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ग्वालियर मेला : मधुबनी साड़ी, बाइस्कोप का खेल और आराम कुर्सी कर रही हैं सैलानियों को आकर्षित

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ग्वालियर। व्यापार मेले में जहाँ एक ओर सिने मल्टीप्लेक्स लगा हुआ हैं, जिसकी आराम देह कुर्सियों पर बड़े परदे पर फिल्म को देखने का लोग आनंद ले रहें हैं। वहीँ दूसरी ओर शिल्प बाजार ,में बाइस्कोप का खेल छोटे बच्चो को आकर्षित कर रहा हैं. मेला घूमने आ रहें छोटे बच्चे जोकि अक्सर मोबाईल, टीवी ओर आधुनिक मल्टीप्लेक्स को जानते हैं। वह दादा नाना के जमाने के इस छोटे थियेटर को देखने के लिए उमड़ रहें हैं। इसके साथ ही मधुबनी साड़ियां, जुट के बैग्स ओर आराम कुर्सी खींच रही हैं लोगो का अपनी ओर ध्यान।




बाइस्कोप की दुनिया

मेले में प्रेमचंद बाइस्कोप लेकर आये हैं।वह दस रूपए में लोगो को गेटवे ऑफ़ इंडिया से लेकर इंडिया गेट, ताज महल, लाल किला, महाराज बड़ा ओर जय विलास पैलेस दिखा रहें हैं। वहीँ अभिनेता शशि कपूर, दिलीप कुमार से लेकर अमिताभ, धर्मेंद्र, सलमान सहित कई अभिनेत्रियों से लोगों को मिला रहे हैं। इसके साथ ही बच्चो के फेवरिट कार्टून कैरेक्टर नोबिता ओर डोरेमोन का शो भी बच्चो को दिखा रहे हैं। प्रेमचंद ने बताया की वह पिछले दस सालो से मेले में बाइस्कोप लेकर आ रहे हैं। छोटे बच्चे हमेशा ही इसकी और सबसे ज्यादा आकर्षित होते हैं।




आरामपसंद लोगो को भा रहीं आराम कुर्सी

दिनभर काम करने के बाद हरेक का मन आराम करने का होता हैं। अगर बात किसी छुट्टी वाले दिन की होतो आराम करने की चाह ओर बढ़ जाती हैं। ऐसी ही एक आराम देने वाली कुर्सी मेले में लोगों के मन भा रहीं हैं, शिल्प बाजार में आने वाले सैलानी इस कुर्सी की ओर खींचे चले जा रहे हैं। व्यापारी ने बताया की सागौन की लकड़ी से बनी इस कुर्सी को दादी माँ कुर्सी कहते हैं। उन्होंने बताया की पुरानी फिल्मो में दादी माँ को इसी कुर्सी पर बैठा हुआ दिखाया जाता था। इसकी कीमत 4500 रूपए हैं। यह आराम पसंद लोगो की पहली पसंद होती हैं।




महिलाओ के वार्डरॉब की शान बन रहीं हैं मधुबनी साड़ी

मौका किसी की शादी में जाने का हो या सादा पार्टी में महिलाये कपड़ो का चयन उत्सव ओर त्यौहार के हिसाब से करती हैं। उनके वार्डरोब में अवसर ओर उत्सव एवं त्योहारों के हिसाब से पहनने के लिए अलग अलग कई साड़ियां नजर आती हैं। इस बार मेले में आई मधुबनी साड़ी भी महिलाओ के वार्डरोब की शान बन रहीं हैं। नालंदा बिहार से आये व्यापारी नकुल ने बताया की मधुबनी साड़ी पर हाथो से पूरी कढ़ाई ओर डिजाइन निकाली जाती हैं। यह साड़ियां 8500 से लेकर 10000 तक की कीमत में उपलब्ध हैं।




कुस का हेट और चटाई कम गद्दा

घरो में पूजा हो या कोई धार्मिक अनुष्ठान उसके लिए कुस के आसन और चटाई को बहुत ही शुभ मना जाता हैं। हम ज्यादातर बाजारों में कुस के बने आसान ही देखते हैं लेकिन व्यापर मेले में कुस के आसान के साथ कुस से बने हैट, चटाई, बैग्स और गद्दा आकर्षण का केंद्र बना हुआ हैं। कोलकाता से आये व्यापारी राम चंद्रा ने बताया की वह मेले में पिछले सात सालो से आ रहे हैं। इस बार वह युवाओ के लिए कुस से बानी हेट एवं चटाई गद्दा लेकर आये हैं सर्दियों में इसे गद्दे के रूप में उपयोग कर सकते हैं, गर्मियों में यह चटाई की तरह उपयोग में आती हैं।



Updated : 2020-01-18T20:12:55+05:30
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Prashant Parihar

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