जाते-जाते एक शिक्षक को बैक डोर एन्ट्री करा गए डीईओ

जाते-जाते एक शिक्षक को बैक डोर एन्ट्री करा गए डीईओ
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- मामला शिक्षक को गांव से निलंबित कर 15 दिन में शहर में बहाल करने का

ग्वालियर । डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) डॉ. आर.एन. नीखरा का एक और कारनामा सामने आया है। सूत्रों के अनुसार डीईओ ने जाते-जाते एक शिक्षक की बैक डोर एन्ट्री (पीछे के रास्ते से प्रवेश) करा दी है। मामला ग्रामीण स्कूल बहादुरपुर प्रा.वि. के एक सहायक शिक्षक का है, जिसे निलंबित करने के मात्र 15 दिवस में शा.प्रा. विद्यालय रानीपुरा शहरी क्षेत्र में पदस्थ कर दिया गया है, जबकि नियम के मुताबिक प्रभारी मंत्री की अनुशंसा और विषम परिस्थितियों में ही किसी शिक्षक का तबादला गांव से शहर में किया जा सकता है। यह तो संभव ही नहीं है कि निलंबित होने वाले शिक्षक को गांव से शहर में बहाल कर दिया जाए, जबकि शहर में पहले से ही अतिरिक्त शिक्षक स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डीईओ डॉ. आर.एन. नीखरा ने 16 से 17 जुलाई में ग्रामीण क्षेत्र के बहादुरपुर प्रा.वि. के सहायक शिक्षक मनोज गुप्ता को निलंबित कर दिया था। इसके बाद डीईओ ने 29 जुलाई में मनोज गुप्ता को शा.प्रा. विद्यालय रानीपुरा में बहाल करने के आदेश निकाल दिए। आदेश निकलते ही मनोज गुप्ता ने 30 जुलाई को ज्वॉइनिंग कर ली। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डीईओ ने मनोज गुप्ता को एक योजनाबद्ध तरीके से पहले निलंबित किया और सभी नियमों को ताक पर रखकर उनको शहर में पदस्थ कर दिया, जिससे किसी को कुछ पता न चले। सूत्रों का कहना है कि यह कोई एक अकेला मामला नहीं है। डीईओ द्वारा नियमों को ताक पर रखकर ऐसे ही कई मामलों को अंजाम दिया गया है।

निलंबित होकर बहाल होने का नियम:-

सूत्रों के अनुसार यदि किसी शिक्षक को निलंबित किया जाता है तो पहले उसे आरोप पत्र दिया जाता है, उसके बाद उससे जवाब मांगा जाता है, तब कहीं जाकर जांच होती है। इसके बाद वह व्यक्ति बहाल हो पाता है। सूत्रों के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम छह माह और अधिक से अधिक दो वर्ष तक का समय लग जाता है।

प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर होता है तबादला:-

सूत्रों के अनुसार अध्यापकों को ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में आने के सभी रास्ते बंद हैं। प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर ही कोई शिक्षक ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में आ सकता है क्योंकि वर्तमान में शहर में अतिशेष शिक्षक हैं। प्रभारी मंत्री की विशेष अनुशंसा और विषम परस्थितियों में ही शिक्षक का शहर में तबादला किया जा सकता है। निलंबित होकर शहर में शिक्षक का तबादला होना किसी भी सूरत में संभव नहीं है।

इनका कहना है:-

'अभी मुझे इस मामले में ज्यादा नहीं पता है। उनसे ही पूछना होगा कि उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र में ऐसा क्यूों किया।'

अशोक वर्मा, जिलाधीश

'नियम के मुताबिक वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश आने पर हमने मनोज गुप्ता को 30 जुलाई को अपने स्कूल में ज्वॉइनिंग दी है।'

सुरेशचन्द्र गुप्ता

प्राचार्य, शा. पटेल उमावि, रानीपुरा

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