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बनने के साथ ही बीमार पड़ गया एक हजार बिस्तर का अस्पताल

जगह-जगह पसरी गंदगी, चेम्बर हो रहे ओवर फ्लो, दुर्गंध से चिकित्सक परेशान

बनने के साथ ही बीमार पड़ गया एक हजार बिस्तर का अस्पताल
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ग्वालियर, न.सं.। बहु आयामी एक हजार बिस्तर का अस्पताल बनने और शुरू होने के बाद से ही बीमार पड़ गया है। उम्मीद थी कि अस्पताल में शहर के साथ दूर दराज से आने वालों का उपचार बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के बीच मिलेगा। लेकिन हालात इसके उलट हैं। इस अस्पताल को खुद के उपचार की दरकार है। इसकी दीवारों व फर्श पर गुटखा, तम्बाकू की पीकें साया है तो नलों की टोंटियां चोरी जा चुकी हैं। सीवर के चेम्बर चोक होकर ओवरफ्लो हो रहे हैं तो शौचालय मलबे से भरे पड़े हैं। हर तरफ गंदगी और दुर्गंध नथुने फाड़ डालने को आतुर है। इस तरह यह नया अस्पताल खुद ही गंदी के ढ़ेर या ठिये में तब्दील पड़ा है। सुरक्षा के यहां कोई इंतजाम नहीं हैं। डर तो तब लगता है जब रात में आवारा कुत्तों के झुण्ड यहां फेरी लगाते हैं। अफसोस की बात ये है कि अधिष्ठाता से लेकर अधीक्षक तक तमाम अधिकारी सब कुछ जानते बूझते हुए भी कुछ नहीं कर रहे और अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेते हैं।


दरअसल पॉटरीज की जमीन पन बने एक हजार बिस्तर के अस्पताल को महाविद्यालय प्रबंधन ने पिछले साल 20 अक्टूबर को हैंडओवर ले लिया था और दिसंबर के पहले सप्ताह में नए भवन में ओपीडी शुरू कर दी गई। वर्तमान में यहां अब अधिकांश विभाग संचालित हो रहे हैं। लेकिन भवन की साफ-सफाई दिन प्रतिदिन बिगड़ी जा रही है। अस्पताल के अधिकांश शैचालयों में गंदगी व्याप्त है और विभागों में दुर्गंद पसरी हुई है। इसके अलावा चिकित्सकों के कक्षों तक की नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। इतना ही नहीं अस्पताल की सीवर लाइन भी ओवर फ्लो होने लगी है, जिससे अस्पताल के पीछे की ओर गंदा पानी बह रहा है। जिसको लेकर चिकित्सकों अब चिकित्सक भी कहने लगे हैं कि ऐसी क्या जल्दी थी कि अस्पताल को आधी अधूरी तैयारियों के साथ हैंडओवर ले लिया गया।

अधिकांश शैचालयों से टोंटियां हुईं गायब


भवन के सी ब्लॉक के बात करें तो यहां बने अधिकांश शैचालयों में लगी टोंटियां गायब हो चुकी हैं। इसके अलावा हाथ धोने के लिए लगे वॉश बेसिन से तो नल व उसमें लगा पाइप तक गायब हैं। इसी तरह पीने के लिए बने प्लेटफॉर्म के नलों की टोंटियां भी गायब हैं और पानी बहने में लगा हुआ है। लेकिन सुरक्षाकर्मी अस्पताल में हो रही चोरियों को भी नहीं रोक पा रहे हैं।

विद्युत ऊर्जा की हो रही बर्बादी


अस्पताल में विद्युत ऊर्जा की भी बर्बादी हो रही है। अस्पताल में लगी लाइटें 24 घंटे जल रही है, लेकिन लाइट कहां से बंद होंगी, यह किसी को नहीं पता। इतना ही नहीं एक चिकित्सक का कहना है कि विद्युत ऊर्जा की बर्बादी से विद्युत खपत भी बढ़ रही है, जिसका भार भी महाविद्यालय पर ही पड़ेगा। क्योंकि विद्युत बिलों का भुगतान महाविद्यालय द्वारा ही किया जाता है।

दरारों में भरवाई पुट्टी



अस्पताल के ए, बी एवं सी ब्लॉक की गई दीवनों में दरारे आने लगी हैं। इतना ही नहीं सी ब्लॉक से बी ब्लॉक के बीच एक ज्वाइंट में भी बड़ी दरार आ चुकी है। लेकिन जिम्मेदारों ने दरारों को छुपाने के लिए उसमें पुट्टी भरवा दी है, जिससे दरारे दिखाई न दें।

बायोमेडिकल वेस्ट भी फेंका जा रहा खुले में

जिम्मेदारों की अदेखी यहीं नहीं थमती। अस्पताल के विभिन्न वार्डों से निकलने वाला बायोमेडिकल वेस्ट भी कई जगह खुले में फेंका जा रहा है। जिस कारण मरीजों व उनके को संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। जबकि बायोमेडिकल वेस्ट को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सख्त निर्देश हैं।

Updated : 25 Jan 2023 9:00 AM GMT
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स्वदेश वेब डेस्क

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