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नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह ने सीएम को लिखा पत्र, मानसून सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग

नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह ने सीएम को लिखा पत्र, मानसून सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग
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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 25 जुलाई से शुरू होगा। इस संबंध में मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय ने राज्यपाल मंगुभाई पटेल की अनुमति से अधिसूचना जारी कर दी है। मानसून सत्र पांच दिन का होगा। मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा है कि विधानसभा का मानसून सत्र कम से कम तीन सप्ताह का रखा जाये, ताकि मानसून सत्र में जनहित के मुद्दों पर चर्चा की जा सके।

उन्होंने विधानसभा का मानसून सत्र महज पांच दिन रखे जाने पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि शिवराजसिंह चौहान ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए विपक्ष और जनता की आवाज को दबाने का काम किया है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. सिंह ने स्मरण कराते हुए कहा कि पूर्व में भी शिवराजसिंह चौहान को एक पत्र भेजकर मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 2022 की तिथि पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने के बाद निर्धारित किये जाने एवं सत्र की बैठक कम से कम 20 दिवस रखे जाने की मांग की गई थी। जिससे प्रदेश की जन-समस्यायें एवं ज्वलंत मुद्दों पर विस्तृत चर्चा सदन में हो सकें।

विधानसभा प्रजातंत्र का पवित्र मंदिर

उन्होंने सीएम को लिखे पत्र में कहा था कि विधानसभा प्रजातंत्र का पवित्र मंदिर है एवं राज्य की संपूर्ण जनता का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें राज्य की जनता के हितों के ज्वलंत मुद्दे व सरकार की नाकामियों को उजागर करने, प्रदेश में जनहितैषी योजनाओं का क्रियान्वयन करने एवं भ्रष्ट्राचार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने के अवसर प्राप्त होते हैं, लेकिन प्रदेश में जबसे भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तब से सदन की बैठकों में निरन्तर कमी होती जा रही है, जबकि संविधान में निहित भावनाओं के अनुरूप संविधान विशेषज्ञों ने समय पर वर्ष में कम से कम 60 से 75 बैठकें प्रतिवर्ष आहूत करने की सिफारिशें की गई हैं।

जन समस्याओं का निराकरण -

डॉ सिंह ने कहा कि विधानसभा के सदस्य अपने क्षेत्र की जनसमस्याओं एवं प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर सदन में चर्चा न कराये जाने से उनके क्षेत्र की जन समस्याओं का निराकरण नहीं हो पाता है। मैं यहां यह भी उल्लेख करना चाहता हूं कि राज्य सरकार की यह मानसिकता हो गई है कि विधानसभा का सत्र केवल सरकारी कामकाज निपटाने के लिए सीमित बैठके बुलाई जाए।

सात न्यायिक जांच आयोगों की रिपोर्ट

उन्होंने पत्र में कहा था कि विधानसभा के पटल पर जांच आयोग के प्रतिवेदन, लोकायुक्त के प्रतिवेदन, विश्वविद्यालय के प्रतिवेदन एवं अन्य प्रतिवेदनों पर विगत कई वर्षाे से चर्चा नहीं कराई गई है। इसके अलावा विभिन्न घटनाओं की जांच हेतु गठित किए गए सात न्यायिक जांच आयोगों की रिपोर्ट अभी तक विधानसभा के पटल पर नहीं आई हैं। कुछ आयोगों द्वारा जांच प्रतिवेदन सौंपे जाने के बाबजूद भी उन प्रतिवेदनों को विधानसभा के पटल पर जानबूझकर नहीं रखा गया।

कांग्रेस करेगी विरोध -

नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश के कई महत्वपूर्ण ज्वलंत मुद्दों को गिनाते हुए कहा कि जिन पर विधानसभा में चर्चा किया जाना आवश्यक है। डॉ. गोविंद सिंह ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सत्र की अवधि बढ़ायी जाये। यदि अवधि नहीं बढ़ायी जाती है तो कांग्रेस मुख्यमंत्री के इस तानाशाही रवैये का पुरजोर विरोध करेगी।

Updated : 22 Jun 2022 12:49 PM GMT
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स्वदेश वेब डेस्क

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