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नए टर्फ पर फिर से शुरु होंगे अभ्यास, राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट होंगे आयोजित

14 को होना है उद्घाटन, 6 करोड़ रूपए की लागत से तैयार हुआ रेलवे हॉकी स्टेडियम

नए टर्फ पर फिर से शुरु होंगे अभ्यास, राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट होंगे आयोजित
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ग्वालियर,न.सं.। रेलवे हाकी इंस्टीट्यूट में 6 करोड़ रुपये की लागत से नवीन टर्फ बिछाने और सिविल वर्क का काम पूरा हो गया है। पिछले तीन वर्षों से हाकी की नर्सरी कहलाने वाले ग्वालियर के पुरुष खिलाड़ी अभ्यास के लिए परेशान हो रहे थे। अब इस नए टर्फ पर प्रैक्टिस शुरू होने के साथ ही राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट भी आयोजित हो सकेंगे। इस हाकी इंस्टीट्यूट का उद्घाटन वर्ष 1987 में तत्कालीन रेल मंत्री स्व. माधवराव सिंधिया ने किया था। यह मैदान वर्ष 1987 में भारत-पाकिस्तान मैच का गवाह भी रह चुका है। इस स्टेडियम का लोकार्पण 14 अगस्त को किया जाएगा। इसके लिए रेलवे अधिकारियों ने तैयारी भी शुरु कर दी है।

देश को कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी देने वाले रेलवे हाकी स्टेडियम में पिछले तीन वर्षों से खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर पा रहे थे, क्योंकि इसमें बिछा टर्फ पूरी तरह से खराब हो चुका था। जुलाई 2019 में नए टर्फ व सिविल वर्क के लिए रेलवे ने टेंडर किया था, लेकिन वर्ष 2020 में कोरोना लॉकडाउन के चलते इसका कार्य लेट होता चला गया। टोक्यो ओलंपिक 2020 में हाकी में देश की पुरुष व महिला टीमों के उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद खिलाडिय़ों में हाकी के लिए दीवानगी बढ़ी, लेकिन सामान्य पुरुष खिलाडिय़ों के अभ्यास के लिए रेलवे हाकी स्टेडियम में टर्फ ही उपलब्ध नहीं था। हाकी की महिला खिलाडिय़ों के लिए राज्य महिला हाकी अकादमी कंपू उपलब्ध है और लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान में भी टर्फ मौजूद है, लेकिन ये सिर्फ वहां बढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए ही उपलब्ध होता है। ऐसे में अन्य हाकी खिलाडिय़ों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब उनका इंतजार खत्म हो चुका है। 14 अगस्त को अधिकृत रूप से इस नए टर्फ का उद्घाटन कराया जाएगा। इसके बाद सिंधिया गोल्ड कप जैसी राष्ट्रीय स्तर और रेलवे की क्षेत्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए ये मैदान उपलब्ध होगा।

दो साल देरी से हुआ काम

जुलाई 2019 में लगभग छह करोड़ रुपए की राशि से नए टर्फ सहित दर्शक दीर्घा में नए टायलेट ब्लाक तैयार करने, पवेलियन की बिल्डिंग में हास्टल, चेंजिंग रूम, रेस्ट रूम आदि सिविल वर्क का टेंडर हुआ। यह काम 2020 में पूरा होना था, लेकिन पहले वर्क आर्डर में देरी और फिर कोरोना के कारण कार्य काम दो साल पिछड़ता चला गया। हालांकि यहां बिछे टर्फ की आयु तो वर्ष 2013 में ही समाप्त हो गई थी, क्योंकि आमतौर पर कोई भी टर्फ बेहतर रखरखाव के चलते अधिकतम सात वर्ष तक ही चलता है।

ये हुए हैं कार्य

-मैदान के ड्रेनेज सिस्टम को बदला गया है।

--मैदान में छिडक़ाव के लिए नया स्प्रिंकल सिस्टम लगाया गया है।

-पवेलियन का जीर्णोद्धार किया गया है।

-मैदान की जालियों को भी बदला गया है।

-बिजली की नई लाइन डालने के साथ टायलेट और फर्श में नई टाइल्स लगाई गई हैं।

-दरवाजे और खिड़कियों के कांच बदले गए हैं।

-पूरी इमारत पर नए रंग के साथ ही आधुनिक गोल्ड पोस्ट भी लगाए गए हैं।

-35 साल बाद पूरे इंस्टीट्यूट के उन्नयन का कार्य हुआ है।

इनका कहना है

रेलवे हाकी इंस्टीट्यूट के मैदान का कार्य पूरा हो चुका है। जल्द ही इसका उद्घाटन किया जाएगा।

मनोज कुमार सिंह

जनसंपर्क अधिकारी

रेल मंडल झांसी

Updated : 12 Aug 2022 6:54 AM GMT
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स्वदेश वेब डेस्क

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