद अय्युबी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि इन प्रमाण पत्रों को अंतिम रुप देने में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, महानिबंधक और सुप्रीम कोर्ट की मर्जी रही है । ये 16 सहायक दस्तावेजों में से 13वें स्थान पऱ आता है । आमसू ने कहा था कि अगर इन लोगों के प्रमाणपत्र को सही नहीं माना जाएगा तो सबकी नागरिकता खत्म हो जाएगी और उन्हें विदेशी माना जाएगा ।

Updated : 2018-08-01T01:58:41+05:30
Tags:    

Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


Next Story
Share it
Top