हड़ताल से चरमराईं जयारोग्य की स्वास्थ्य सेवाएं, मरीज रहे परेशान

ग्वालियर। अंचल के सबसे बड़े जयारोग्य चिकित्सालय में जूनियर चिकित्सक, नर्स व पैरामेडिकल स्टॉफ के हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। हड़ताल की वजह से दूर दराज से उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं हड़ताल के देखते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नर्स व स्टॉफ पर दबाव बनाने के लिए एस्मा लगाते हुए सामूहिक अवकाश को प्रतिबंधित कर दिया है। हालांकि अधिष्ठाता की फटकार के बाद जूनियर चिकित्सक 12 बजे के बाद काम पर लौट आए। संयुक्त मोर्चा स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन के बैनर तले नर्सेस और पैरामेडिकल स्टॉफ अपनी पांच सूत्रीय मांगों एवं सेन्ट्रल जूनियर चिकित्सक एसोसिएशन के आह्वान पर सोमवार को सुबह से ही हड़ताल पर रहे। हड़ताल के दौरान ओपीडी में सीनियर चिकित्सक भी नहीं पहुंचे।
ऑर्थोपेडिक की ओपीडी में डॉ. समीर गुप्ता के कक्ष के बाहर मरीजों की लम्बी लाइन लगी हुई थी। सुबह 11.30 बजे तक न तो जूनियर चिकित्सक का कोई पता था और न ही सीनियर चिकित्सक का। दूसरे कमरे में डॉ. सुरेन्द्र यादव मरीजों को देख रहे थे। लेकिन मरीज डॉ. गुप्ता को दिखाने पहुंचे मरीज सुबह से ही उनका इंतजार करते रहे। यही स्थिति नेत्र रोग विभाग में थी, यहां जूनियर चिकित्सक न होने के कारण मरीजों को चश्मे का नंबर ही नहीं मिल सका। जबकि प्लास्टर रूम में भी मरीजों को प्लास्टर नहीं बांधा गया। हालांकि 12 बजे के बाद जूनियर चिकित्सक काम पर लौटे और ओपीडी में पहुंचे। वहीं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सोमवार को एस्मा लगाते हुए अगले तीन महीने तक सामूहिक अवकाश पर रोक लगा दी है।
अधिष्ठाता की फटकार के बाद लगाए जिंदाबाद के नारे
जूनियर चिकित्सक जैसे ही ज्ञापन सौंप कर अधिष्ठाता कक्ष से बाहर निकले वैसे ही नर्सेस और पैरामेडिकल स्टॉफ अंदर पहुंच गए और अपनी मांगे सुनाई। इस पर अधिष्ठाता ने कहा कि आप लोग सरकार के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हो, मैं भी सरकार का एक छोटा हिस्सा हूं। आप लोग चाहते है कि आप जो बोलोगे वह एक दिन में ही हो जाए, इसमें समय लगता है। आप अपना ज्ञापन मुझे दें मैं ऊपर तक पहुंचा दूंगा। इस पर नर्सेस बाहर निकलीं और अधिष्ठाता जिंदाबाद के नारे लगाए।
टालने पड़े ऑपरेशन
जयारोग्य चिकित्सालय के आर्थोपेडिक, सर्जरी, गायनिक, नेत्र रोग विभाग सहित ट्रॉमा सेन्टर में प्रतिदिन करीब 60 ऑपरेशन होते हंै। लेकिन हड़ताल के कारण सभी ऑपरेशन टालने पड़े। इस दौरान सिर्फ इमरजेंसी में ही ऑपरेशन किए गए।
बिगड़ी जांच व्यवस्था
नर्सेस और पैरामेडिकल स्टॉफ के काम बंद करने के कारण जांच व्यवस्था भी पूरी तरह बिगड़ गई है। अस्पताल में भर्ती और ओपीडी में पहुंचे मरीजों की जांचें तक नहीं हुई। एक्सरे, अल्ट्रासाउण्ड, सेन्ट्रल पैथोलॉजी सहित अन्य विभागों में पदस्थ टेक्नीशियन न होने के कारण बंद रहीं। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस में पदस्थ राजेश पनिहार से ओपीडी में दिखा कर सेन्ट्रल पैथोलॉजी जांच कराने पहुंचे। जहां उन्हें बताया गया कि हड़ताल तक जांचे नहीं होंगी। जिस कारण वह वापस लौट गए। इसी तरह हेमा कुशवाह के पेट में बहुत दर्द हो रहा था, जिसे हड़ताल की बात कहते हुए 28 जुलाई को आने की बात कहते हुए लौटा दिया गया।
अधिष्ठाता ने कहा, मुझे पता है क्या काम करते हो
हड़ताल के दौरान जब जूनियर चिकित्सक प्रदर्शन करते हुए गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ. एसएन अयंगर के कक्ष में पहुंचे और कहा कि बीपीएल कार्डधारी मरीजों को समय पर दवाइयां, सस्ते से सस्ता भोजन उपलब्ध कराना वरिष्ठ चिकित्सकों की जिम्मेदारी है, लेकिन यह जिम्मेदारी हम जूनियर को सौंप दी जाती है और वो मरीज हम से उन्हें मिलने वाली सुविधाओं के बारे में पूछते हैं और हमे जवाब देना पड़ता है। इस पर अधिष्ठाता डॉ. अयंगर ने चिकित्सकों को फटकार लगाते हुए कहा कि आप लोग अपना काम करें, जिस मरीज को दवा नहीं मिल रही समय पर मुझे बताओ, आप लोग क्या काम करते है। मुझे इसकी पूरी जानकारी है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि न्यायालय के आदेश हैं आप लोग इस तरह हड़ताल पर नहीं जा सकते, अगर किसी मरीज को कुछ होता है तो आप लोगों पर कार्रवाई होगी। इस पर जूनियर चिकित्सक बाहर आए और संाकेतिक हड़ताल की बात कहते हुए हड़ताल समाप्त कर दी।
दोपहर दो बजे तक हुए 65 मरीज भर्ती
जयारोग्य की ओपीडी में सोमवार को ओपीडी में नए मरीज 1950 और पुराने 300 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। इसके साथ ही दोपहर दो बजे तक करीब 65 मरीजों को भर्ती किया गया। जबकि सामान्य दिनों में करीब 130 से 150 तक मरीजों को भर्ती किया जाता है, लेकिन अस्पताल की स्थिति देखते हुए कई मरीजों ने तो खुद से ही भर्ती होने से इंकार कर दिया।
भोपाल में चला बैठकों का दौर, नहीं निकला नतीजा
हड़ताल को देखते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने नर्सेस व पैरामेडिकल स्टॉफ के प्रतिनिधिमण्डल को भोपाल में चर्चा के लिए भी बुलाया था। सुबह से शाम तक बैठकों का दौर चलता रहा, लेकिन निष्कर्ष नहीं निकला। पहले डीएमई उल्का श्रीवास्तव और नर्सिंग डायरेक्टर के साथ बैठक हुई। इसके बाद दोपहर को विभाग के आयुक्त शिवशेखर शुक्ला और शाम को विभाग के प्रमुख सचिव राधेश्याम जुलानिया के साथ बैठक हुई। नर्सेस एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष रेखा परमार ने बताया कि विभाग के अधिकारियों ने उनकी एक न सुनते हुए हड़ताल समाप्त करने के लिए दबाव बनाया है। लेकिन जब तक मांगे पूरी नहीं होती तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इधर संयुक्त मोर्चा द्वारा की जा रही हड़ताल के समर्थन में सीनियर नर्स और पैरामेडिकल स्टॉफ भी सामने आ गए हैं। उन्होंने 25 जुलाई से हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है।
