हमेशा अटलजी की याद दिलाती रहेगी सुशासन एक्सप्रेस

ग्वालियर। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद भी उनकी स्मृतियों को सजोंंकर रखने के लिए रेलवे द्वारा अटल जी के जन्म दिवस पर ग्वालियर से गोंडा के बीच चलाई गई सुशासन एक्सपे्रस अटल जी की जन्मभूमि को कर्मभूमि से जोडऩे का काम कर रही है। भाजपा के लिए सुुशासन एक्सप्रेस अटल जी की स्मृतियों को हमेशा ताजा बनाए रखेगी। अटल जी के चाहने वाले इस ट्रेन से जन्मभूमि से कर्मभूमि की यात्रा कर स्वयं को धन्य मान रहे हैं। रेलवे हो या यात्री, हर कोई अपनी यादों में अटल जी की स्मृतियों को संजोए हुए है।
पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म ग्वालियर में हुआ था, वे यहीं पले-बढ़े, उनकी शिक्षा भी ग्वालियर में ही हुई। बाद में अटल जी ने उत्तर प्रदेश के बलरामपुर को अपनी पहली कर्मभूमि बनाया और वर्ष 1957 में बलरामपुर संसदीय सीट से वह पहला चुनाव जीते थे, लेकिन वर्ष 1962 में वह हार गए। वर्ष 1967 में वह एक बार फिर चुनाव जीते थे। उस समय बलरामपुर गोंडा जिले का ही हिस्सा था। वर्ष 2014 में केन्द्र सरकार ने अटल जी के जन्म दिन पर सुशासन एक्सप्रेस चलाने का निर्णय लिया था। पहले इसका संचालन ग्वालियर से गोंडा के बीच किया गया। 25 दिसम्बर 2014 को सुशासन एक्सप्रेस को ग्वालियर से रवाना किया गया था। ग्वालियर में इस दिन गजब का उत्साह था। हर किसी के चेहरे पर रौनक थी। वर्तमान में यह साप्ताहिक ट्रेन ग्वालियर-बलरामपुर से गोंडा के बीच चल रही है। अटल जी के निधन के बाद अब इस ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियोंंं को अटल जी की याद जरूर आती रहेगी।
2014 में 25 दिसम्बर को रवाना हुई थी सुशासन
लम्बे समय से नई ट्रेन की आस लगाए बैठे ग्वालियरवासियों को आखिरकार सन 2014 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस पर गोंडा जाने के लिए ट्रेन की सौगात मिली थी। 25 दिसम्बर 2014 को केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने सुशासन एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
तत्कालीन रेलमंत्री सुरेश प्रभु के कार्यकाल में बढ़ी थी ट्रेन
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म स्थली ग्वालियर से चलने वाली सुशासन एक्सप्रेस ग्वालियर से बलरामपुर तक चलने वाली पहली लम्बी दूरी की ट्रेन होगी। गोण्डा-बढऩी रेलमार्ग के ब्राडगेज हो जाने के बाद सुशासन एक्सप्रेस उनकी कर्म स्थली बलरामपुर तक चलाने का निर्णय तत्कालील रेलमंत्री सुरेश प्रभु के कार्याकाल में हुआ था। इस ट्रेन का उद्देश्य ही उनकी कर्म स्थली बलरामपुर और जन्मस्थली ग्वालियर को जोडऩे का था।
