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डीपीएस स्कूल विवाद : निरीक्षक ने डालमिया को दिया नोटिस तो उन्होंने करा दिया तबादला, डॉ. भल्ला को मिली थी धमकी

- भल्ला की प्राथमिकी पर लगाई खात्मा रिपोर्ट

डीपीएस स्कूल विवाद : निरीक्षक ने डालमिया को दिया नोटिस तो उन्होंने करा दिया तबादला, डॉ. भल्ला को मिली थी धमकी

ग्वालियर, विशेष प्रतिनिधि। शहर में इस समय जाने-माने ईएनटी सर्जन डॉ एएस भल्ला पर जिस तरह से जिला प्रशासन, पुलिस और नगर निगम कहर ढा रहा है, उससे स्वत: ही अनुमान लगाया जा सकता है कि इसके पीछे किसी बड़ी हस्ती का हाथ है। इस मामले की पड़ताल करने पर पता चला कि डॉ एएस भल्ला द्वारा पुरानी छावनी थाने में डीपीएस मामले में अर्चना डालमिया सहित आधा दर्जन लोगों के खिलाफ 9 अक्टूबर 2018 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। चूंकि अर्चना डालमिया गांधी परिवार से जुड़े होने के कारण बेहद ताकतवर हैं, इसलिए प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद 28 मार्च 2019 को पुरानी छावनी थाने के अपराध क्रमांक 284/18 में दर्ज प्रकरण में पुलिस अधीक्षक ने खात्मा रिपोर्ट लगा दी। इसमें सबसे ज्यादा मजेदार बात यह है कि डॉ भल्ला की ओर से अन्य विभागों में की गई शिकायतों के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की थी, जिसपर जांचकर्ता निरीक्षक द्वारा सभी पक्षों को नोटिस जारी किए गए थे। जैसे ही यह नोटिस नई दिल्ली में अर्चना डालमिया के पास पहुंचा तो उनकी ओर से उसे लेने से इंकार कर दिया गया। इसके बाद भोपाल में उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारियों ने उस निरीक्षक को ग्वालियर से चलता कर पीएचक्यू भोपाल पहुंचा दिया। जिससे अब इस मामले की फाइल ग्वालियर के पुलिस अधिकारियों के यहां धूल खा रही है, उस फाइल को खोलने में भी अधिकारियों के हाथ कांप रहे हैं।

झांसी रोड थाने में भी दर्ज है मामला

डीपीएस स्कूल के विवाद के चलते जनवरी 2019 में डॉ भल्ला को टेलीफोन पर धमकी दी गई थी, जिसकी शिकायत उन्होंने पुलिस से की तो 18 फरवरी 2019 को झांसी रोड थाने में फारुक अहमद के नाम प्राथमिकी दर्ज की गई। जबकि डॉ. भल्ला द्वारा अर्चना डालमिया, अभिषेक दत्त, साजिद पांडे आदि के नाम भी लिखाए गए थे। इसके अलावा बारामूला में डालमिया की ओर से डॉ भल्ला के खिलाफ मानहानि का दावा लगाकर उन्हें नोटिस जारी कराया गया। किंतु वे इस मामले की सुनवाई में इस डर से नहीं जा रहे कि वहां उनके साथ कोई अनहोनी घटना हो सकती है।

पद से हटाने दिया नोटिस

प्रदेश के पिछड़ा वर्ग अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा मप्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सहित चार सदस्यों की नियुक्ति की गई थी। जिसमें अध्यक्ष नियाज मोहम्मद एवं चार सदस्यों में डॉ एएस भल्ला को 2 जनवरी 2017 को सदस्य नियुक्त करते हुए 3 जून 2017 को अलग से आदेश जारी कर राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया। यह नियुक्ति तीन साल के लिए है।किंतु इसके पहले ही जून 2019 में अध्यक्ष सहित सदस्यों को पद का दुरुपयोग का कारण बताते हुए नोटिस जारी किए गए हैं। जिसके खिलाफ डॉ भल्ला ने न्यायालय की शरण ली है।

पत्नी को भी लिया लपेटे में

प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के निशाने पर डॉ भल्ला हैं, किंतु इस समय जो कार्यवाही की जा रही है, उसके लपेटे में उनकी पत्नी मनजीत कौर भल्ला भी आ गई हैं। खेरियामिर्धा में अवैध कॉलोनी को लेकर मनजीत कौर भल्ला के खिलाफ महाराजपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। वहीं रविवार को छुट्टी के दिन उनके नाम से संचालित सोफिया महाविद्यालय में तोडफ़ोड़ की गई।


Updated : 2019-12-10T06:31:15+05:30
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