सौ प्रतिशत था ब्लॉकेज, चिकित्सकों की टीम ने किया सफल ऑपरेशन

ग्वालियर। शहर के सूर्य मंदिर स्थित बीआईएमआर हॉस्पीटल में पिछले दिनों तीन ऐसे मरीज आए, जिन्हें दिल का दौड़ा पड़ा था, और वह जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। उनके दिल की धड़कन भी काफी कम हो चुकी थी। ऐसे में बीएमआईआर के चिकित्सकों ने इन मरीजों की एन्जियोप्लास्टी कर उन्हें नया जीवन दिया।
हृदय रोग से पीडि़त इन मरीजों में एक 39 साल का एक युवा था और 80 साल की बुजुर्ग महिला व 55 वर्ष का एक व्यक्ति शामिल था। दिल का दौरा पडऩे के बाद हॉस्पीटल में आए इन मरीजों का जीवन बचाने के लिए अस्पताल के हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव कवि भार्गव तथा उनकी टीम ने तुंरत इन मरीजों की एन्जियोप्लास्टी कर उन्हें नया जीवन प्रदान किया। डॉ. कवि ने बताया कि तीनों मरीजों को 100 प्रतिशत ब्लोकेज था, इसलिए मरीजों की स्थिति गम्भीर थी। अगर मरीजों की एन्जियोप्लास्टी नहीं की जाती तो उन्हें बचाना सम्भव नहीं होता। लेकिन तीनों मरीजों की सफल एन्जियोप्लास्टी कर उन्हें घर भेज दिया गया। इस बारे में अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि मरीजों का जीवन बचाना उनकी पहली प्राथमिकता है, इसके लिए अस्पताल के चिकित्सक मरीजों के उपचार में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। वहीं जिन मरीजों को नया जीवन मिला है उनके लिए अस्पताल के चिकित्सक भगवान से कम नहीं हंै।
इन मरीजों की हुई एन्जियोप्लास्टी
४मुरैना निवासी 80 वर्षीय धनवन्ती गत दिवस बीआईएमआर में उपचार के लिए पहुंची थी, जहां परीक्षण के बाद पता चला कि उनकी हार्ट रेट 40-45 प्रति मिनट और रक्त चाप 70 था। बुजुर्ग महिला की स्थिति देखते हुए डॉ. भार्गव ने निर्णय लिया कि अगर तुरंत एन्जियोप्लास्टी नहीं की गई तो जान को खतरा हो सकता है। इस पर डॉ. भार्गव व उनकी टीम ने तुरंत एन्जियोप्लास्टी कर महिला की जान बचाई।
४ इसी तरह 55 वर्षीय एक मरीज बीआईएमआर में उपचार के लिए इमरजेंसी में उपचार के लिए पहुंचा। जहां परीक्षण के बाद पता चला कि मरीज का रक्तचाप व हार्ट रेट बहुत कम है। जिसकी सूचना रात को ही डॉ. भार्गव को फोन पर दी गई, इस पर चिकित्सक इमरजेंसी पहुंचे और मरीज को हार्ट अटैक की पुष्टि करते हुए तुरन्त एन्जियोप्लास्टी करने का निर्णय लिया। इसके बाद मरीज को कैथेलैब के लिए ले जाया गया और उसकी एन्जियोप्लास्टी की गई, जिसके बाद मरीज खुद चल कर बाहर आया।
४जबकि एक अन्य मरीज झांसी निवासी 39 वर्षीय मोहम्मद परवेज भी उसी दिन रात को बीआईएमआर पहुंचे, जहां परीक्षण के बाद पता चला कि मरीज को हार्ट अटैक आया है और एन्जियोप्लास्टी करनी होगी। परिजनों की सहमति के बाद मरीज की तुरंत एन्जियोप्लास्टी कर जान बचाई गई।
शहर में नहीं होती रेडियल रूट से एन्जियोप्लास्टी
डॉ. गौरव ने बताया कि बीआईएमआर शहर का पहला अस्पताल है, जहां रेडियल रूट पद्धति से एन्जियोप्लास्टी की जाती है। रेडियल रूट से एन्जियोप्लास्टी में जहां मरीज को तकलीफ कम होती है, वहीं समय भी कम लगता है।
