ग्वालियर की खस्ताहाल सड़कों के लिए जिम्मेदार कौन ?

ग्वालियर/स्वदेश वेब डेस्क। शहर की सड़कों पर बने बड़े - बड़े गड्ढे अधिकारियों की लापरवाही और ठेकेदारों से उनकी मिलीभगत की कहानी बता रहे हैं। बड़ी बात ये है कि ग्यारंटी पीरियड की सड़कें भी निर्माण के कुछ समय बाद ही उखड़ गईं। अब नगर निगम इन सड़कों पर पेंच रिपेयरिंग कर अपनी कमियों को छिपाने का प्रयत्नकर रहा है।

ग्वालियर शहर की खस्ताहाल सड़कों पर यदि नजर डालेंगे तो 221 सड़कें बारिश के बाद पूरी तरह बेकार हो चुकीं हैं कुछ सड़कें तो गड्ढों में बदल चुकी हैं। खराब हुई सड़कों में 82 गारंटी पीरियड वाली सड़कें भी शामिल हैं। इनमें ग्वालियर विधानसभा की 14 सड़कें, ग्वालियर पूर्व विधानसभा की 39 सड़कें, ग्वालियर दक्षिण विधानसभा की 22 सड़कें और ग्वालियर ग्रामीण की 7 सड़कें शामिल हैं। नियमानुसार अनुबंध के तहत सड़कों का निर्माण करने वाली कम्पनी को ही सड़कों को सुधारना चाहिए लेकिन निगम के अधिकारियों और कंस्ट्रक्शन कम्पनी की सांठगांठ के चलते कंपनियां सड़कों को सुधारती नहीं हैं उल्टा नगर निगम पेंच या तो पेंच रिपेयरिंग स्वयं करता है या उसके टेंडर करवाकर ठेकेदार के माध्यम से करवाता है।

यहाँ उल्लेखनीय है कि ग्वालियर में डामर की सड़कों का निर्माण कार्य चार कंपनियां करती है -

पहली है प्रेस्टीजियस स्कोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड जिसके संचालक बुद्धपाल सिंह जादौन

दूसरी है एच एन एस प्राइवेट लिमिटेड जिसके संचालक हाकिम शर्मा

तीसरी है शिपर्स प्राइवेट लिमिटेड जिसके संचालक राजेश शुक्ला

चौथी कम्पनी के संचालक रविंद्र सिंह तोमर

इन चारों कपनियों के काम की गुणवत्ता की निगरानी कम्पनी के सुपरवाइजर तो करते ही हैं जबकि नगर निगम की तरफ से भी विधानसभावार अधिकारी नियुक्त रहते हैं जिनकी भी ये जिम्मेदारी रहती है कि भी सड़कों की गुणवत्ता का ध्यान रखें लेकिन ऐसा होता नहीं है जिसका नतीजा सबके सामने है। यहाँ आपको बता दें कि नगर निगम की तरफ से प्रदीप चतुर्वेदी के पास ग्वालियर पूर्व विधानसभा की सड़कों की जिम्मेदारी है बड़ी बात ये है कि यहीं सबसे अधिक 39 ग्यारंटी पीरियड की सड़कें खराब हैं। प्रेम पचौरी के पास ग्वालियर दक्षिण विधान सभा की जिम्मेदारी है और ज्ञानेंद्र जादौन पर ग्वालियर विधानसभा की जिम्मेदारी है और यहाँ भी ग्यारंटी पीरियड वाली सड़कें बारिश में उखड़ गईं।

शहर की सड़कों के हालात इनकी गुणवत्ता की कहानी खुद कह रहे हैं। इनके निर्माण पर लगभग 60 से 70 करोड़ रुपये खर्च हो गए लेकिन नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही अथवा निर्माण कंपनियों के ठेकेदारों से उनकी सांठगांठ ने जनता की मेहनत की कमाई को पानी में बहा दिया। निगम अधिकारियों की बात पर भरोसा करें तो 66 सड़कों के लिए टेंडर हो चुके हैं और 70 सड़कों के लिए पेंचवर्क के काम को स्वीकृत किया जा चूका है साथ ही गारंटी पीरियड वाली सड़कों के लिए उसका निर्माण करने वाली एजेंसी को निर्देशित किया जा चुका और जल्दी ही सड़कों को सुधार दिया जाएगा। अब देखना ये होगा कि सुधरने के बाद ये सड़कें कितने दिन सही रह पाती हैं।

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