जिस घर में था आसरा, उसी के मालिक को सताता था आरोपी

जिस घर में था आसरा, उसी के मालिक को सताता था आरोपी
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असहाय वृद्ध सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने को था मजबूर

ग्वालियर। पिछले एक वर्ष से आरोपी रम्मू जिस घर में रह रहा था। उसी घर में वह शाम को खूनी होली खेलकर फरार हो गया। रम्मू के आतंक से भयभीत वृद्ध मकान मालिक सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने को मजबूर था। पुलिस ने मां-बेटे की हत्या के आरोपियों की तलाश में दबिश देना प्रारंभ कर दी है।

मूलत: मुरैना के ग्राम मेवदा-दीना का पुरा के रहने वाले रामवीर गुर्जर गांव से पांच साल पहले सिरोल पहाड़ी पर आकर बस गए थे। उनकी पत्नी रामाबाई और दो जवान बेटे संजू और मोनू भी साथ रहते थे। रामादेवी के घर में बेहटा के रहने वाले रम्मू गुर्जर का आना-जाना प्रारंभ हुआ। रामाबाई और उसके पति

रामवीर से रम्मू गुर्जर की जब दोस्ती हो गई तो वह उनके घर में ही रहने लगा। रम्मू के घर में रहने से रामवीर को बुरा लगा तो उसने विरोध करना शुरू कर दिया। वृद्ध रामवीर पर रम्मू गुर्जर भारी पडऩे लगा और उसके साथ मारपीट तक करने लगा। रम्मू गुर्जर के आतंक से भयभीत होकर रामवीर बालाजी धाम में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने लगा। रामाबाई के जवान बेटे संजू और मोनू गाड़ी चलाने का काम करते हैं। जब तीनों पिता-पुत्र रात को काम पर चले जाते थे, तब भी रम्मू रामवीर के घर में एशो आराम से रहता था। वृद्ध रामवीर गुर्जर ने स्वयं अपनी पीड़ा दुखी होते हुए सुनाई। पुलिस असल विवाद की वजह पता लगाने का प्रयास कर रही है।

छह अगस्त को जेल से छूटा था संजू

संजू का बिजौली की रहने वाली जाट युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा था। जब यह बात युवती के परिजनों को पता चली तो उन्होंने संजू की रिपोर्ट कर दी थी। उस प्रकरण में संजू जेल में बंद था। विगत छह अगस्त को जमानत होने के बाद संजू जेल से छूटकर आया था।

संजू फौज में नौकरी की कर रहा था तैयारी

संजू के पिता रामवीर ने बताया कि संजू फौज में नौकरी के लिए तैयारी कर रहा था। रामवीर जमीन बेचकर उसे नौकरी दिलाने को तैयार थे। ट्रॉमा सेंटर पर रामवीर अपनी पत्नी रामाबाई और बेटे संजू की हत्या से क्रोधित हो रहा था।

एक कहानी यह भी

बताया गया है कि आरोपी रम्मू गुर्जर के साथ सियाराम का भी रामवीर के घर आना-जाना था। रम्मू के उनकी अनुपस्थित में घर में रहने से संजू और मोनू को बुरा लगता था। संभवत: विरोध करने पर ही मां रामाबाई और बेटे संजू को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। संजू को बचाने के दौरान रम्मू ने रामाबाई को भी नहीं बख्शा और उसकी भी गोली मारकर हत्या कर दी।

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