यूजीसी ने स्थगित की शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया, मंसूबों पर फिरा पानी

यूजीसी ने स्थगित की शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया, मंसूबों पर फिरा पानी
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केंद्रीय विवि सहित प्रादेशिक विवि नहीं कर रहे थे भर्ती नियमों का पालन


जीवाजी विवि में इसी महीने होने थे साक्षात्कार

ग्वालियरविश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का पालन सख्ती से न होने की वजह से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देशभर के सभी विवि में मौजूदा समय में चल रही भर्ती प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है। इससे जीवाजी विवि की भी भर्ती प्रक्रिया स्थगित हो गई है। यूजीसी के इस सख्त आदेश के बाद विवि के उन अधिकारियों के मंसूबों पर पानी फिर गया है, जो अपनों की नियुक्ति कर चीन्ह-चीन्ह कर रेवड़ी बांटना चाहते थे।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों सहित प्रादेशिक विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का पूरी तरीके से पालन नहीं हो रहा था। एक-एक पद का हवाला देकर आरक्षण नियमों की अनदेखी की गई। इसे लेकर कुछ लोग न्यायालय गए। न्यायालय ने समय-समय पर नियमों का पालन करने के दिशा-निर्देश दिए। उसी तारतम्य में विवि अनुदान आयोग ने वर्तमान समय में केंद्रीय विवि एवं प्रादेशिक विश्वविद्यालयों में चल रही शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को हाल-फिलहाल के लिए स्थगित कर दी है। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को इस पर अमल करने के लिए कहा है। जीवाजी विवि में इसी महीने भर्ती प्रक्रिया के लिए साक्षात्कार प्रस्तावित थे और विवि के अधिकारी बहुत जल्द भर्ती करना चाहते थे, लेकिन यूजीसी के पत्र के बाद अधिकारियों के मंसूबों पर पानी फिर गया है।

जीवाजी में भी नहीं हुआ था आरक्षण का पालन

जीवाजी विवि के 17 विभागों में शैक्षणिक स्टॉफ के खाली पड़े 50 पदों को भरने की जो प्रक्रिया चल रही है उसमें भी नियमों का पालन नहीं हो रहा था। नियुक्ति के लिए 13 दिसंबर 2017 को विज्ञापन निकाला गया, जिसमें आरक्षित, अज, अजजा एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए पद चिन्हित किए गए। महिला एवं नि:शक्तों के लिए कोई पद आरक्षित नहीं किए। जबकि आरक्षण नियमों से स्पष्ट उल्लेख है कि इस श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए भी पद आरक्षित किए जाएं। यह भर्ती प्रक्रिया भी विवादों में आ गई थी और अजाक्स सहित अन्य संगठनों ने शासन-प्रशासन से शिकायत की।

एक दिन पहले एमआईटीएस की निरस्त हो चुकी है भर्ती

इससे एक दिन पहले एमआईटीएस संस्थान में एक साल पहले शुरू की गई सहायक प्राध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया था। भर्ती प्रक्रिया को लेकर अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग से शिकायत की गई थी कि भर्ती प्रक्रिया में रोस्टर नियमों का पालन नहीं हो रहा। संस्थान के डायरेक्टर ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखा, लेकिन आयोग ने उनके पक्ष को नहीं माना। आयोग की आपत्ति के बाद यह प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है।

इनका कहना है

केंद्रीय विवि सहित राज्य के विश्वविद्यालयों में मौजूदा समय में शिक्षकों की जो भर्ती प्रक्रिया चल रही है या फिर विज्ञापन निकाले गए हैं उन्हें स्थगित किया जाता है। विश्वविद्यालयों से आग्रह किया गया है कि वह फिलहाल भर्ती प्रक्रिया न करें।

-डॉ. उर्मिला देवी, संयुक्त सचिव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग

यूजीसी ने सभी केंद्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालयों में हो रही शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आगामी निर्णय तक स्थागत की है, अभी जो भी भर्ती प्रक्रिया हो रही थी इसमें अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग को प्रतिनिधित्व नहीं हो रहा था इसके लिए अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विभिन्न संगठनों द्वारा केंद्र सरकार को उचित प्रतिनिधित्व देने हेतु ज्ञापन दिए गए। जिसके बाद केंद्र सरकार ने रिव्यू याचिका माननीय सर्वोच्च न्यायालय में लगाई। इसके साथ ही अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विभिन्न संगठनों ने भी याचिका लगाई। इसको दृष्टिगत रखते हुए ये निर्णय स्वागत योग्य है। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विभिन्न संगठनों को सर्वोच्च न्यायालय पर विश्वास है कि वो अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व दिलाएगा।

-डॉ. शांतिदेव सिसौदिया, पूर्व संभागीय अध्यक्ष, अजाक्स

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