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अलविदा 2018 : शहर को मिलीं कई सौगातें, दो अप्रैल की घटना दे गई दर्द

अलविदा 2018 : शहर को मिलीं कई सौगातें, दो अप्रैल की घटना दे गई दर्द
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ग्वालियर, (स्वदेश टीम)

बीता साल 2018 अपनी मधुर यादें छोड़ गया। इस साल में ग्वालियर शहर ने कुछ खोया तो बहुत कुछ पाया भी। बीते साल ग्वालियर ने अपने एक अनमोल रतन भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को खो दिया। वहीं जनसंघ, जनता पार्टी और भाजपा की नींव रखने वालीं राजमाता श्रीमंत विजयाराजे सिंधिया का 12 अक्टूबर को जन्म शताब्दी समारोह शुरू हुआ। जाते साल के ऐन पहले प्रदेश में सत्ता परिवर्तन सबसे बड़ी घटना रही, जिसमें भाजपा के 15 साल के शासन को खत्म कर कांग्रेस ने अपनी वापसी की। वहीं विकास के मामले में यह साल ग्वालियर के लिए काफी कुछ लेकर आया, जिसमें शहर में चार आरओबी निर्माणाधीन हैं। वहीं शहर में सड़कों का जाल फैलाया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में भी बेहतर काम हुआ है। वहीं ग्वालियरवासियों को एक नहीं बल्कि चार ट्रेनों की सौगातें भी मिली। राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि की बात करें तो राष्ट्रपति, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री से लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित अन्य नेताओं का आगमन हुआ। अपराध के क्षेत्र में बात करें तो यह साल काफी अपराध लेकर आया। वहीं बवाल की बात करें तो दो अप्रैल की घटना ने शहर को झकझोर कर रख दिया, जिसमें दो लोगों की जान भी गई। स्वास्थ्य की बात करें तो इस साल लोगों को डेंगू का दंश झेलना पड़ा।

साल भर में मिले तीन जिलाधीश

साल भर में जिले को तीन जिलाधीश मिले, राहुल जैन के जाने के बाद अशोक कुमार वर्मा ने जिले की कमान संभाली। चुनाव बाद उन्हें हटा दिया गया और उनकी जगह पर भरत यादव को जिलाधीश बनाया गया।

जिले में विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए। मत प्रतिशत भी बढ़ा।

करोड़ों रुपए की लागत से संभागीय मुख्यालय का निर्माण, राजस्व भवन, परिवहन भवन का निर्माण।

अनुसूचित जाति एवं जनजाति कानून में संशोधन को लेकर प्रदर्शन के दौरान दो अप्रैल को बवाल हुआ। इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। संपत्ति को भारी नुकसान हुआ। एक सप्ताह तक कर्फ्यू लगा रहा। ग्वालियर जिले के इतिहास में इंटरनेट सेवाएं बंद रहीं।

एक हजार बिस्तरों का अस्पताल अभी तक फाइलों मे

शासन द्वारा प्रति वर्ष नई-नई योजनाओं की घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन योजनाएं धरातल पर उतरती नजर नहीं आ रही हैं। इसका उदाहरण जयारोग्य चिकित्सालय में प्रस्तावित निर्माण कार्य की घोषणाओं को देखकर कहा जा सकता है। जयारोग्य में एक हजार पलंग वाले भवन का अस्पताल कई वर्षों से सिर्फ फाइलों में ही चल रहा है, लेकिन आज तक इस अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है, जबकि अस्पताल के निर्माण के लिए भूमि भी आवंटित हो चुकी है। अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या और स्वास्थ्य सुविधाओं को देखते हुए यहां एक हजार बिस्तर के नए अस्पताल का निर्माण कराने का निर्णय शासन द्वारा लिया गया था, लेकिन 14 वर्षों में चार मंत्री आए फिर भी उनमें से कोई भी निर्माण कार्य शुरू नहीं करा सका। एक हजार बिस्तार का प्रोजेक्ट वर्ष 2005 से अटका हुआ है।

कैथ लैब भी नहीं हो सका शुरू: शासन द्वारा जयारोग्य में हृदय के मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2009 में कैथ लैब बनाने की घोषणा की गई थी।

सुपर स्पेशलिटी का भी शुरू नहीं हो सका काम: जयारोग्य अस्पताल में बनने वाले 200 पलंगों के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक का भूमि पूजन हुआ था। इसका निर्माण कार्य नवम्बर 2017 में पूरा होना था लेकिन नहीं हुआ।

2018 में डेंगू का रहा आतंक

जिले में पिछले पांच वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए डेंगू के करीब 1200 मरीज सामने आए, जबकि अगर निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों का आंकड़ा जोड़ा जाए तो जिले में डेंगू के करीब 1700 से 1800 मरीज सामने आए। इसके साथ ही मलेरिया विभाग के आंकड़ों के अनुसार डेंगू ने 2018 में चार लोगों की जान भी ली। वहीं अगर निजी अस्पतालों का भी आंकड़ा जोड़ा जाए तो डेंगू से हुई मृत मरीजों की संख्या पांच है।

जयारोग्य अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने के उद्देश्य से इसका ठेका हाईट्स कम्पनी को दिया गया, लेकिन व्यवस्था जस की तस बनी हुई है।

जिला अस्पताल का विस्तार नहीं हो सका। अस्पताल को 300 पलंग बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन प्रस्ताव फाइलों में ही दबा पड़ा है।

जिला अस्पताल में नहीं बन सका शव विच्छेदन गृह।

सिविल अस्पताल के विस्तार के लिए भूमि पूजन होने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सका।

नहीं बन पाया टर्सरी केयर यूनिट

जयारोग्य चिकित्सालय में कैंसर के मरीजों को बेहर उपचार उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल परिसर में टर्सरी कैंसर सेन्टर बनाने की घोषणा केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा वर्ष 2016 में वर्ष की गई थी, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो सका है।

भाजपा की तरह कांग्रेस ने भी ग्वालियर को दिए तीन मंत्री

विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तित होते ही कांग्रेस ने ग्वालियर जिले को तीन मंत्रियों से अलंकृत किया। पूर्व में भाजपा के सत्ता में रहते तीन मंत्री ही थे। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी और लाखन सिंह को अपने मंत्रिमंडल में स्थान दिया। चुनाव में ग्वालियर जिले में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा और उसकी छह में से पांच सीटों पर हार हुई, जिसमें उसके दो मंत्री पराजित हुए। वहीं एक मंत्री को टिकट ही नहीं मिला। ग्वालियर पूर्व से मुन्नालाल गोयल और ग्वालियर दक्षिण से प्रवीण पाठक पहली बार विधायक बने, जिसमें पाठक की जीत बड़ी ही रोमांचकारी रही। सत्ता बदलते ही शहर में अब कांग्रेसी झंडे लहराने लगे हैं और कमल मुरझा गया है। कांग्रेस के सत्ता में आने के साथ ही निगम मंडलों और अन्य स्थानों पर राजनीतिक नियुक्तियां रद्द कर दी गईं। वहीं म.प्र. उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ में नए अतिरिक्त महाधिवक्ता पद पर अंकुर मोदी को बैठाया गया।

कुकर्मी को मिली फांसी की सजा

कैंसर पहाड़यिा क्षेत्र में एक पांच वर्षीय मासूम को एक विवाह समारोह से बहला-फुसलाकर कुकर्म के बाद उसकी हत्या करने के आरोपी जितेन्द्र कुशवाहा को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई, जिसे उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा।

3.11 करोड़ से अचलेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार

अचलेश्वर महादेव मंदिर रियासत काल के समय का है। यह मंदिर कितने वर्ष पुराना है? यह किसी को सटीक रूप से पता नहीं हैं। रियासत काल के समय मंदिर का चबूतरा और पिण्डी ही हुआ करती थी। इसके बाद भगवान भोलेनाथ के भक्तों ने मंदिर का निर्माण कराया और मंदिर एक नए रूप में दिखाई देने लगा। कुछ वर्ष बाद मंदिर के पिलर चटकने के बाद अब इस वर्ष अचलेश्वर न्यास द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार 3.11 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है, जो अपने आप में अद्भुत होगा। यह मंदिर संभवत: अगले वर्ष बनकर तैयार हो जाएगा।

अध्यापकों को मिला इस वर्ष तोहफा

इस वर्ष अध्यापकों की वर्षों पुरानी मांग को मानकर तत्कालीन शिवराज सरकार ने अध्यापकों का शिक्षा विभिाग में संविलियन किया है। इससे अध्यापक सरकारी कर्मचारी बन गए हैं, जिससे इन्हें सरकार द्वारा दी जाने वाली सभी सेवाओं का लाभ भी मिलेगा। इसी के साथ इन अध्यापकों को सातवें वेतनमान का लाभ भी मिलेगा और इनके वेतन में ठीक-ठाक इजाफा भी हो जाएगा। वहीं अध्यापकों के क्रमोन्नति की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बजट में पांच लाख की वृद्धि

ग्वालियर व्यापार मेला में इस वर्ष सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बजट में वृद्धि भी की गई है, जिससे और कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का बजट 35 लाख से बढ़कर 40 लाख रुपए हो गया है।

उच्च् शिक्षा के क्षेत्र में शहर को यह मिला

जीवाजी विश्वविद्यालय में मल्टीआर्ट कॉम्पलेक्स, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम विज्ञान भवन का निर्माण, कर्मचारियों के आवास, कन्या छात्रावास का निर्माण हुआ। सेल्फ स्टडी सेंटर, कम्पोजिट भवन, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार स्वीमिंग पूल की आधारशिला रखी गई।

लम्बे समय से दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत करीब ढाई सैकड़ा कर्मचारियों को विश्वविद्यालय ने स्थायी किया।

यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम विवि में लागू किया गया।

जीवाजी विवि के तीन प्राध्यापक कुलपति व उप कुलपति बने।

एक दर्जन से अधिक से अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाओं व सेमिनार का आयोजन।

24 छात्रों के फर्जी अंकसूची मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

जिले के चीनौर को एक नया शासकीय महाविद्यालय मिला।

आधा दर्जन महाविद्यालयों को नैक से ए व बी ग्रेड मिली।

छात्रों की हुई फजीहत

जीवाजी विवि में छात्रों के न तो समय पर करेक्शन हुए और न ही अंकसूचियां बनी।

परेशान तीन छात्र आत्महत्या करने के लिए प्रशासनिक भवन की छत पर चढ़ गए। आश्वासन के बाद उतरे।

छात्रों की समस्याएं सुलझाने में विवि के अधिकारी नाकाम रहे।

प्री एण्ड पोस्ट का काम देखने वाली कलकत्ता की एजेंसी से विवि ने काम छीना।

दूरंतो-संपर्क क्रांति ठहरी तो अहमदाबाद के लिए मिली ट्रेन की सौगात

गुजरा वर्ष 2018 अंचल के रेल यात्रियोंं के लिए खुशियोंं की सौगात देने वाला रहा। इस साल में ग्वालियर से दिल्ली जाने के लिए शहरवासियों को जहांं हवा से बातें करने वाली गतिमान एक्सप्रेस मिली तो वहीं आगरा से अहमदाबाद के बीच चलने वाली इस ट्रेन का संचालन भी ग्वालियर से शुरू हुआ। इससे लोगों को अहमदाबाद के लिए सीधी ट्रेन सुविधा मिली। साल के अंतिम माह में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के प्रयासों से ग्वालियर में दूरंतोंं और संपर्क क्रांति का स्टापेज शुरू हो गया। वहीं झांसी मंडल में बैठे अधिकारियों की लाख कोशिशों के बाद भी स्टेशन की सफाई व्यवस्था नहीं सुधर पाई। स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही से स्टेशन की सफाई व्यवस्था पूरे वर्ष खराब ही रही। इतना ही नहीं रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष की घोषणा के बाद भी वर्ष 2018 में सफाई का नया ठेका नहीं हो सका, साथ ही कमाई के लिए स्टेशन पर बनी वाहन पार्किंग का नया ठेका करने में भी रेलवे के अधिकारी इस वर्ष असमर्थ दिखाई दिए।

वर्ष 2019 में शुरू होंगे पड़ाव सहित चार आरओबी

अगले साल शहर में चार नए आरओबी शुरू हो जाएंगे। इससे पुराने पुलों पर वाहनों का दबाव कम हो जाएगा। रेलवे चेयरमैन की घोषणा के अनुसार पड़ाव आरओबी की एक साइड को जनवरी 2019 और दूसरी साइड को मार्च 2019 में शुरू कर दिया जाएगा। इस ब्रिज पर रेलवे ट्रैक के ऊपर वाले हिस्से पर निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी का पूरा होने के बाद शुरू किया गया, लेकिन मल्लगढ़ा, यादव धर्मकांटा-शताब्दीपुरम व गाडर वाली पुलिया पर बनने वाले तीनों आरओबी पर पीडब्ल्यूडी के साथ ही रेलवे ने भी पिलर बनाने के लिए काम शुरू कर दिया है। नए तीनों ब्रिज की चौड़ाई 12 मीटर और लम्बाई लगभग 700 मीटर है। ब्रिज का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य अप्रैल-मई 2019 का रखा गया है।

यह योजनाएं अभी भी अधूरी

रेलवे का माल गोदाम ग्वालियर से रायरू में शिफ्ट किया जाना।

भिण्ड-इटावा रेलवे लाइन पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाना।

रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट का काम अधूरा।

सिंगरौली-निजामुद्दीन एक्सप्रेस का स्टॉपेज ग्वालियर में होना।

ग्वालियर-पुणे एक्सप्रेस को सप्ताह में दो दिन चलाना।

रेलवे के पार्सल सिस्टम में सुधार किया जाना।

रेलवे का पार्किंग सिस्टम कम्प्यूटराइज्ड किया जाना।

बिरलानगर रेलवे स्टेशन को आदर्श स्टेशन बनाना।

गतिमान एक्सप्रेस को भोपाल तक चलाया जाना।

स्मार्ट सिटी के तहत कुछ नहीं लगा हाथ, ग्वालानगर बसा नहीं, अमृत योजना ने दी धूल फांकने की सौगात

वर्ष 2018 शहर के लिए कुछ खास नहीं रहा। महानगर भले ही स्मार्ट सिटी योजना में शामिल हो चुका था, लेकिन नगर में स्मार्ट सिटी योजना के तहत होने वाले कार्य केवल कागजोंं में सिमटे रहे और विभाग की कुर्सी हथियाने की राजनीति में ही पूरा वर्ष निकल गया। इस योजना के तहत न तो शहर का विकास हुआ और न ही पार्कों को स्मार्ट बनाया जा सका। अमृत योजना के तहत नगर में डाली जाने वाली पाइप लाइन लोगों लिए मुसीबत लेकर जरूर आई और लोगों को इस योजना के तहत होने वाली खुदाई के बाद धूल फांकने की सौगात जरूर मिली है। नगर निगम की बात करें तो वह पूरे साल में ग्वालानगर बसाने के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई ही कर सका। स्मार्ट के लिए न तो बैजाताल का स्वरूप बदला और न ही महानगर में बने साइकिल ट्रैक पर साइकिलें चल सकीं। केवल प्रचार-प्रसार कर ही नगर को स्मार्ट बनाने में योजना का पैसा पानी की तरह बहा दिया। वैसे शहर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के काम में सुधार भी हुआ, लेकिन शहर में कचरे के ढेर नगर निगम के लिए परेशानी का कारण बनते रहे। शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर आला अधिकरियों की भोपाल तक से खिंचाई होती रही। साल 2018 में आवारा पशु भी नगर निगम के लिए परेशानी का कारण बने रहे । कंट्रोल कमांड सेंटर भी नहीं बन पाया साढ़े चार करोड़ की बसें भी धूल खा रहीं हैं ।

20 थाने, 10 हजार से ज्यादा हुईं आपराधिक वारदातें

ग्वालियर जिले की जनसंख्या 20 लाख के करीब है। जिले की सीमा में एक महिला थाना सहित 20 थाने हैं। अपराध के मामले में प्रदेश में ग्वालियर का नाम सबसे ज्यादा चर्चित रहता है। जिले में लूट, डकैती, हत्या, चोरी, बलात्कार, दहेज प्रताडऩा के मामले सबसे ज्यादा पंजीबद्ध होते हैं। 1 जनवरी से लेकर 31 दिसम्बर तक जिले में आपराधिक वारदातों का आंकड़ा 10 हजार की संख्या पार कर गया। प्रत्येक दिन जिले में 27 से ज्यादा वारदातें पंजीबद्ध होती हैं। पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी साल भर आपराधिक वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए मैराथन बैठक कर मंथन करते हैं। बावजूद इसके बदमाश पुलिस को चकमा देकर वारदातों को अंजाम देते रहते हैं। हालांकि पिछले दो वर्षों की अपेक्षा घात लगाकर लाखों रुपए की लूट की संगीन वारदातों में थोड़ी कमी आई है, लेकिन महिलाओं के साथ झपटमार की घटनाओं ने पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल भी खड़े किए हैं। दो साल के बाद भी पुलिस बैंकों के बाहर सिटी सेंटर की बड़ी लूट की वारदातों को आज तक खुलासा नहीं कर सकी है। हमलावर पुलिस वालों पर गोली चलाकर फरार हो गए थे। ग्वालियर में प्रत्येक दिन दो मोटर साइकिल से ज्यादा चोरी के मामले में कोई सुधार नहीं हुआ है। सड़क दुर्घटनाओं में अचानक शहर में बढ़ोत्तरी हुई है। हादसों में स्कूली बच्चों ने भी अपनी जान गंवाई है। पुलिस प्रशासन को सड़क हादसों को रोकने के लिए उचित कदम उठाना चाहिए।

सुल्तानगढ़ हादसा वर्ष का चर्चित कांड: मोहना थाना क्षेत्र स्थित सुल्तानगढ़ में अगस्त माह में बारिश के पानी में नहाते समय नौ युवकों की डूबकर मौत हो गई थी। यह घटना से पूरे प्रदेश में चर्चित रही। पानी में फंसे कुछ युवकों की जान बचाने वाले ग्रामीणों को शासन ने नौकरी देकर पुरस्कृत किया है।

चुनौती बने ये अपराध: पुलिस अभिरक्षा से कुख्यात अपराधी भीमा उर्फ जितेन्द्र यादव पुलिस पार्टी पर हमला करके दो रायफल लूटकर फरार हो गया। पुलिस आज तक लूटी हुई इंसास रायफलों को बरामद नहीं कर सकी है तो वहीं एक हजार से ज्यादा मामलों में पेंडेंसी है। पेंडेंसी निराकरण के मामले में थाटीपुर व गोला का मंदिर थाने पिछड़ रहे हैं।

पुलिस को मिली शाबाशी : मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाले आरोपी को पुलिस ने दो दिन बाद ही पकड़कर उसे जेल पहुंचा दिया था। इस घटना से पूरा शहर दहल गया था, लेकिन पुलिस ने इतनी गंभीरता और सतर्कता से दरिंदे को पकड़कर शहर पर लगे कलंक को धोया। पुलिस का शहर में कई सामाजिक संस्थाओं ने स्वागत भी किया।





Updated : 2018-12-31T15:04:17+05:30
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Swadesh Digital

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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