कांग्रेस में बाहर से एका, अंदर से दरार

कांग्रेस में बाहर से एका, अंदर से दरार
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गुटबाजी की पूरी रिपोर्ट जा रही है आलाकमान के पास

ग्वालियर। जिले में शहर और ग्रामीण कांगेस में गुटबाजी कम होने की जगह बढ़ती ही जा रही है। विधान सभा चुनाव का समय नजदीक आते ही टिकट के दावेदार भी सक्रिय हो गए है। शहर जिला कांग्रेस में जब से नए अध्यक्ष की नियुक्ति हुई तब से कांगे्रस कई गुटों मे बंटती नजर आ रही है। हालत यह है कि पुराने वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की पूछ परख कम होने से उन्होंने तो कांगेस कार्यालय की देहरी चढऩा ही छोड़ दिया है।

शहर जिला कांग्रेस में अब पहले जैसी रौनक नजर नहीं आ रही है। जिला कांगे्रस मे सिंधिया और दिग्गी गुट आज भी एक दूसरे की टांग खींचने में लगा है। प्रदेश सरकार से बेदखल होने के बाद से तो कांग्रेस मुद्दाविहीन सी हो गई। जनसमस्याओं के नाम पर कांगे्रस के द्वारा आयोजित धरना प्रदर्शन में भी गुटबाजी साफ नजर आने लगी है। हालत यह है कि शहर और देहात में कांगे्रेसी इन दिनों अपनी अपनी कांगे्रस चला रहे है। शहर में तो विधान सभा चुनाव के लिए दावेदरों मे अभी से नूरा कुश्ती शुरु हो गई। कुछ टिकट के दावेदारों को तो संगठन में पद देकर उनका मुंह बंद कर दिया गया है। लेकिन शहर तथा ग्रामीण मे टिकट के दावेदारों मे विभिन्न कार्यक्रमों के द्वारा अपना शक्ति प्रदर्शन शुरु कर दिया है। वैसे भी अंचल की कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया की मर्जी ही चलती आई है। आगे भी ऐसा ही रहेगा। जिले मे कांगे्रस की दशा और दिशा दोनों ही सुस्त नजर आ रही हैं। नगर निगम परिषद में कांग्रेस के पार्षद भी अलग थलग नजर आ रहे हैं। जिसके चलते विपक्ष भी कमजोर होता जा रहा है। कांग्रेसी पार्षदों में आपसी तालमेल नहीं होने के कारण निगम के अधिकारी भी उनकी नहीं सुनते हैं। इतना नहीं परिषद में कांग्रेस का विरोध भी अब केवल दिखावे के लिए रह गया है।चुनाव से पहले कांग्रेस में चल रही गुटबाजी के कारण टिकट वितरण के समय भी घमासान होने के आसार है।

सभी नेताओं पर रखी जा रही है नजर

सूत्रों की मानें तो इन दिनों सभी कांग्रेस नेताओं पर नजर रखी जा रही है। कि कौन नेता क्या कर रहा है। बताया तो यह भी जा रहा है कि टिकट वितरण के समय कांग्रेस नेता नहीं रुठे, इसके लिए पूरी रणनीति दिल्ली में तैयार हो रही है। लेकिन रणनीति की भनक अभी तक किसी भी नेता को नहीं लगी है।

पार्षद भी अलग थलग पड़े

नगर निगम परिषद में सत्ता पक्ष का सामना करने के लिए कांग्रेस पार्षद अपने ही नेता प्रतिपक्ष की नहीं सुनते है। यहां तक कि हालत यह हो गई है कि कांग्रेस पार्षदों के अलग थलग पडऩे से परिषद में विपक्ष अपनी बात नहीं रख पाता है।

सभी नेता इन दिनों अपनी कांग्रेस चला रहे हैं

शहर के कांग्रेसी नेता इन दिनों अपनी-अपनी कांग्रेस चला रहे हंै। एक ओर तो कांग्रेस के नेता कह रहे है कि कोई गुटबाजी नहीं हंै। लेकिन जब भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धरना प्रदर्शन करते हैं, तो मात्र गिने चुने कांग्रेसी ही नजर आते हैं। जबकि पहले धरने प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी शामिल होते थे। लेकिन अब ऐसा बिलकुल भी नजर नहीं आ रहा है।

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