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हिन्दुओं के धैर्य की परीक्षा न ले सरकार, संसद में कानून लाकर बनाए राम मंदिर: मीनाक्षी ताई

विहिप ने केशव प्रखण्ड में राम मंदिर निर्माण के लिए आयोजित की धर्मसभा

हिन्दुओं के धैर्य की परीक्षा न ले सरकार, संसद में कानून लाकर बनाए राम मंदिर: मीनाक्षी ताई
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ग्वालियर। अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण कार्य में आ रहीं बाधाओं को दूर करने के लिए विश्व हिन्दू परिषद द्वारा शनिवार को ग्वालियर महानगर में केशव प्रखण्ड, समाधिया कॉलोनी, हनुमान मंदिर पर अनुष्ठान कार्यक्रम एवं धर्मसभा का आयोजन किया गया। इसमें हिन्दू समाज के 3000 से अधिक नागरिक मौजूद रहे।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित विहिप की केन्द्रीय मंत्री मीनाक्षी ताई पिशवे ने कहा कि भगवान श्रीराम मंदिर की लड़ाई अभी की नहीं है। यह लड़ाई तभी से चली आ रही है, जब 1527-28 ईसवी में बाबर के सेनापति मीर बाकी ने अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि पर मंदिर को तोड़ा था। जिसका पंडित देवीदीन पाण्डे के नेतृत्व में युद्ध के रूप में पहला विरोध किया गया था। तब से लेकर आज तक 77 से अधिक युद्ध और सैकड़ों दंगे हो चुके हैं, जिनमें लाखों कारसेवकों की जान चली गई। अब समय आ गया है कि हम मंदिर निर्माण कर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दें।

मीनाक्षी ताई ने कहा कि इस पवित्र स्थल पर श्री गुरु गोविंद सिंह महाराज, महारानी राजकुंवर सहित अन्य कई विभूतियों ने संघर्ष किया। सन् 1989 में विश्व हिन्दू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान तेज किया और विवादित स्थल के नजदीक राम मंदिर की नींव रखी। इसी वर्ष इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि विवादित स्थल के मुख्य द्वारों को खोल देना चाहिए और इस जगह को हमेशा के लिए हिन्दुओं को सौंप देना चाहिए। 30 अक्टूबर 1990 को हजारों राम भक्तों ने मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा खड़ी की गईं अनेक बाधाओं को पार कर अयोध्या में प्रवेश किया और विवादित ढांचे के ऊपर भगवा ध्वज फहरा दिया, लेकिन 2 नवम्बर 1990 को मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया, जिसमें सैकड़ों राम भक्तों ने अपने जीवन की आहूतियां दीं। सरयू तट राम भक्तों की लाशों से पट गया था। इस सामूहिक हत्याकांड के बाद अप्रैल 1991 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को इस्तीफा देना पड़ा। दूसरी बार लाखों राम भक्त 6 दिसम्बर को कारसेवा के लिए अयोध्या पहुंचे और बाबरी ढांचा ढहा दिया। कारसेवकों को रोकने की हिम्मत किसी में नहीं थी। फिर एक बार उस स्थान पर भगवान श्रीराम की जन्मस्थली पर भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण का वक्त आ गया है, इसलिए जन भावनाओं का आक्रोश अनुभव करके केन्द्र सरकार को कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए। हिन्दू समाज के धैर्य की परीक्षा बार-बार न ली जाए। इस मुकदमे को चलते-चलते 68 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। एक पीढ़ी न्याय की आस लिए दुनिया को छोडक़र चली गई, इसलिए विहिप, बजरंग दल आह्वान करता है कि भारत सरकार संसद में अध्यादेश लाकर कानून बनाकर श्रीराम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रसस्त करे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भगवानदास माहौर ने की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से विभाग संगठन मंत्री उमेश पाराशर, विभाग मंत्री मनोज गोडिया, पप्पू राठौर, विभाग संयोजक मनोज रजक, कृष्ण कुमार रावत, रविराज लुढ़ेले, नीरज ऊचिया, जगदीश चौहान, मुकेश चौहान, धनराज थनवार, राजीव शाक्य, दीपक माझी, हरीश रजक, पूरब खटीक, राहुल जाटव, अरविन्द कुशवाह, शिवम ठाकुर, नारायण माहौर, देवेन्द्र माहौर, मोहित, विक्की, मनोज कुशवाह, कमल, आकाश कुशवाह, प्रदीप कुशवाह, छोटू कुशवाह सहित हजारों कार्यकर्ता व नागरिक उपस्थित थे।

Updated : 23 Dec 2018 8:19 AM GMT
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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