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कैंथा घाटी : स्थानीय लोगों के साथ मुरैना के माफिया भी कर रहे अवैध खनन

कैंथा घाटी को भी लगी खनन माफिया की नजर

कैंथा घाटी : स्थानीय लोगों के साथ मुरैना के माफिया भी कर रहे अवैध खनन

ग्वालियर, न.सं.। वन मंडल ग्वालियर के घाटीगांव उत्तर, घाटीगांव गेमरेंज, तिघरा गेमरेंज वन परिक्षेत्रों में तो लम्बे समय से खनन माफिया सक्रिय हैं और आए दिन अवैध खनन के मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन अब ग्वालियर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत कैंथा घाटी से भी अवैध खनन की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि विभागीय अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं, लेकिन सूत्रों की मानें तो कैंथा घाटी में स्थानीय माफिया के अलावा पड़ोसी जिला मुरैना के खनन माफिया की भी सक्रियता बढ़ गई है और यहां फर्शी पत्थर का बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है।

यहां बता दें कि वन मंडल ग्वालियर में जब से वन मंडल अधिकारी अभिनव पल्लव आए हैं, तब से अवैध खनन सहित अन्य वन अपराधों को रोकने की दृष्टि से संवेदनशील वन क्षेत्रों में प्रतिदिन सामूहिक गश्त कराया जा रहा है। बावजूद इसके आए दिन अवैध खनन के मामने सामने आ रहे हैं। हालांकि वन विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि पांच नवम्बर से प्रारंभ किए गए सामूहिक गश्त के बाद से अवैध खनन सहित अन्य वन अपराधों में काफी कमी आई है, लेकिन वन विभाग से ही जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि वन मंडल ग्वालियर के खनन क्षेत्रों में माफिया की सक्रियता अभी भी बनी हुई है और आए दिन से 10 से 15 ट्रैक्टर-ट्रॉली फर्शी पत्थर निकाला जा रहा है। अवैध फर्शी पत्थर से भरे अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रॉॅली लखनपुरा के जंगल में पहुंचते हैं, जहां से कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉली पुरानी छावनी ग्वालियर तो कुछ मुरैना जिले के बामौर में ले जाए जाते हैं, जहां पत्थर की फड़ों पर इस फर्शी पत्थर को ठिकाने लगाया जाता है। सूत्रों का दावा है कि वन विभाग, खनिज विभाग और जिला प्रशासन पुरानी छावनी और बामौर में संचालित पत्थर की फड़ों की जांच करे तो बड़ा खुलासा हो सकता है, लेकिन मिलीभगत के चलते लम्बे समय से पत्थर के इन फड़ों की जांच ही नहीं की गई है। इसी का नतीजा है कि खनन माफिया जंगलों में लगातार पैर पसार रहे हैं।

वन विभाग से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि ग्वालियर वन परिक्षेत्र की बीलपुरा वन चौकी के अंतर्गत तालपुरा बीट में आने वाली कैंथा घाटी में अवैध खनन कई सालों से बंद था, लेकिन पिछले करीब तीन-चार माह से यहां भी खनन माफिया की सक्रियता बढ़ गई है। यहां स्थानीय खनन माफिया के साथ-साथ मुरैना जिले के खनन माफिया भी फर्शी पत्थर का अवैध खनन कर रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि इसकी जानकारी वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों को न हो। सूत्रों के अनुसार अवैध खनन की पूरी जानकारी होने के बाद भी विभागीय अधिकारी जानबूझकर अनजान बने हुए हैं। इसी का फायदा खनन माफिया उठा रहे हैं, जिससे जंगलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

क्या बोले अधिकारी

इस संबंध में स्वदेश प्रतिनिधि ने वन मंडल अधिकारी अभिनव पल्लव से उनके दूरभाष पर संपर्क किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। जब इस संबंध में ग्वालियर वन परिक्षेत्र अधिकारी सुखदेव शर्मा से दूरभाष पर बात की तो उन्होंने कहा कि कैंथा घाटी में अवैध खनन की खबर नहीं है, लेकिन फिर भी हम मौके पर वन अमले को भेजकर दिखवा लेंगे।

Updated : 2019-12-23T05:46:11+05:30
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