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सहारा हॉस्पिटल पर प्रशासन की कार्यवाई के बीच ये मामला भी रहा चर्चा में

डॉ. भल्ला के सहारा अस्पताल पर चला प्रशासन का बुल्डोजर

सहारा हॉस्पिटल पर प्रशासन की कार्यवाई के बीच ये मामला भी रहा चर्चा में

स्थगन के बाद अदालत में डटे रहे प्रशासनिक अधिकारी, अस्पताल कराया खाली, मरीजों को किया शिफ्ट, अब आज होगी सुनवाई

ग्वालियर, न.सं.। शहर के जाने माने चिकित्सक डॉ. ए.एस. भल्ला के बसंत बिहार स्थित अस्पताल पर शुक्रवार की सुबह प्रशासनिक अमले ने जेसीबी मशीन लगा कर तोडफ़ोड़ शुरू कर दी, किन्तु कुछ ही देर बाद पता लगा कि निचली अदालत से स्थगन है तो कार्रवाई रोक स्थगन हटवाने प्रशासनिक अधिकारी न्यायालय जा पहुंचे। किन्तु न्यायालय ने सुनवाई शनिवार तक के लिए टाल दी है। इस बीच प्रशासन एवं स्वास्थ्य अमले ने मरीजों की लिखा पड़ी कर दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करा दिया। वहीं अस्पताल के सामान को स्टे्रचरों पर रख कर बाहर निकाल कर अन्य जगह रखावा दिया। इस मामले में तीन बातें उभर कर आई हैं, जिसमें पहली बात डॉ. भल्ला द्वारा कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की खास अर्चना डालमिया के खिलाफ एक वर्ष पूर्व तीन करोड़ दस लाख रूपए की धोकाधड़ी का मामला दर्ज कराना, दूसरी बात प्रशासनिक अधिकारियों का विरोध करना एवं तीसरी अपने पड़ोसी कांग्रेस नेता की भूमी पर बिना अनुमति अस्पताल का विस्तार करना सामने आ रहा है। इन्हीं बजहों से कांग्रेस की सरकार ने भाजपा शासनकाल में मप्र अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य डॉ. भल्ला को निशाने पर लिया है।

जानकारी के अनुसार शुक्रवार की सुबह अचानक प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना मिली कि आज डॉ. भल्ला का अस्पताल तोडऩा है, इसके लिए अधिकारियों के साथ मदाखलत अमले और भारी पुलिस बल को क्षेत्रीय कार्यालय क्रमांक-13 पर एकत्रित होने के निर्देश मिले। इस पर 11.45 बजे एडीएम किशोर कन्याल दल बल के साथ पहुंचे और अस्पताल के अंदर घुस कर मरीजों के परिजनों को बाहर करना शुरू कर दिया।

इस पर अस्पताल के स्टॉफ ने विरोध किया, लेकिन पुलिस बल ने उन्हें बाहर खदेड़ दिया। इसके मुख्य द्वार तीन जेसीबी और छत पर हथोड़े से प्रहार किए जाने लगे। लगभग सबा डेढ़ घंटे की तुडाई में अस्पताल के चेहरे को तहस नहस कर दिया गया। इस बीच डॉ. भल्ला की ओर से निचली अदालत का स्थगन आदेश अधिकारियों को दिखाया गया, जिसमें पांच दिसम्बर तक के स्थगन को 16 दिसम्बर तक बढ़ाने की बात कही गई। इसके साथ ही डॉ. भल्ला उच्च न्यायाल पहंचे और याचिका दायर की। न्यायालय ने सुनवाई करते हुए डॉ. भल्ला को जिला न्यायालय में ही जाने की बात कही। इसके बाद आनन-फानन में डॉ. भल्ला जिला न्यायालय पहुंचे और तत्काल सुनवाई के लिए आवेदन दिया। इधर जिला न्यायालय में सुनवाई चलती रही और उधर प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल को खाली करा लिया। लेकिन न्यायालय ने कोई फेसला न देते हुए अगली सुनवाई शनिवार को नियत की है। इसी के चलते अब 7 दिसम्बर को सुनवाई के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। हालांकि देर शाम तक अस्पताल प्रबंधन ने प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में खाली कर दिया।

मंजीत भल्ला पर प्रकरण दर्ज

महाराजपुरा थाना क्षेत्र स्थित गिरगांव के पीछे ग्राम खेरिया मिर्धा में मंजीत भल्ला पत्नी डॉ. एएस भल्ला द्वारा कॉलोनी काटी जा रही थी। उक्त कॉलोनी की अनुमति मंजीत ने नगर निगम से नहीं ली थी। नगर निगम ने मंजीत भल्ला को नोटिस जारी किया था। जांच पड़ताल के बाद भवन अधिकारी ब्रजकिशोर त्यागी के आवदेन पर मंजीत भल्ला के विरूद्ध 1956 की धारा 292 ग के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।

जब विद्युतकर्मी का हाथ पकड़ा और जेसीबी के सामने हुई खड़ी नर्स

तुडाई के लिए जैसे ही जेसीबी अस्पताल के मुख्य द्वार पर पहुंची तो अस्पताल की एक नर्स जेसीबी के सामने ही खड़ी हो गई। इतना ही नहीं स्टॉफ ने आरोप लगाए कि अधिकारी आते हैं और बिना पैसे दिए उपचार कराते हैं। इसी तरह एक नर्स ने तो बिजली का कनेक्शन काट रहे विद्युत कर्मी का ही हाथ पकड़ लिया, इसके बाद पुलिस बल ने उन्हें पकड़ कर बाहर कर दिया।

कांग्रेस नेता परिहार बोले भल्ला मेरे किराएदार, मामला न्यायालय में

इस मामले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता बृजमोहन परिहार ने बताया कि डॉ. भल्ला मेरे मित्र हैं और जयारोग्य से नौकरी छोडऩे के बाद वर्ष 1996 में उन्होंने मुझसे जमीन मांगी तो उस समय हमने उन्हें रहने के लिए जमीन दे दी। इसके बाद उन्होंने अस्पताल का विस्तार कर लिया। जगह खाली कराने का मामला उच्च न्यायालय में चल रहा है।

कार्यवाई के बीच ये मामला रहा चर्चा में

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की पूर्व सचिव और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था दिल्ली पब्लिक स्कूल डीपीएस की अध्यक्ष रह चुकीं अर्चना डालमिया, सचिव एवं दिल्ली नगर निगम में विपक्ष के नेता अभिषेक दत्त सहित सात लोगों के खिलाफ डीपीएस रायरू के संचालक डॉ. ए.एस भल्ला ने 9 अक्टूबर 2018 को 3 करोड़ 10 लाख रूपए की धोखाधड़ी का मामला पुरानी छावनी थाने में दर्ज कराया था। डॉ. भल्ला ने अपनी शिकायत में कहा था कि अर्चना डालमिया सहित अन्य लोगों ने 2011 से 2018 के बीच डीपीएस के बैंक खातों से गड़बड़ी कर पैसे व्यक्तिगत हित में अपने खाते में ट्रांसफर किए थे। इस पर पुलिस ने जांच कर अर्चना डालमिया, अभिषेक दत्त के अलावा अभिषेक की पत्नी आयशा दत्त, सुरेन्द्र, प्रीतिसिंह, हरप्रीत सिंह सभी निवासी दिल्ली और दीपिका अरोरा निवासी ग्वालियर के विरुद्ध धारा 420, 406, 467,468, 471 के तहत मामला दर्ज किया था।

इन्हें किया शिफ्ट

अस्पताल के आईसीयू में तीन मरीज 83 वर्षीय अलादीन बाबा निवासी बहोड़ापुर, 20 वर्षीय प्रेम सिंह सिकरवार निवासी कैलारस एवं सतेन्द्र सिंह परमार निवाड़ी निवासी भर्ती थे। जबकि कैजुअल्टी में 45 वर्षीय जबर सिंह जालौन, 19 वर्षीय लोकेन्द्र राजपूत उदगांव, 35 वर्षीय स्वरूप सिंह निवासी पिरोना जालौन, 44 वर्षीय शीता यादव दतिया भर्ती थे। जबकि सामान्य वार्ड में 16 वर्षीय हिमांशु मिश्रा मेहरोनी ललितपुर, 45 वर्षीय बोनी बाई छतरपुर, 25 वर्षीय सोमवती महोबा, 49 वर्षीय रामसिंह परिहार शिवपुरी, 42 वर्षीय द्रोपति पत्नी कमलापति निवासी झांसी मुऊरानीपुर, 29 वर्षीय नेहा दीक्षित झांसी, 35 वर्षीय भूप सिंह निवासी इटावा, 22 वर्षीय आकाश सिंह निवासी भिण्ड एवं 28 वर्षीय रेशुराम मुरैना निवासी भर्ती थे। इसमें से अधिकांश मरीज निजी अस्पताल में पहुंचे, जबकि कई को जयारोग्य में शिफ्ट किया गया।

यह लड़ाई कांग्रेस विरुद्ध भाजपा: डॉ. भल्ला

प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई पर डॉ. भल्ला का कहना है कि यह सीधे-सीधे कांग्रेस विरूद्ध भाजपा की लड़ाई है। चुंकी मैंने डीपीएस से जुडी रहीं अर्चना डालमिया के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण कराया है, जो कि कांग्रेस के बड़े नेताओं के सम्पर्क में हैं, इसलिए उन्होंने यह कार्रवाई कराई है। साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ बोले जाने के कारण अधिकारी मुझ से खफा हैं, जहां तक मेरे पड़ोसी बृजमोहन परिहार की बात है तो वर्ष 2003 से 35 हजार किराया अदालत में जमा किया जा रहा है। यह विवाद उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। प्रशासन ने हिटलसाही तरीके से तोडफ़ोड़ की है।

सरकारी अधिवक्ता की संदेहास्पद भूमिका

इस मामले में बेहद गम्भीर बात यह है कि जब 30 नवम्बर को पन्द्रहवे व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-1 सुनील अहिरवार के यहां डॉ. भल्ला की ओर से स्थगन आवेदन लगाया गया तब शासकीय अधिवक्ता विजय शर्मा ने न्यायालय से अपना वकालतनामा लगाने समय मांगा। फिर 5 दिसम्बर को भी श्री शर्मा द्वारा यही बात करते हुए कोई जबाव पेश नहीं किया गया। जिस कारण नगर निगम द्वारा शुक्रवार को अधिवक्ता संजय कुशवाह के जरिए जबाव पेश किया गया।

परिजनों ने किया हंगामा

तोडफ़ोड़ देख मरीजों के परिजनों में भी अफरा-तफरी मच गई। परिजनों का कहना था कि ऐसी स्थिति में मरीज को कहां लेकर जाए। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करते हुए हंगामा भी किया। परिजनों का कहना था कि जब अस्पताल संचालक को पता था कि अस्पताल में कार्रवाई होने वाली है, उसके बाद भी अस्पताल में मरीजों को भर्ती क्यों किया गया।

अस्पताल का पंजीयन भी निरस्त

इधर अस्पताल को खाली कराने के बाद प्रशासन के निर्देश पर सहारा अस्पताल का पंजीयन निरस्त कर दिया गया। इसी के चलते सीएमएचओ डॉ. मृदुल सक्सेना द्वारा देर शाम पंजीयन निरस्त के संबंध में आदेश भी जारी किए गए।

इनका कहना है

''एसडीएम एवं नगर निगम द्वारा दिए गए नोटिस के बाद डॉ. भल्ला के अस्पताल पर तोडफ़ोड़ की गई है, अन्य अस्पतालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।''

किशोर कन्याल, एडीएम

Updated : 2019-12-07T06:45:43+05:30
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