शहर से रहा गहरा नाता, आज भी जिंदा हैं यादें

शहर से रहा गहरा नाता, आज भी जिंदा हैं यादें
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डॉ. पापरीकर को शिवाजी उद्यान के लिए अटल जी ने दिए थे पांच हजार रुपए

महानगर के एजी पुल के पास स्थित शिवाजी उद्यान में लगी छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण भी अटल जी ने ही किया था। तब वह प्रधानमंत्री थे। वैसे कांग्रेसियों ने इस आयोजन में अटल जी के आने का विरोध भी किया था, लेकिन कांंग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. रघुनाथराव पापरीकर के अनुरोध पर अटल जी उस आयोजन में आए थे। डॉ. रघुनाथराव पापरीकर के पुत्र अभय पापरीकर ने अटल जी के निधन के बाद उनसे जुड़ी यादों को स्वदेश से साझा करते हुए बताया कि उनके पिता डॉ. रघुनाथराव पापरीकर ने शिवाजी उद्यान बनाने के लिए काफी प्रयास किया था। उनके ही प्रयासों से आज शिवाजी उद्यान में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगी हुई है। अभय पापरीकर ने बताया कि जब उद्यान बनाने की शुरुआत हुई तो पिता जी उस समय कांग्रेस के जिलाध्यक्ष थे और दिल्ली में अटल जी से मिलने गए और उनसे शिवाजी उद्यान बनाने के बारे मे बताकर कुछ सहयोग की भी बात कही। अटल जी यह सुनकर खुश हुए, लेकिन वह शासन स्तर पर तो कोई सहयोग नहीं कर सके। बाद में उन्होंने उद्यान के लिए अपनी ओर से पांच हजार रुपए की सहयोग राशि दी थी। उद्यान बनने के बाद जब डॉ. रघुनाथराव पापरीक ने दिल्ली जाकर अटल जी को शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण करने के लिए आने का आमंत्रण दिया तो वह आने को तैयार भी हो गए। बाद में अटल जी को पता चला कि कांग्रेस उनके आयोजन में आने का विरोध कर रही है तो उन्होंने डॉ. पापरीकर से कार्यक्रम में आने से मना किया तो डॉ. पापरीकर ने अटल जी से कहा कि आपको तो आना ही है। विरोध होता है तो होता रहे। बाद में अटल जी आए और शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण भी उन्होंने ही किया। इसके बाद अनूप मिश्रा की माता जी के निधन पर जब अटल जी ग्वालियर आए थे तो डॉ. पापरीकर उनसे मिलने के लिए अनूप जी के घर पहुंचे, लेकिन सुरक्षा गार्डों ने उन्हें रोक दिया।

भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आज पंचतत्व में विलीन हो गए। पूरा शहर दिन भर टेलीविजन पर चिपका रहा और उनकी अंतिम यात्रा व अंत्येष्टि का सजीव प्रसारण देखता रहा। वहीं अटल जी को श्रद्धांजलि देने के लिए शहर भर में कार्यक्रम हुए। अटल जी आज भले ही हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन शहर में आज भी उनसे जुड़ी यादें जीवंत हैं। अटल जी से जिनका गहरा नाता रहा, उन्होंने एवं उनके परिवार के लोगों ने स्वदेश से अटलजी से जुड़े अनुभव व स्मृतियां साझा कीं।

हजारों साल में कोई एक जन्म लेता है अटल जी जैसा महामानव

-दूसरे दिन भी शोक में डूबा रहा कमल सिंह का बाग

-पैतृक निवास पर हुई रामधुन, शहरवासियों ने अर्पित किए श्रद्धा सुमन

ग्वालियर के सपूत, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के देहावसान के बाद दूसरे दिन शुक्रवार को भी शिन्दे की छावनी स्थित उनके पैतृक निवास कमल सिंह का बाग में मातम पसरा रहा। हर कोई शोक में डूबा नजर आया। कभी अलट जी के बेहद करीब रहे मौहल्ले के बुजुर्गों को सहसा विश्वास नहीं हो रहा है कि यहां तंग गलियों में छोटे-छोटे चबूतरों पर उनके साथ चौपर खेलने वाले अटल जी अब इस दुनिया से अलविदा हो चुके हैं। यहां सुबह से देर शाम तक शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। शाम को रामधुन और श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, जिसमें महापौर सहित शहर भर से आए लोगों ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता अटल जी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

कमल सिंह का बाग में अटल जी का पैतृक निवास है, जहां उनके परिजन निवास करते हैं। गुरुवार शाम को अटल जी के निधन की खबर आने के बाद से ही यहां का माहौल गमगीन है। हर कोई यही कह रहा है कि अटल जी जैसा महामानव हजारों वर्षों में कोई एक जन्म लेता है। 70 वर्षीय आर.एन. सक्सेना कहते हैं कि अलट जी एक ऐसा व्यक्तित्व थे, जिनके अंदर अद्भुत नेतृत्व क्षमता, कुशल राजनीतिज्ञ, कर्मठ प्रशासक, भाषाविद, कवि, पत्रकार, लेखक सब कुछ समाया हुआ था। अटल जी में रोते-बिलखते व्यक्ति को भी हंसाने की क्षमता थी। ऐसा व्यक्तित्व बिरले ही लोगों में होता है। अटल जी कितने सहज और सरल थे। इस बारे में 76 वर्षीय ओ.पी. कटारे बताते हैं कि प्रधानमंत्री बनने के बाद जब अटल जी ग्वालियर आए तो सभी लोग अपनी-अपनी छतों से उन्हें देख रहे थे। अटल जी ने सुरक्षा व्यवस्था से परे हटकर सभी को उनके नाम से पुकार-पुकारकर अपने पास बुलाया और सभी से स्नेह पूर्वक मिले। बुजुर्ग महिलाओं के चरण स्पर्श करके उन्होंने कहा कि आज मैं जो भी कुछ हूं, आप लोगों के आशीर्वाद के कारण हूं। यह सुनकर सभी बुजुर्ग महिलाएं रोने लगी थीं। श्री कटारे बताते हैं कि अटल जी कितने सिद्धांतवादी थे। यह इस बात से पता चलता है कि उनके बड़े भाई प्रेम बिहारी वाजपेयी सहकारिता विभाग में थे। उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी गई थी। उस समय सुंदरलाल पटवा मुख्यमंत्री थे। अटल जी अपने घर पर आए तो प्रेम बिहारी जी ने अटल जी से कहा कि आप पटवा जी से मेरी सिफारिश कर दो, लेकिन अटल जी ने दो टूक शब्दों में कह दिया था कि मैंने आज तक किसी की सिफारिश नहीं की तो आपकी सिफारिश कैसे कर सकता हूं। इस बात पर प्रेम बिहारी जी उन पर आग बबूला हो गए थे।

प्रांशु के जन्मदिन की चिट्टी पर 25 साल बाद दिए ऑटोग्राफ

ग्वालियर। भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई लोगों के दिल में बसे हुए थे और स्वयं के हाथों से चिट्टी लिखकर अपने शब्दों को बयां किया करते थे। ऐसा ही एक वाक्या पूर्व सांसद एवं महापौर स्व.नारायणकृष्ण शेजवलकर के पुत्र महापौर विवेक शेजवलकर को 13 अक्टूबर1976 में 15 पैसे के पोस्टकार्ड पर लिखी एक चिट्टी का है। यह चिट्टी श्री वाजपेई ने सांसद रहते नई दिल्ली से श्री विवेक शेजवलकर, नई सड़क ग्वालियर, के पते पर भेजी थी।इसमें उनके घर में पुत्र प्रांशु के जन्म पर बधाई संदेश दिया गया था। चिट्टी में लिखा था प्रिय,विवेक नमस्ते, पहले तार भेजा था कहां गायब हो गया पता नहीं। यह कार्ड भी मिलेगा या नहीं। प्रांशु के शुभ आगमन का स्वागत, सबको बधाई।वृहद हिंदी कोष में बहुत ढूंढा शब्द नहीं मिला। चिरंजीव से परिवार में वृद्धि की,साथ साथ हम लोगों के शब्द ज्ञान में भी समृद्धि की। सब बंधुओं तक नमस्कार पहुंचा दें।

यहां खास बात यह रही कि यह चिट्टी मिलने के 25 साल बाद श्री विवेक शेजवलकर 13 अक्टूबर 2001 को नई दिल्ली में श्री वाजपेई से मिलने पहुंचे तो उन्होंने यह चिट्टी उन्हें दिखाई, जिस पर अटलजी ने मुस्कुराते हुए उसी चिट्टी के पिछले हिस्से में पुन: लिखा-

यहां बता दें कि श्री वाजपेई का स्व. नारायणकृष्ण शेजवलकर से परिवार जैसा नाता था, वह जब भी ग्वालियर आते थे तो शेजवलकरजी के घर जरूर आते थे।श्री विवेक शेजवलकर ने अटलजी की चिट्टी का जिक्र करते हुए बताया कि वे बेहद सरल और सादगी वाले थे।उनकी यादें हमेशा स्मरण होती रहेंगी।

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