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विपक्षी दलों ने पहले नागरिकता कानून की पैरवी की, अब क्यों मचा रहे हाय-तौबा: सांसद शेजवलकर

नागरिकता संशोधन कानून

विपक्षी दलों ने पहले नागरिकता कानून की पैरवी की, अब क्यों मचा रहे हाय-तौबा: सांसद शेजवलकर
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नागरिकता संशोधन कानून को लेकर बोले सांसद, कानून में 'मुस्लिमÓ शब्द ही नहीं तो बवाल क्यों

ग्वालियर, न.सं.। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विपक्षी दलों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम एवं षड्यंत्र को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं व जनप्रतिनिधियों ने शुक्रवार को देश भर में पत्रकार वार्ता कर कानून के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। इसी के तहत ग्वालियर में सांसद विवेक शेजवलकर पत्रकारों से रूबरू हुए और खुलकर कानून के संबंध में अपनी बात रखी और विपक्ष को आड़े हाथ लिया।

श्री शेजवलकर ने कहा कि विपक्षी पार्टियां पहले नागरिकता कानून की पैरवी करने के साथ अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की वकालत करते थे, लेकिन आज मोदी सरकार ने कानून में संशोधन कर यह ऐतिहासिक कदम उठाया है तो विपक्षियों के पेट में दर्द होने लगा है। यह दोहरी नीति बिलकुल भी नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि लोग पूछते हैं कि नागरिकता संशोधन कानून की जरूरत क्या थी? सवाल करने वालों को यह समझना चाहिए कि भारत एक वैश्विक महाशक्ति है, क्षेत्रीय महाशक्ति है। एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य होने के नाते हमारा यह कर्तव्य है कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में जहां-जहां, जो-जो लोग धार्मिक प्रताडऩा के शिकार हो रहे हैं, उन्हें संरक्षण दिया जाए। नागरिकता संशोधन कानून हमारे संविधान की भावना की अभिव्यक्ति है और यह हमारे क्षेत्र की मजहबी हुकूमतों को लोकतांत्रिक भारत का जवाब है। सांसद श्री शेजवलकर ने कहा कि बड़े दुख की बात है कि कांग्रेस सहित वे सभी दल जो नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर देश में आग लगाना चाहते हैं, वे गांधी जी का भी अपमान कर रहे हैं। विरोध करने वालों के पास इस बात का क्या जवाब है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या 23 प्रतिशत थी, जो आज 3.7 प्रतिशत रह गई है। इसी प्रकार बांग्लादेश में 22 प्रतिशत थी, जो आज 7.8 प्रतिशत हो गई है। ठीक इसी के उलट भारत में मुस्लिमों की संख्या 9.8 प्रतिशत थी, जो आज 14 प्रतिशत से ऊपर हो गई है। उन्होंने कहा कि नए कानून का विरोध करने वालों और देश में अराजकता फैलाने वालों से हमारा प्रश्न है कि वह हमारा जवाब दें कि पाकिस्तान और बांग्लादेश आदि के अल्पसंख्यक हिन्दू, सिख, इसाई, जैन, बौद्ध, पारसी आदि को आसमान निगल गया या वे जमीन में समां गए? पाकिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को स्वाभाविक है या तो मार दिया गया, या धर्म परिवर्तन करा दिया गया या उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा।

गैर मुसलमानों की बेटियों का अपहरण कर सामूहिक बलात्कार किए गए। उन्होंने कहा कि कानून के नाम पर जो लोग बवाल कर रहे हैं, वे भी मुसलमानों के हितचिंतक नहीं हैं। सच तो यह है कि यह वे लोग हैं, जिन्होंने मुसलमानों को पीढ़ी दर पीढ़ी डरा कर कभी देश की मुख्य धारा में आने नहीं दिया। नागरिकता संशोधन कानून में बहुत स्पष्ट रूप से नागरिकता देने का प्रावधान है, लेने का नहीं। श्री शेजवलकर ने कहा कि कांग्रेसी, वामपंथी और मायावती जैसे लोग नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करके उस वर्ग पर भी अत्याचार कर रहे हैं, जिसे हम अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग कहते हैं, क्योंकि भारत आने वाले शरणार्थियों में 70 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति और जनजाति के पीडि़त भाई-बहन हैं। नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों को देश को यह बताना चाहिए कि अगर यह पीडि़त शरणार्थी भारत में शरण नहीं लेंगे या भारत इन्हें नागरिकता नहीं देगा तो दुनिया में कौन सा ऐसा देश है, जो इन्हें नागरिकता देने के लिए तैयार होगा? उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री सब कुछ जानकर भी वोटों के लालच में और अपने आकाओं को खुश करने के लिए नागरिकता कानून को मध्यप्रदेश में लागू नहीं करने की बात कह रहे हैं, जबकि नागरिकता देना और नहीं देना यह राज्यों का विषय ही नहीं होता। नागरिकता देश की होती है, प्रदेश की नहीं। यह कमलनाथ भी भलीभांति जानते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से इस मानवीय विषय पर भी वे वोटों की फसल उगाने का प्रयास कर रहे हैं। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष देवेश शर्मा, महामंत्री कमल माखीजानी, शरद गौतम, महेश उमरैया, पवन कुमार सेन उपस्थित थे।


Updated : 2020-01-04T04:46:08+05:30
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