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साल में एक बार खुलता है ग्वालियर स्थित कार्तिकेय मंदिर

मध्यप्रदेश में सिर्फ एक ही मंदिर

साल में एक बार खुलता है ग्वालियर स्थित कार्तिकेय मंदिर
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ग्वालियर/स्वदेश वेब डेस्क। आपने शायद ही कभी सुना हो कि किसी देवता का मंदिर वर्ष में महज एक दिन के लिए खुलता है। ऐसा मंदिर ग्वालियर में स्थित है। ग्वालियर में भगवान कार्तिकेय जी का यह मंदिर साल में केवल एक ही दिन के लिए खुलता है। उस दिन संभाग के लाखों लोग कार्तिकेय भगवान के दर्शन कर अपने मन की मुरादें पूरी करने के लिए यहां लाइन लगाते हैं। इसके पीछे भी बड़ी पौराणिक कथा बताई जाती है।

भगवान कार्तिकेय मंदिर जो कि जीवाजी गंज में स्थित है। शुक्रवार को सुबह ब्रम्ह मुहूर्त में ही खोल दिया गया था। तबसे लेकर देर शाम तक लाखों श्रृद्धालु मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए आ चुके थे। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि उनके यहां पिछले 5 पीढ़ियों से इस मंदिर की पूजा हो रही है। करीब 400 से 500 वर्ष पुराना यह मंदिर ग्वालियर-चंबल संभाग ही नहीं पूरे मप्र में इकलौता है। कार्तिकेय मंदिर केवल भगवान कार्तिकेय के जन्मदिवस अर्थात् कार्तिक पूर्णिमा को ही खोला जाता है। इसी दिन साल में एक बार इनकी पूजा की जाती है। बताते हैं कि श्रृद्धालुओं का सुबह 4 बजे से रात 12 बजे तक तांता नहीं टूटता। इस भीड़ को देखते हुए यहां पुलिस को भी खासी मशक्कत करनी पड़ती है।


एक ही दिन मंदिर खुलने के पीछे यह है कहानी

पुजारी जमुना प्रसाद शर्मा कहते हैं कि कार्तिकेय भगवान के एक दिन मंदिर खुलने की कथा पुराणों में उनके परिक्रमा वाले संदर्भ से जुड़ी है। एक बार भगवान कार्तिकेय और श्री गणेश प्रथम पूज्य बनने के लिए तीनों लोकों की परिक्रमा के लिए निकले थे। कार्तिकेय जी का वाहन मयूर होने के चलते उन्हें अभिमान आ गया था कि वह जीत ही जाएंगे। उनके सामने श्री गणेश अपने मूषक से उनकी बराबरी कर ही नहीं सकते। इस पर गणेश जी ने बुद्धि का प्रयोग करते हुए मां और पिता को धरती और आकाश माना था और तीसरे लोक के स्वामी स्वयं शिव वहां विराजमान थे। इस प्रकार महज कुछ क्षणों में ही उनकी तीनों लोकों की परिक्रमा पूर्ण हो गई थी।

नारद से समाचार सुन हो गया था मन खिन्न

उधर इस बात की सूचना लेकर नारद जी कार्तिकेय जी के पास जा पहुंचे। इस समाचार को सुनने के बाद कार्तिकेय मन खिन्न हो गया और वह पर्वत पर बैठकर तपस्या करने लगे। जब इस बात की जानकारी भगवान भोलेनाथ को हुई तो वह मां पार्वती के साथ उन्हें मनाने पहुंचे।

भगवान शंकर और मां पार्वती को दिया था श्राप

उन्हें देखते ही भगवान कार्तिकेय ने श्राप दे दिया कि जो महिला हमारे दर्शन करेंगी वह 7 जन्मों तक विधवा हो जाएगी। और जो पुरुष हमारे दर्शन करेगा वह 7 जन्मों तक नरक भोगेगा। इस पर भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती ने उन्हें समझाया। तब उन्होंने केवल कार्तिक पूर्णिमा पर अपने दर्शन की अनुमति सभी को देते हुए उसे वरदान में बदल दिया। कहा कि जो भी इस दिन मेरे दर्शन करेगा उस मनुष्य के सारे मनोरथ पूर्ण होंगे। तब से कार्तिक पूर्णिमा को ही भगवान कार्तिकेय जी के दर्शन होते हैं।

Updated : 2018-11-24T01:52:07+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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