एस्मा के बाद भी हड़ताल पर डटे रहे चिकित्सक

एस्मा के बाद भी हड़ताल पर डटे रहे चिकित्सक
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नर्सिंग एवं पैरा मेडिकल स्टॉफ के खिलाफ मामला दर्ज, उपचार के लिए तरस रहे मरीज, लौट रहे वापस

ग्वालियर। सरकार की सख्ती एवं एस्मा लगाने के बाद भी गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के जूनियर डॉक्टर्स को हड़ताल पर जाना भारी पड़ गया। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा के आदेश पर महाविद्यालय के अधिष्ठाता ने पांच चिकित्सकों को निष्कासित कर दिया। इसके साथ ही अस्पताल प्रबंधन ने हड़ताल कर रहे नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ के खिलाफ भी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। चिकित्सकों ने इस कार्रवाई के विरोध में कैंडल मार्च निकाला। वहीं चिकित्सकों व स्टॉफ के हड़ताल पर रहने से अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरीके से ठप हो गई हैं और मरीजों का उपचार नहीं हो पा रहा।

सेन्ट्रल जूनियर चिकित्सक एसोसिएशन के आह्वान पर गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के करीब 250 जूनियर चिकित्सक मंगलवार को महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ. एसएन अयंगर के पास पहुंचे और सामूहिक इस्तीफा देकर आंदोलन शुरू कर दिया। इस दौरान चिकित्सकों ने अधिष्ठाता से कहा कि सरकार को जूडा की मांग को लेकर चर्चा करना थी, लेकिन सरकार ने जूडा और पैरामेडिकल स्टाफ की सेवाओं को अत्यावश्यक घोषित करते हुए एस्मा लगा दिया। एस्मा लगाने के बाद भी हड़ताल करने पर महाविद्यालय अधिष्ठाता डॉ. अयंगर ने पांच चिकित्सकों को निष्कासित कर दिया है। इसमें डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. धारा सिंह, डॉ. शैलेन्द्र धाकड़, डॉ. श्रीकांत एवं डॉ. योगेन्द्र शामिल हैं। जबकि अन्य चिकित्सकों को शोकॉज नोटिस जारी किए गए हैं। इधर महाविद्यालय द्वारा की गई कार्रवाई के विरोध में जूनियर चिकित्सकों ने मंगलवार शाम को अस्पताल परिसर से महाविद्यालय तक कैडंल मार्च निकाला। इधर हड़ताल के कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों से लेकर ओपीडी तक में पहुंच रहे मरीजों को उपचार के लिए तरसना पड़ रहा है।

तुम्हारी गलती से मरता है मरीज और जवाब हमें देना पड़ता है

जूनियर डॉक्टर सुबह जैसे ही अधिष्ठाता कक्ष में पहुंचे और अपनी मांगे सुनाईं तो उन्होंने जूडा को फटकार लगाते हुए कहा कि आप लोग जो करते हो, उसके बारे में बता दूं। तुम्हारी गलती से ही मरीज मरता है और हमें भोपाल में जवाब देना पड़ता है। तुम लोगों के कारनामे किसी से छिपे नहीं है। इसी बीच चिकित्सकों ने फीस बढ़ाने की बात भी कही, तो अधिष्ठाता ने कहा कि तुम जो बाहर से अल्ट्रासाउण्ड और जांचें कराते हो उसका कमीशन भी तुम्हारी जेब में जाता होगा।

जिला अस्पताल में भी हुए मरीज परेशान

जयारोग्य में हड़ताल होने के कारण मरीज उपचार के लिए जिला अस्पताल मुरार पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां भी मरीजों की परेशानी कम नहीं हो रही है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक के छुट्टी चले जाने के कारण यहां पर बिरला नगर प्रसूति गृह में पदस्थ डॉ. नविता आर्य की ड्यूटी अल्ट्रासाउण्ड के लिए लगाई है। जबकि डॉ. नविता आर्य सिर्फ गर्भवति महिलाओ के ही अल्ट्रासाउण्ड करती है, जिस कारण पेट दर्द सहित अन्य सामान्य मरीजों के अल्ट्रासाउण्ड ही नहीं हो सके। इतना ही नहीं जिला अस्पताल की ओपीडी में भी चिकित्सक जल्दी उठ कर चले गए, जिससे कई मरीजों को बिना उपचार के ही लौटना पड़ा।

नर्सेस एवं पैरामेडिकल की हड़ताल दूसरे दिन भी

इधर नर्सेस व पैरामेडिकल स्टॉफ भी दूसरे दिन में हड़ताल पर डटे रहे। जिस कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ओपीडी में मरीजों का परीक्षण तो हो रहा था, लेकिन जांच न होने से वह परेशान थे। मरीजों को अल्ट्रासाउण्ड, एक्सरे, पैथोलॉजी की जांच, सिटी स्कैन, कीमो थैरेपी, टीवी की जांच के लिए यहां वहां भटकना पड़ा। अधिकतर मरीज थक हारकर घर चले गए। वार्ड में भर्ती मरीजों के इमरजेंसी ऑपरेशन ही किए गए। साथ ही मरीजों को समय पर इंजेक्शन भी नहीं लगे। अस्पताल की बिगड़ रही व्यवस्थाओं को देखते हुए सम्भाग आयुक्त बीएम शर्मा के निर्देश पर जयारोग्य चिकित्सालय प्रबंधन ने नर्सेस, पैरामेडिकल स्टॉफ पर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसमें संरक्षक रेखा परमार, अध्यक्ष सुमन विलवार, जिलाध्यक्ष देवेन्द्र सिंह त्यागी पर कम्पू थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। साथ ही हड़ताली नर्संेस और पैरामेडिकल स्टाफ को नोटिस देते हुए कहा कि वह यदि बुधवार दोपहर 1 बजे तक काम पर नहीं लौटे तो उनकी सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

60 चिकित्सकों के भरोसे दो हजार मरीज सीनियर रेसीडेंट व जूनियर रेसीडेंट के भरोसे पूरा अस्पताल

जयारोग्य चिकित्सालय सहित कमलाराजा अस्पताल के विभिन्न विभागों में इन दिनों करीब 1800 से दो हजार तक मरीज भर्ती रहता है। ऐसे में जूडा के काम बंद कर देने के कारण पूरी व्यवस्थाएं सीनियर रेसीडेंट व जूनियर रेसीडेंट के भरोसे ही हैं। विभिन्न विभागों में करीब 30 एसआर और 30 जेआर हैं। लेकिन यह भी अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरह नहीं संभाल पा रहा है, क्योंकि चिकित्सकों के कहीं ज्यादा मरीजों की संख्या है। जिस कारण कुछ एसआर और जेआर को तो 24 घंटे तक काम करने निर्देश दिए गए हैं। जबकि सीनियर चिकित्सक भी लगातार राउण्ड ले रहे हैं।

चार माह तक पहुंची वेटिंग

कैंसर पीडि़तों पर हड़ताल का बहुत बुरा असर पड़ रहा है। हड़ताल पर गए टेक्नीशियन के कारण कैंसर पीडि़तों की रेडियोथैरेपी नहीं हो पा रही है, ऐसे में करीब 80 मरीजों की वेटिंग पहुंच गई है। जिन्हें चार माह तक रेडियोथैरेपी का इंतजार करना पड़ेगा। इसमें ऐसे भी मरीज शामिल है, जिनकी थैरेपी बीच में ही बंद करनी पड़ गई है, जिस कारण अब मरीजों को कैंसर रोग फैलने का खतरा बना हुआ है। इतना ही नहीं कैंसर पीडि़तों में कई मरीज ऐसे भी है जो बुन्देलेखण्ड सहित अन्य राज्यों के है।

इनका कहना है

अस्पताल में मरीजों को दवाएं नहीं मिलती और न ही उपकरण ठीक रहते हैं। मरीज को कुछ होने पर परिजन हमारे साथ मारपीट करते हैं। हमें कितना तनाव झेलना पड़ता है, यह सबको पता है। उसके बाद भी हमारी मांगे पूरी करने की जगह हमें महाविद्यालय से बर्खास्त करने के आदेश दिए गए हैं। लेकिन हम इस कार्रवाई से डरेंगे नहीं। हमारा आंदोलन जारी रहेगा।

डॉ. अनिल शर्मा, पीजी छात्र, सर्जरी विभाग,

सरकार जब तब हमारी मांगें पूरी नहीं करती तब तक हम हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे। प्रदेश के कु छ संगठनों को डरा धमकाकर काम पर वापस लौटने के लिए कहा गया है और हड़ताल खत्म होने का झूठा प्रचार किया जा रहा है। लेकिन हम लोग अब पीछे नहीं हटेंगे।

रेखा परमार, संरक्षक, संयुक्त मोर्चा, स्वास्थ्य कर्मचारी संघ

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