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कंधार विमान अपहरण के वक्त पड़ी थी जैश-ए-मोहम्मद की नींव

कंधार विमान अपहरण के वक्त पड़ी थी जैश-ए-मोहम्मद की नींव

नई दिल्ली। पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए हमले को लेकर सबकी जुबान पर जैश-ए-मोहम्मद का नाम है। इसलिए इस आतंकी संगठन के बारे में जानना जरूरी है। हालांकि अगर इसके नाम पर गौर किया जाए तो जैश-ए-मोहम्मद का मतलब होता है मुहम्मद की सेना| लेकिन यह तो एक आतंकी संगठन है जो आजकल कश्मीर के इलाकों में हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने को लेकर सक्रिय है। इस संगठन का मुख्य मकसद कश्मीर को भारत से अलग कर पाकिस्तान से मिलाना है।

उल्लेखनीय है कि इस आतंकी संगठन की नींव उस वक्त पड़ी थी जब 1999 के दौरान हरकत-उल-मुजाहिद्दीन के कुछ आतंकियों ने काठमांडू से दिल्ली आने वाले इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट-814 का अपहरण कर लिया था और बाद में उस फ्लाइट को आतंकियों ने अफगानिस्तान स्थित कंधार ले जाने को मजबूर कर दिया था। वहां जब आतंकियों ने एक यात्री रुपन कत्याल की गला रेतकर हत्या कर दी तो भारत सरकार आतंकियों की मांग पर सहमत होने के लिए मजबूर हो गई। आतंकियों ने कहा कि वह भारत की जेलों में बंद आतंकी मौलाना मसूद अजहर, अहमद ओमर शेख व मुश्ताक अहमद जर्गर की तत्काल रिहाई चाहते हैं। फिर उन आतंकियों को भारत सरकार ने अफगानिस्तान ले जाकर छोड़ दिया।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका की ओर से प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद का मुखिया वही मौलाना मसूद अजहर है। अजहर को अफगानिस्तान से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई अपने साथ पाकिस्तान ले गई थी| बाद में अजहर जैश-ए-मोहम्मद नामक संगठन बनाकर उसका मुखिया बन गया। पाकिस्तान ले जाने के बाद आईएसआई ने अजहर को पूरे पाकिस्तान में भ्रमण कराकर अपनी जीत का इजहार किया था। इस दौरान लोगों से काफी मात्रा में फंड भी इकट्ठा किए गए थे। अब वही आतंकी संगठन भारत के लिए नासूर बन चुका है।

हालांकि कुछ जानकार यह भी मानते हैं कि लश्कर-ए-तैयबा की बराबरी में एक संगठन खड़ा करने के लिए इस संगठन की नींव डाली गई। लेकिन इस संगठन की ओर से किए गए आतंकी हमले से तो यही लगता है कि संगठन को कश्मीर में आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए ही खड़ा किया गया। अंतराष्ट्रीय समुदाय को दिखाने के लिए तो पाकिस्तान सरकार ने संगठन को 2002 में ही प्रतिबंधित कर रखा है लेकिन अभी भी इसकी गतिविधियां पाकिस्तान व कश्मीर में जारी हैं।

इस आतंकी संगठन की संरचना पूरी तरह एक हाथ में केंद्रित है। हालांकि कई मामले में इसके सदस्य हरकत-उल-मुजाहिद्दीन व अलकायदा के भी सदस्य होते हैं। साथ ही इसके तार अफगानिस्तान तालिबान से भी जुड़े हैं। अलकायदा ही अफगानिस्तान में इसके सदस्यों को प्रशिक्षण भी देता है। हरकत के सदस्य अजहर से जुड़े हुए हैं।

सुरक्षा मामले के जानकार बी. रहमान के मुताबिक यह आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर का सबसे खतरनाक संगठन है। इस संगठन पर रूस, आस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका व यूनाइटेड नेशन द्वारा प्रतिबंध लगाया जा चुका है। जानना जरूरी है कि 2016 के दौरान पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले में इस संगठन पर शक जाहिर किया गया था। हालांकि उस वक्त पाकिस्तान ने दिखाने के लिए जैश के कई सदस्यों की गिरफ्तारी की थी। लेकिन पाकिस्तान का लोकप्रिय अखबार डॉन ने कहा था कि बाद में पाकिस्तान सरकार ने उन्हें छोड़ दिया था।

Updated : 16 Feb 2019 5:00 AM GMT
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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