सावधान : ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर जाएँ तो ना वहां की घड़ी देखें ना एनाउंसमेंट पर ध्यान दें, छूट जाएगी आपकी ट्रेन

ग्वालियर/स्वदेश वेब डेस्क। वीवीआईपी की पूरी सुविधाओं का ध्यान रखने और उनके लिए नियमों को भी ताक पर रखने वाले ग्वालियर रेलवे स्टेशन के अधिकारी जनता के प्रति अपनी जवाबदेही पर पूरी तरह लापरवाह बने रहते हैं। जनता को होने वाली परेशानी से इनको कोई सरोकार नहीं है। जिसके एक नहीं कई उदाहरण हैं जो रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को लेकर उदासीन होने का प्रमाण देते हैं।
ताजा उदाहरण शनिवार का है। यहाँ ग्वालियर के रेलवे अधिकारियों की एक नहीं दो बड़ी गलतियां या यूँ कहें लापरवाही सामने आईं । पहली ये कि रेलवे स्टेशन के अलग अलग प्लेटफॉर्म्स पर लगीं डिजिटल क्लॉक अलग अलग समय बता रही थी। भारतीय समय अनुसार ग्वालियर में जब 15:27 का समय हो रहा था तब प्लेटफॉर्म नंबर दो-तीन की डिजिटल क्लॉक में 14 बजकर 49 मिनट हो रहे थे यानि ये घड़ी इस्लामाबाद, कराची, ताशकंद का समय बता रही थी, और प्लेटफॉर्म नंबर चार की डिजिटल क्लॉक में 16 बजकर 22 मिनट हो रहे थे जो की यंगून (रंगून, म्यांमार) का समय बता रही थी। समय का ये अंतर कई घंटों से ऐसा ही चल रहा है लेकिन रेलवे अधिकारियों ने इस पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं समझी।
दूसरा उदाहरण तो लापरवाही की पूरी हद पार कर गया। इसमें उद्घोषक ने नंबर अप रूट की ट्रेन का बताया और डिस्प्ले भी अप ट्रेन का ही हो रहा था लेकिन एनाउंसमेंट डाउन रूट की ट्रेन का किया जा रहा था। हुआ यूँ कि दिन में 12 बजकर 40 मिनट पर हजरत निजामुद्दीन से चलकर दुर्ग तक जाने वाली 22868 हमसफर एक्सप्रेस ग्वालियर के एक नंबर प्लेटफॉर्म पर आने वाली थी। लेकिन अनाउंसमेंट में कहा जा रहा था कि दुर्ग से चलकर भोपाल, झाँसी के रास्ते हजरत निजामुद्दीन को जाने वाली हमसफर एक्सप्रेस शीघ्र ही प्लेटफॉर्म नंबर एक पर आने वाली है जबकि ये गाड़ी जिसका एनाउंमेंट किया जा रहा था उसका नंबर 22867 है और ये रात को 23:10 पर आती है और प्लेटफॉर्म नंबर दो पर आती है। जबकि एनाउंसमेंट हजरत निजामुद्दीन से चलकर दुर्ग जाने वाली ट्रेन का होना चाहिए था। बड़ी बात ये है कि ये गलत एनाउंसमेंट 13 बजकर 40 मिनट से 13 बजकर 48 मिनट तक एक बार नहीं कई बार हुआ लेकिन रेलवे के किसी अधिकारी या कर्मचारी का ध्यान इसपर नहीं गया। एक जागरूक यात्री मनोज गुरवानी ने जब इसे सुना तो वे एनाउंसमेंट ऑफिस में गए और इसे सही करवाया। वरना लोग समझ ही नहीं पा रहे थे कि ट्रेन का नंबर सही डिस्प्ले है या एनाउंस किया जा रहा रूट।
