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कांग्रेस प्रत्याशी को कांग्रेसियों ने ही हराया, भाजपा का बना सभापति

कांग्रेस प्रत्याशी को कांग्रेसियों ने ही हराया, भाजपा का बना सभापति


कांग्रेस प्रत्याशी को कांग्रेसियों ने ही हराया भाजपा का बना सभापति

ग्वालियर,न.सं.। महापौर पद पर डॉ शोभा सिकरवार की जीत से उत्साहित उनके पति विधायक डॉ सतीश सिंह सिकरवार एवं देवर सत्यपाल सिंह सिकरवार ने 21 दिन के भीतर इतनी व्यवस्था कर ली थी कि वह सभापति पद पर विजय हासिल कर लेते। लेकिन ऐन समय पर जिस तरह से वार्ड 27 की कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी सुरेश सिंह गुर्जर का नाम सभापति पद के लिए तय हुआ जिससे दो कांग्रेस नेता बेहद बिफर गए कि यह नाम गलत तय हुआ है बस इसके बाद कांग्रेस को भितरघात का सामना करना पड़ा और लक्ष्मी गुर्जर मात्र एक मत से हार गई।

सूत्रों ने बताया कि ओरछा के रिसोर्ट से कांग्रेस के पार्षदों को होटल सेंट्रल पार्क लाया गया जहां सुबह तय हुआ कि सभापति पद पर चुनाव कौन लड़ेगा। वैसे इसके लिए सतीश समर्थक अवधेश कौरव, पूर्व मंत्री एव विधायक लाखन सिंह की बहु उपासना संजय यादव, वार्ड 59 की पार्षद सरोज हेबरन कंसाना के नाम चर्चा में थे, लेकिन जब इन तीन नामों पर विरोध हुआ तब बैठक में मौजूद प्रदेश कोषाध्यक्ष अशोक सिंह, अध्यक्ष देवेन्द्र शर्मा, विधायक सतीश सिकरवार, प्रवीण पाठक व सुनील शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को सारी जानकारी दी।

इसके बाद एक नया नाम वार्ड 27 की पार्षद लक्ष्मी सुरेश गुर्जर का तय हुआ। जिसका लाखन सिंह ने खुलकर विरोध किया कि मेरी बहु प्रत्याशी क्यों नहीं हो सकती। वहीं सरोज कंसाना के पति युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हेबरन कंसाना भी निर्णय के विरोध में नजर आए। कुल मिलाकर कांग्रेस प्रत्याशी को कांग्रेसियों ने ही हराने का काम किया। क्योंकि सिकरवार परिवार निर्दलीयों और बसपा के पार्षदो को अपने पक्ष में कर चुके थे साथ ही भाजपा के कुछ पार्षदों से भी वायदा ले लिया था। इसीलिए शुक्रवार को सुबह कांग्रेस खेमे में विश्वास की झलक थी जिसमें सतीश सिकरवार उत्साह के साथ मोर्चा संभाले हुए थे। मात्र एक वोट से पराजय के बाद इस खेमे ने भाजपा के बजाय अपने ही दल को हार के लिए जिम्मेदार ठहराया है। यद्यपि इस तरह का सीधा आरोप सामने नहीं आ पाया है।

उल्लेखनीय है कि 17 जुलाई को महापौर और पार्षद पदों के परिणाम आने के बाद महापौर पद पर कांग्रेस की शोभा सिकरवार और उनके 25 पार्षद विजयी हुए। जबकि भाजपा ने महापौर सीट गंवाई लेकिन उसके बहुमत बराबर 34 पार्षद जीतकर आए। निर्दलीय पार्षद 6 और एक बसपा का पार्षद विजयी हुआ। सभापति पद के लिए सीधा गणित भाजपा के पक्ष में नजर आया फिर भी दोनों ही दल इन प्रयासों में जुट गए कि निर्दलीय और बसपा के पार्षदो ंको अपने पक्ष में किया जाए। चुनाव से चार दिन पूर्व भाजपा ने एक रणनीति के तहत अपने सभी 34 पार्षदों को रेवाड़ी के रिसोर्ट में पहुंचा दिया। दूसरे दिन कांग्रेस के 25 पार्षदों को धार्मिक यात्रा के नाम पर ओरछा के रिसोर्ट में पहुंचा दिया गया। यानि की दोनों ही दलों को क्रॉस वोट का खतरा था।

तीन नाम में से मनोज ने मारी बाजी

भाजपा खेमे में हरियाणा के रिसोर्ट से आदित्याज होटल पहुंचने के बाद तक किसी पार्षद को यह नही बताया गया कि सभापति का प्रत्याशी कौन है। शुक्रवार को सुबह 9.30 बजे जब सभी पार्षदों को जलविहार लाया जा रहा था तब भाजपा पार्षदों को बताया गया कि सभापति के उम्मीदवार मनोज सिंह तोमर है। जो स्वयं एक बार वरिष्ठ पार्षद और पत्नी उपमा तोमर भी एक बार पार्षद रही है।इसके अलावा एक खेमे द्वारा हरिपाल एवं अनिल सांखला के नाम भी रखे गए थे, जिन पर विचार नहीं हुआ। संगठन ने सामूहिक तौर पर जिस तरह महापौर पद पर सुमन शर्मा का नाम घोषित किया था उसी तरह मनोज तोमर को प्रत्याशी बनाया गया।

दीपक मांझी को दुबारा कांग्रेस पाले में लाई

वार्ड 6 से कांग्रेस समर्थित दीपक मांझी को ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर दो दिन पहले अपने बंगले पर भाजपा का दुपट्टा और माला पहनाकर अपने खेमे में किया था लेकिन वह उनके साथ हरियाणा के रिसोर्ट न जाते हुए बालाजी और खाटू श्याम की यात्रा पर चला गया। ऐसे में कांग्रेस ने पुन: उसे अपने पाले में लाने के लिए महासचिव सुनील शर्मा एवं सतपाल सिकरवार को जिम्मेदारी दी। लेकिन उसके घर पर पुलिस का कड़ा पहरा था तब रात दो बजे उक्त दोनों नेता स्कूटी पर बैठाकर उसे ललितपुर कॉलोनी लाने में कामयाब रहे।

इसी तरह दो और निर्दलीय वार्ड 63 की उमा शिव सिंह यादव व 64 के मनोज यादव भी मंत्री के साथ रिसोर्ट पहुंचे थे, लेकिन वह अन्य भाजपा पार्षदों की तरह वीडियो कोच में साथ नहीं आए। जिससे इन दोनो पार्षदों की आस्थाएं भी डिग गई।

कांग्रेस खेमे में मायूसी

दोपहर 12.30 बजे मतदान समाप्त होने के मात्र 10 मिनट के भीतर यह सूचना आई कि मनोज तोमर मात्र एक मत से विजयी घोषित कर दिए गए इसे सुन भाजपा के नेता जयश्रीराम और भाजपा जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। लेकिन सतीश सिकरवार, देवेन्द्र शर्मा, सुनील शर्मा, रश्मि पवार इस सूचना को गलत बताते रहे। क्योंकि वहां लगे माइक से कोई भी उद्घोषणा नहीं की जा रही थी। लेकिन अंदर से जो सूचना आई थी वह बाद में सही निकली। इसके बाद कांग्रेस नेता एक दम मायूस हो गए जबकि उस समय भाजपा जिलाध्यक्ष कमल माखीजानी, मुन्नालाल गोयल, हरीश मेवाफरोश आदि खुशी से झूमने लगे। बाद में वहां प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट पर्यवेक्षक जीतू जिराती, मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी वहां पहुंच गए। जबकि शुरु में सांसद विवेक शेजवलकर, मंत्री भारत सिंह कुशवाह, जय सिंह कुशवाह, आशीष प्रताप सिंह राठौर, सुरेन्द्र शर्मा, अशोक शर्मा आदि भाजपा के तम्बू में बैठे रहे।

शेजवलकर ने सिकरवार को दी सलाह

चुनाव के ऐन पहले सांसद विवेक शेजवलकर ने विधायक सतीश सिकरवार को एक ओर बुलाया और कुछ मिनट चर्चा की। बताते है कि श्री शेजवलकर सहमति से सभापति बनाने का प्रस्ताव दे रहे थे। बाद में सतीश सिकरवार ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने यह कहा कि सरकार से मत टकराओं। लेकिन हम लोकतंत्र के लिए चुनाव लड़ रहे है।

महापौर के मत पर विरोध

सदन में मतदान प्रक्रिया शुरु होते ही महापौर शोभा सिकरवार पहला मत देने पहुंची तो भाजपा पार्षदों ने यह कहकर विरोध किया कि उन्हें निर्णायक मत देने का अधिकार है पहला मत वह नहीं दे सकती। इस पर उनके द्वारा दिए गए मत को पेटी से खोलकर वापस निकाला गया और एक लिफाफे में रखकर वापस डाल दिया गया। साथ ही जिलाधीश ने संविधान की नई व्यवस्था पढक़र सुनाइ जिसमें महापौर को कभी भी मत देने का अधिकार था। जिस पर भाजपा पार्षद शांत हो गए।

तीन भाजपा पार्षदों ने दिखाकर दिए मत

सदन में मतदान के दौरान भाजपा के तीन पार्षदों गिर्राज कंसाना, सोनू त्रिपाठी एवं बृजेश श्रीवास ने सील लगाने के बाद सबको अपना मत पत्र दिखाकर पेटी में डाला। जिसका कांग्रेस पार्षदों ने विरोध किया कि यह गुप्त मतदान है मत दिखाया गया है इसीलिए इन्हें निरस्त किया जाए।

दोनों दलों की अपनी अपनी बात

सभापति पद पर मनोज तोमर के विजयी होने पर भाजपा महानगर अध्यक्ष कमल माखीजानी ने कहा कि हमारा एक भी पार्षद इधर से उधर नहीं गया यह भाजपा के प्रत्येक पार्षद और कार्यकर्ता की जीत है। मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि सभापति पद पर भाजपा ने विजय प्राप्त की है। जहां तक निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की बात है तो इस पर मंथन किया जाएगा। वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ देवेंद्र शर्मा ने कहा कि यह हमारी जीत है क्योंकि 33 मत आना बड़ी बात है। विधायक डॉ सतीश सिंह सिकरवार ने भी इसे अपनी जीत बताया। यद्यपि वह काफी मायूस नजर आ रहे थे।

सभापति और महापौर ने पदभार ग्रहण किया

सभापति का चुनाव सम्पन्न होने के बाद सभापति मनोज तोमर ने परिषद में ऊपर बने कक्ष में जाकर अपना पद्भार ग्रहण किया। वहीं महापौर शोभा सिकरवार ने भी अपने कक्ष में पहुंचकर पद्भार ग्रहण किया। सभापति बनने के बाद मनोज तोमर ने बताया कि विकास के मुद्दे पर कोई राजनीति नहीं होगी। शहर के विकास के लिए भाजपा पहले भी संकल्पित थी और आज भी है। दोनो ने जैसे ही पदभार ग्रहण किया तो सभी पार्षदों ने उनका पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया।

अपीलीय समिति में दो-दो का हुआ बटबारा

सभापति के बाद 66 पार्षदों को अपीलीय समिति चुनना थी, लेकिन कांग्रेस-भाजपा नेताओं में सहमति बनने पर भाजपा की ओर से देवेन्द्र सिंह राठौर, संजय पोतनीस व कांग्रेस की ओर से पीपी शर्मा व प्रमोद खरे को निर्विरोध निर्वाचन पूूरा कर लिया गया।

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