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नाथ सरकार की दोहरी नीति

नाथ सरकार की दोहरी नीति
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सवर्णों के साथ इतनी नाइंसाफी क्यों ?

राजनीतिक संवाददाता भोपाल

राजनीति क्या-क्या खेल खिलाती है इसका ताजा उदाहरण मध्यप्रदेश में देखने को मिल रहा है, जहां राज्य की सत्ता पर बैठी कांग्रेस ने सवर्ण मतदाताओं की अनदेखी करते हुए पिछडों को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने वाले कानून को राज्यपाल की मंजूरी दिला दी। हांलाकि पिछड़ों का आरक्षण बढाए जाने पर किसी को ऐतराज नही है। ऐतराज आपकी उस मंशा पर है जिसमें सवर्णों के 10 प्रतिशत आरक्षण को लेकर आपकी सरकार केन्द्र के आदेशों की अनदेखी कर रही है। यह पहला अवसर नही है जब सवर्णों के साथ किसी राजनीतिक दल ने सौतेला व्यवहार किया है। इससे पहले भी कांग्रेस की सरकारें सवर्णों के नाम पर राजनीति का गंदा खेल खेलती रही हैं। केन्द्र सरकार ने पिछले दिनों आर्थिक रुप से पिछड़े सवर्ण वर्ग को दस प्रतिशत आरक्षण का कानून बनाया। कुछ राज्य सरकारों ने इसे तत्काल लागू कर दिया, लेकिन कांग्रेस शासित सरकारों ने इस यह कह कर लटका दिया कि लोकसभा चुनाव से पहले यह भाजपा का मतदाताओं को लुभाने का एक पैंतरा है। माना कि मोदी सरकार द्वारा सवर्णों के हक में बनाया गया यह कानून राजनीतिक पैंतरा है, पर कमलनाथ जी ऐन लोकसभा चुनाव की बेला में आपने किस मकसद से पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का कानून आनन-फानन में बना डाला।

क्या है पूरा मामला

दो दिन पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 27 प्रतिशत बढ़ाने का ऐलान किया था। जिसके बाद से ही सरकार ने क्रियान्वन की प्रक्रिया शुरु कर दी थी। विधि विभाग ने परीक्षण के बाद अध्यादेश सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा। विभाग ने भी बिना समय गंवाए उसे राज्यपाल को भेज दिया। जिसके बाद राज्यपाल ने इसे मंजूरी दे दी। राजभवन और सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी पुष्टि की है। उधर, विधि एवं विधायी विभाग ने राजपत्र में पिछड़ा वर्ग आरक्षण बढाए जाने की अधिसूचना जारी करने की कवायद शुरू कर दी है। अभी तक प्रदेश में पिछड़ा वर्ग को 14 प्रतिशत आऱक्षण मिलता था लेकिन अब 27 प्रतिशत मिलेगा। लोकसभा चुनाव से पहले राज्य की 53 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग आबादी को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने यह फैसला लिया। प्रदेश में सबसे बड़ा वोटबैंक पिछड़ा वर्ग है और कई सीटों पर निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि इस फैसले से उसे राजनीतिक फायदा होगा। विंध्य, बुंदेलखंड और निमाड़ क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग की प्रभावी भूमिका है। लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने बड़ा दांव खेला है। सरकार ने अध्यादेश के जरिए प्रदेश के पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने का निर्णय कर लिया। जिसे शुक्रवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी मंजूरी दे दी है। जिसके बाद पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत हो गया है। अब जल्द ही इसे लागू किया जाएगा।

एक राजनीतिक दांव यह भी

कमलनाथ सरकार ने जहां पिछड़ा वर्ग को 14 प्रतिशत से 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने का फैसला किया तो दूसरी ओर लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर दलित मतदाताओं को लुभाने के लिए भी एक दांव खेला है। कमलनाथ सरकार ने अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों की कुल ऋ ण राशि में से एक लाख रूपये तक राशि को माफ कर दिया है। यह ऋण माफी 31 दिसम्बर, 2018 तक की स्थिति में की गई है। इस संबंध में जनजातीय कार्य विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। यह ऋण माफी अनुसूचित जनजाति वर्ग के उन पात्र ऋणियों की, की गई है जिन्होंने मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त विकास निगम, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम तथा राष्ट्रीय विकलांग वित्त एवं विकास निगम से विभिन्न योजनाओं में प्राप्त ऋण राशि पर की जायेगी।


ऐसे समझें आरक्षण का गणित

यदि किसी राज्य में 100 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया अमल में लाई जानी है, तो इसमें सरकार की आरक्षण व्यवस्था के हिसाब से अनुसूचित जाति वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण मापदण्ड 16 प्रतिशत के हिसाब से 16 पद इस वर्ग के अभ्यर्थियों को दिए जाएंगे। इसीप्रकार अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए सरकार ने 20 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की है, इस हिसाब में 20 पद इस वर्ग को दिए जाएंगे और पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत से अब 27 पद मिलेंगे। सामान्य के हिस्से में 37 पद आएंगे।

सवर्णों के लिए बनाई समिति

कमलनाथ सरकार ने लोकसभा चुनाव में पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं के मत हासिल करने के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का दांव खेलकर मध्यप्रदेश के सवर्ण वर्ग को यह अहसास करा दिया कि उनकी इस सरकार में कोई पूछपरख नही है। या यूं कहें कि सवर्ण वर्ग को कांग्रेस भाजपा का वोट बैंक मानती है। शायद इसीलिए केन्द्र सरकार की ओर से सवर्ण वर्ग को दिए गए 10 प्रतिशत आरक्षण को मध्यप्रदेश में लागू न कर इसके गुणदोष तलाशने के लिए मंत्रियों की समिति का गठन कर दिया और जब तक मंत्रियों की समिति अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री कमलनाथ को सौंपेगी तब तक लोकसभा चुनाव निपट चुके होंगे।

Updated : 2019-03-10T21:42:13+05:30

Naveen

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