चार से पांच करोड़ का होता है डीईओ का पद

ग्वालियर। हर सरकारी पद की अपने आप में कुछ न कुछ खासियत होती है। कोई पद गरिमामयी होता है तो कोई पद माल कमाने वाला होता है। जी हां, जिले में शिक्षा के मंदिर में एक पद ऐसा भी है, जो जमकर कमाई करने वाला है। शिक्षा के इस मंदिर में इस पद को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के नाम से जाना जाता है। इस पद पर आने के बाद अधिकारी चार से पांच करोड़ रुपए का आसामी हो जाता है। कमाया जाने वाला यह वह पैसा है, जो अनुदानित स्कूल के शिक्षकों और अन्य मदों से आता है। वर्तमान में हालत यह है कि यहां बिना पैसे के डीईओ अपनी कलम तक को उठाना उचित नहीं समझते हैं। इस खेल में डीईओ कभी सामने नहीं आते हैं। यहां शिक्षा विभाग में पल रहे उनके दलाल और रिश्तेदार इस पैसे को कमाने का काम कमीशन के रूप में करते हैं। भले ही चाहे इनकी शिकायत लोकायुक्त में क्यों न हो जाए। नाम नहीं लिखने की शर्त पर ऐसे अधिकारियों पर शिकंजा कसने के लिए शहर की सामाजिक संस्थाओं ने लोकायुक्त अधिकारियों से मांग की है कि इनकी संपत्तियों की जांच होना चाहिए, जिससे इनका असली चेहरा सबके सामने आ सके।
25-25 प्रतिशत तक कमाया है कमीशन
अनुदानित स्कूलों में कई स्कूल ऐसे हैं, जो बच्चों की संख्या नहीं होने पर बंद होने के कगार पर हैं। कई शिक्षक सेवानिवृत्त हो गए हैं या कुछ होने वाले हैं। इन शिक्षकों का पैसा सरकार द्वारा तो जारी कर दिया गया है, लेकिन यह पैसा शिक्षा विभाग में अटका हुआ है। अपना घर चलाने और पैसा लेने के कई मजबूर शिक्षक तो वेतन और एरियर के रूप में 25-25 प्रतिशत तक कमीशन दे चुके हैं और जो कमीशन नहीं दे पा रहे हैं, उनको शिक्षा विभाग के चक्कर लगाना पड़ रहे हैं।
ऐसे होती है कमाई
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर में कई अनुदान प्राप्त स्कूल संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों को अनुदान के रूप में राशि (वेतन और एरियर) सरकार से मिलती है। यह राशि भी हर माह नहीं मिलती है। इन शिक्षकों को वेतन के रूप में यह राशि वर्ष में दो या तीन बार ही मिलती है। इस राशि को लेने के लिए इन शिक्षकों को कमीशन के रूप में शिक्षा विभाग में एक मोटी रकम देना होती है, तब कहीं जाकर इनको वेतन मिलता है। आज भी हालत यह है कि अनुदानित स्कूलों के ऐसे कई शिक्षक हैं, जिनको सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार मार्च माह से आज तक का वेतन नहीं मिला है। कई शिक्षकों को तो छटवें वेतनमान की किश्त तक नहीं मिल पाई है। पैसे नहीं मिलने का पूरा खेल कमीशन पर तय होता है। वर्तमान में शहर में अनुदानित स्कूलों के 1400 शिक्षक हैं।
ऐसे भी आता है पैसा
-अध्यापक और शिक्षकों का स्थानांतरण करने में।
-अनुकंपा नियुक्ति करने में।
-मोटा खेल स्कूलों को मान्यता देने में।
-लोगों का जीपीएफ निकालने में।
-निलम्बित लोगों को बहाल करने में वो भी मात्र 15 दिन में।
-इसी के साथ अन्य मदों से भी पैसा आता है।
संपत्तियों की होना चाहिए जांच
सामाजिक संस्थाओं के कुछ पदाधिकारियों ने लोकायुक्त अधिकारियों से मांग की है कि ऐसे अधिकारियों की संपत्तियों की जांच होना चाहिए कि आपने अपने सेवाकाल में कौन सी संपत्ति कैसे कमाई, जिससे शिक्षा विभाग में पनप रहे भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके। पदाधिकारियों का कहना है कि डीईओ के पद पर रहते हुए कई लोगों ने तो एक-एक करोड़ रुपए तक के मकान खड़े कर लिए हैं।
