यात्रीगण कृपया ध्यान दें : ट्रेन में यात्रा करते समय बचकर रहें अवैध वेंडरों से

यात्रीगण कृपया ध्यान दें : ट्रेन में यात्रा करते समय बचकर रहें अवैध वेंडरों से
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ट्रेनें बिकती हैं, उनमें खान पान सामग्री बेचने के बदले सुरक्षाकर्मियों करते हैं अवैध वसूली !

ग्वालियर । रेल यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भले ही रेलवे विभाग की हो, लेकिन आए दिन चोरी व लूट की वारदातें सुनने में आ ही जाती हैं। इस पर रोक लगाने के लिए आरपीएफ, जीआरपी का डंडा भी चलता है, लेकिन कुछ समय बाद ही यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इसके पीछे हकीकत क्या है? शायद आपको इसकी जानकारी ना हो , तो हम आपको बताते हैं घटना का बैकग्राउंड।

ट्रेनों में चना, पेठा, चाय, मूंगफली, गुटखा, समौसा सहित अन्य सामग्री अवैध रूप से बेचने वाले वेंडरों से यात्रियों की सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षा एजेंसियों के जवान ड्यूटी (अवैध वसूली) के नाम पर रोजाना हजारों रुपए कमा रहे हैं। ट्रेनों में खाद्य सामग्री बेचने वालों को 20 रुपए में ट्रेन में व्यापार करने का लायसेंस दे दिया जाता है। ये लायसेंस दिन में एक बार नहीं बल्कि जितने जवान मिलते हैं, उतनी बार रिन्यू होता जाता है। इन अवैध वेंडरों के मुताबिक प्रतिदिन औसतन 160 रुपए वह ड्यूटी के नाम पर देते हैं, तब कहीं जाकर वे ट्रेनों में चल पाते हैं।

चेन, चना, पानी और पेठा

यह चार सामान यात्रियों को ट्रेन में यात्रा के समय जरूर नजर आ जाते होंगे। खासतौर पर रेलवे स्टेशन के आउटर पर, जब ट्रेन सिग्नल न मिलने की कंडीशन में वहां खड़ी हो जाती होगी, लेकिन आपको यह नहीं मालूम होगा कि यह एक रणनीति है, जो यात्रियों को लूटने के लिए बनाई जाती है, इसलिए इन सामानों को बेचने वालों से बचकर रहें।

सब होते हैं पहले से सेट

लूटने के इरादे से प्लेटफार्म पर यात्रियों की मॉनिटरिंग करने वाले ये शातिर और भी हथकंडे अपनाते हैं। प्लेटफार्म से लेकर ट्रेन तक में यह खेल' सेट होता है। एक यही वजह है कि ट्रेन में चलने वाला जीआरपी, आरपीएफ और टीटीआई स्टाफ इन पर नजर नहीं डालता है। यदि नजर पड़ भी जाए तो वह अपना काम कर चलता बनता है।

लूट के साथ जहरखुरानी

वेंडर का चोला पहनकर ट्रेन में खान-पान के अलावा अंदर अन्य सामानों को अवैध वेंडर बेचते हैं। कोई रोक-टोक न होने पर वह जहरखुरानी की घटना को आसानी से अंजाम दे डालते हैं।

यह ठिकाना होता है इनका

-रेलवे स्टेशन का वह प्लेटफार्म, जहांं रेलवे स्टाफ कम होता है।

-रेलवे स्टेशन का आउटर प्वॉइंट, जहां ट्रेन धीमी होती है।

यह रूट है इनका

-ग्वालियर से झांसी रेलवे स्टेशन के बीच।

-आगरा से ग्वालियर रेलवे स्टेशन के बीच।

-सिथैली से बानमौर रेलवे स्टेशन।

इस तरह पहचान कर सकते हैं इनकी

-नेम प्लेट के साथ आई कार्ड वेंडर के गले में देखें।

-न होने पर इसकी सूचना ट्रेन में चल रहे स्टाफ को दें।

आगरा से झांसी तक चलता है कारोबार

आगरा से झांसी रेल मंडल के स्टेशन और ट्रेनों में अवैध वेंडिंग का बड़ा कारोबार चल रहा है। हर स्टेशन और ट्रेन का रेलवे से जुड़े वर्दीधारियों के पास पूरा हिसाब-किताब रहता है। वाणिज्य विभाग के कुछ कारिंदे भी इसमें हिस्सा लेते हैं। कौन सी ट्रेन में किस स्टेशन से कितने वेंडर माल बेचने चढऩा हैं। पूड़ी-सब्जी वाला, समौसे वाला और खिलौने वाले से लेकर भीख मांगने वाले भी अपना हिस्सा देते हैं। ट्रेनें बिकती हैं और उनमें माल बेचने के लिए रकम अदा करना होती है। वाणिज्य विभाग का अभियान चले तो अवैध वेंडरों से ही जुर्माना लिया जाता है, ताकि खेल चलता रहे।

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